Home »Market »Commodity »Metals» Story Of Broken 70 Year Friendship Of Tata And Wadia

अंबानी के बाद टाटा से टकराए नुस्ली वाडिया, ऐसे टूटी 70 साल की दोस्ती

 
नई दिल्ली.देश के अरबपतियों में शुमार नुस्ली वाडिया की रतन टाटा से 70 साल पुरानी दोस्ती टूट गई है। इसकी वजह टाटा ग्रुप से हाल में हटाए गए चेयरमैन साइरस मिस्त्री बने हैं, जिनके सपोर्ट में नुस्ली वाडिया खुलकर आ गए हैं। यह इसलिए भी अहम है, क्योंकि एक दौर में टाटा ग्रुप ने ही उनकी कंपनी बॉम्बे डाइंग को बिकने से बचाकर उनकी मदद की थी। यह इसलिए भी अहम है, क्योंकि इंडस्ट्री में लंबे समय से टाटा और वाडिया की दोस्ती की मिसाल दी जाती रही है। हालांकि वाडिया के लिए कॉरपोरेट वार कोई नई बात नहीं है। इससे पहले वाडिया धीरूभाई अंबानी, गोयनका ग्रुप सहित कई से बड़ी लड़ाइयां लड़ चुके हैं।
 
 
अपने पिता से ही भिड़े थे वाडिया, टाटा ने की थी मदद
 
 
वाडिया को हमेशा से कॉरपोरेट वार में माहिर माना जाता रहा है। हालांकि वह टाटा से भिड़ेंगे, इसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। टाटा-वाडिया की दोस्ती की इंडस्ट्री में मिसाल दी जाती रही है। इसकी वजह भी काफी खास है। एक दौर में नुस्ली वाडिया को एक अनोखी लड़ाई लड़नी पड़ी, जो उनके अपने ही पिता के खिलाफ थी।
 
1971 में नुस्ली वाडिया और उनके पिता नेविली वाडिया के बीच बॉम्बे डाइंग को लेकर तलवारें खिंच गईं थी। वास्तव में नेविली वाडिया इस कंपनी को बेचना चाहते थे, जिसका नुस्ली विरोध कर रहे थे।
 
 
अगली स्लाइड में पढ़ें-टाटा ने कैसे बिकने से बचाई बॉम्बे डाइंग
 
 

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