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एक महीने के निचले स्तर पर कॉपर, डिमांड में कमी से आगे भी आ सकती है गिरावट

एक महीने के निचले स्तर पर कॉपर, डिमांड में कमी से आगे भी आ सकती है गिरावट
नई दिल्ली. घरेलू मार्केट के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मांग में कमी की वजह से कॉपर की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। लंदन मेटल एक्सचेंज पर कॉपर की कीमतों में फरवरी से अब तक 2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट हुई है। जबकि घरेलू मार्केट में कॉपर हाई लेवल से अब तक 5 फीसदी तक टूट चुका है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक डिमांड में कमी के चलते कॉपर की कीमतों में आगे भी गिरावट जारी रहने की संभावना है।
 
 
क्यों घट रही हैं कॉपर की कीमतें
 
- दुनिया के सबसे बड़े कॉपर उत्पादक चिली की खदानों में इस समय हड़ताल है।
- प्रॉफिट बुकिंग से कॉपर की कीमतों में गिरावट हुई है।
- दुनिया के सबसे बड़े कॉपर कंज्यूमर चीन ने जीडीपी ग्रोथ रेट घटा दी है, जिससे कॉपर की मांग में गिरावट हुई है। चीन दुनिया के 45 फीसदी कॉपर का इस्तेमाल करता है।
- यूरोपियन मार्केट में कोई इम्प्रूव्मेंट नहीं हो रहा है। साथ ही डॉलर में मजबूती से कॉपर निगेटिव है।
 
20 रुपए गिरा कॉपर का भाव
 
घरेलू स्तर पर कॉपर की कीमतों में पिछले एक महीने के दौरान ऊपरी स्तर से 20 रुपए यानी 4.65 फीसदी की कमी हुई है। कॉपर का करंट भाव 389.30 रुपए प्रति किग्रा है।
 
इंटरनेशनल मार्केट में गिरा दाम
 
लंदन मेटल एक्सचेंज पर कॉपर की कीमतों में पिछले महीने में 130 डॉलर प्रति टन की गिरावट हुई है। 2 फरवरी को कॉपर का भाव 5963 डॉलर प्रति टन था, जो गिरकर अब 5833 डॉलर प्रति टन हो गया है। चिली की खदानों में हड़ताल के बाद 13 फरवरी को कॉपर 6,204 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया था, जो 20 महीने का उच्चतम स्तर था।
 
कीमतें घटने से मार्जिन पर असर नहीं
 
दिल्ली के कॉपर कंपनी व्हील्स पॉलिमर के डायरेक्टर अभिनव गुलाटी के मुताबिक कॉपर की कीमतों में गिरावट से हमारे मार्जिन पर असर नहीं पड़ा है। कंपनियों से कॉपर की डिमांड आ रही है।

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