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गारमेंट, टेक्सटाइल, लेदर इंडस्ट्री ने घटाया प्रोडक्शन, 1 लाख जॉब्स पर लटकी तलवार

नई दिल्ली। पीएम मोदी के 500 और 1,000 रुपए के नोट बैन करने का सबसे ज्यादा बुरा असर लेबर इंटेसिव सेक्टर पर पड़ा है। इसमें गारमेंट, टेक्सटाइल, लेदर, हॉजरी और ज्वैलरी सेक्टर शामिल है। कैश क्राइसिस के कारण एसएमई सेक्टर के कारोबारियों ने प्रोडक्शन शॉर्ट टर्म के लिए कम किया है। इसका सीधा असर डेली वेज पर काम करने वाले वर्करों की नौकरियों पर पड़ा है।
 
टेक्सटाइल सेक्टर ने कम किया प्रोडक्शन
 
टेक्सटाइल सेक्टर से करीब 4 लाख डेली वेज वर्कर जुड़े हुए हैं। यहां रोजाना के वेतन पर काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या सबसे ज्यादा है। नोएडा में ज्योति अपैरेल्स के अनिल गुप्ता ने moneybhaskar.com को बताया कि दिल्ली एनसीआर में टेक्सटाइल यूनिट ने प्रोडक्शन कुछ समय के लिए घटाया है क्योंकि उनका स्टॉक मार्केट में नहीं जा रहा है। रॉ मैटेरियल खरीदने के लिए पैसा नहीं है जिसके कारण प्रोडक्शन घटाया है। तिरपुर में छोटी यूनिट ने प्रोडक्शन अस्थायी तौर पर प्रोडक्शन बंद किया है।
 
प्रोडक्शन घटाने का असर पड़ा लेबर पर
 
गुप्ता ने बताया कि प्रोडक्शन घटाने का सीधा असर डेली वेज के कर्मचारियों पर पड़ा है। इन कर्मचारियों को प्रोडक्शन कम करने के कारण कुछ समय के लिए हटाया भी गया है। इन कर्मचारियों को रोजाना के काम के मुताबिक वेतन मिलता है। गुप्ता ने कहा कि मार्केट में कैश फ्लो नहीं बढ़ता तो इन कर्मचारियों की नौकरी पर लंबे समय के लिए सवालिया निशान लग जाएगा।
 
लेबर नहीं ले रही बैंक अकाउंट में सैलेरी
 
इंजीनियरियंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (ईईपीसी) के मुताबिक कुछ लेबर बैंक के जरिए डायरेक्ट पेमेंट लेने से मना कर रहे हैं। हालांकि, उनके पास बैंक अकाउंट है। उन्हें साल का 50,000 रुपए से ज्यादा खाते में दिखने का भी डर सता रहा है क्योंकि साल का 50,000 से ज्यादा खाते में दिखने से उन्हें ‘गरीबी रेखा से नीचे’ का स्टेटस छिन जाएगा। इससे उन्हें मिलने वाले बेनेफिट खत्म हो जाएंगे। कुछ कारणों में इस कारण भी लेबर काम छोड़ रही है।
 
इंडस्ट्री मिनिस्टर को भी प्रोडक्शन घटने के लिए किया आगाह
 
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के अजय सहाय ने बताया कि कैश क्राइसिस के कारण प्रोडक्शन कम रहने के बारे में मीटिंग में मंत्री सीतारमन को बताया गया था। वहां एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल और टेक्सटाइल सेक्टर की एसोसिएशन ने कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्टर को भी प्रोडक्शन कम रहने के लिए पहले से आगाह कर दिया है। गारमेंट और टेक्सटाइल सेक्टर से करीब 3.2 करोड़ लोगों को रोजगार मिला हुआ है। इसमें डेली और वीकली वेज पर काम करने वाले कर्मचारियों को नौकरी पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है।
 
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