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ओला-उबर में सफर करना हुआ महंगा, डिमांड-सप्लाई गैप के नाम पर 50 फीसदी तक बढ़ा किराया

नई दिल्ली। अगर आपको ओला-उबर के सर्ज प्राइसिंग के बारे में नहीं पता है तो आपकी जेब कट सकती है। डिमांड और सप्लाई में गैप के नाम पर इन दिनों ऐप बेस्ड टैक्सी एग्रीगेटर्स ओला और उबर कस्टमर्स से नॉर्मल से 40-50 फीसदी ज्यादा किराया वसूल रही हैं। इस बात की शिकायत पिछले कई दिनों से दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरू जैसे शहरों से आ रही हैं। कंपनियों ने भी माना है कि जहां पर डिमांड और सप्लाई में ज्यादा गैप आ रहा है, वहां सर्ज प्राइसिंग अप्लाई हो रहा है। इसकी वजह जनवरी से ही अलग-अलग शहरों में ड्राइवर्स की हड़ताल को बताया गया है। 
 
बता दें कि पिछले कई दिनों ओला और उबर के बिजनेस पार्टनर्स ड्राइवर्स ज्यादा इंसेंटिव और सुविधाओं की मांग को लेकर दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरू जैसे शहरों में स्ट्राइक कर रहे हैं। ओला और उबर से बात-चीत में पता चला है कि इसी वजह से कई बार डिमांड और सप्लाई में गैप हो जाता है। जिसकी वजह से उन खास लोकेशंस पर सर्ज प्राइसिंग अप्लाई करना पड़ रहा है। जबकि, यात्रियों का कहना है कि नॉन-पीक ऑवर्स में भी उनसे नॉन5अवेबिलिटी की वजह से नॉर्मल से 50 फीसदी तक ज्यादा किराया लिया जा रहा है। 
 
ऐप पर किराए में बदलाव नहीं, नॉन पीक ऑवर्स में भी सर्ज प्राइसिंग
यात्रियों की शिकायत पर ओला और उबर के ऐप पर जब किराया चेक किया गया तो उसमें किसी तरह का बदलाव नहीं दिखा है। उबर से जुड़े एक बिजनेस पार्टनर ने भी यह कंफर्म किया है कि कंपनी ने हाल-फिलहाल में किराए में कोई बदलाव नहीं किया है। ऐसे में यात्रियों की परेशानी और बढ़ रही है। नॉन-पीक ऑवर्स में भी ट्रैवलिंग के बाद उन्हें 40 से 50 फीसदी तक बए़ा किराया पकड़ा दिया जा रहा है। पूछने पर कैब कम होने का हवाला दिया जाता है।
 
डिमांड ज्यादा होने पर मजबूरी का हवाला
कंपनियों का कहना है कि कुछ परिस्थितियों में सर्ज प्राइसिंग मजबूरी बन जाती है। ऐप आधारित कैब सेवा देने वाली ओला के एक सीनियर ऑफिशियल ने बताया कि कई बार डिमांड बहुत ज्यादा होती है और उसकी तुलना में सप्लाई बहुत कम। पिछले दिनों ड्राइवर्स की हड़ताल से ऐसी स्थिति बनी। पीक टाइम में डिमांड ज्यादा होने से हमें अतिरिक्त ड्राइवरों का इंतजाम करना पड़ता है। इससे कैब सर्विस की भी विश्‍वसनीयता बनी रहती है। ड्राइवरों को भी डिमांड के हिसाब से पे करने पर हर परिस्थिति में सर्विस के लिए हम तैयार रहते हैं। इस वजह से डिमांड और सप्लाई में बैलेंस करने के लिए हम यह चार्ज लेते हैं।
 
किस अनुपात में लेते हैं सर्ज प्राइस
कंपनियों का कहना है कि वे सर्ज प्राइस के लिए अपनी वेबसाइट पर जानकारी देती हैं। यह सर्ज प्राइस 1.2, 2.2, 3.2 और 4.2 जैसे अनुपात में ली जाती है। 1.2 का मतलब नॉर्मल किराए का 1.2 गुना ज्यादा किराया देना होता है।

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