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6 महीने में मिलेगी ऑनलाइन मेडिसिन बेचने की मंजूरी, रेग्युलेट करेगी सरकार

नई दिल्ली.केंद्र सरकार ने ई-फार्मेसी को रेग्युलेट करने की स्कीम तैयार कर ली है। 6 महीने में ई-फॉर्मेसी के लिए नॉर्म्स तैयार कर लिए जाएंगे और इसे कानूनन मंजूरी मिल जाएगी। हेल्थ मिनिस्ट्री के सूत्रों का कहना है कि ई-फार्मेसी के रेग्‍युलेशन के लिए एक सेंट्रलाइज्ड प्लेटफॉर्म तैयार किया जाएगा, जिससे किसी तरह का मिसयूज न हो सके। नोएडा बेस्ड कंपनी ई-फॉर्मेसी के लिए नया पोर्टल तैयार करेगी। कुछ दवाओं की बिक्री पर रोक भी लगेगी....
 
 
- सूत्रों के मुताबिक, ई-फॉर्मेसी के मौजूदा ढांचे में बदलाव किए जाएंगे। कुछ दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए इनकी बिक्री पर रोक लगाई जा सकती है।
- बता दें कि अभी कई ई-कॉमर्स कंपनियां एडवर्टाइजिंग के जरिए दवाएं सेल कर रही हैं। लेकिन, कानूनन इसकी इजाजत नहीं है। ई-फॉर्मेसी के जरिए दवाओं के मिसयूज के भी मामले आए हैं। जिसके बाद से सरकार ने इसे रेग्युलेट करने का प्लान बनाया था। 
- सरकार द्वारा बनाई गई गाइडलाइन के दायरे में ऑनलाइन दवा सेल करने वाली सभी कंपनियां आएंगी। 
 
नई गाइडलाइन में क्या? 
- जानकारी के मुताबिक, डीजीसीआई द्वारा ई-फॉर्मेसी पर रिव्यू के लिए पिछले साल बनी कमिटी ने शेड्यूल एच-1 और शेड्यूल- एक्स में शामिल दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर रोक लगाने को कहा है।
- ओटीसी और डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर दवाएं इसके जरिए सेल की जा सकती हैं। हालांकि, ऑनलाइन दवाइयों की खरीद के लिए डॉक्टर द्वारा लिखा गया ओरिजिनल प्रिस्क्रिप्शन जरूरी होगा। प्रिस्क्रिप्सन की अॉथेंसिटी बिना चेक किए कोई भी ई-कॉमर्स कंपनी दवा नहीं दे सकतीं।
 
इन दवाइयों पर लगेगी रोक
- नई गाइड लाइन में नॉरकोटिक मेडिसिन जैसे मॉर्फिन और हैबिट फॉर्मिंग मेडिसिन जैसे नींद की दवाइयों के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बिकने पर रोक लग सकती है।
- इसके लिए साइड इफेक्ट के डर वाली कुछ दवाइयों की लिस्ट भी तैयार की गई है। ऐसा दवाओं का मिसयूज रोकने के लिए किया जा रहा है।
 
फॉर्मासिस्ट का भी ऑथेंटिकेशन जरूरी
- ई-कॉमर्स कंपनियों को अपनी वेबसाइट या मोबाइल एप पर अपने प्लेटफॉर्म से जुड़े फॉर्मासिस्ट के लोगो, लाइसेंस, कॉन्टैक्ट आदि की जानकारी देना जरूरी होगा। कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सभी दवाइयों की लिस्ट के साथ उन्हें बनाने वाली कंपनी के नाम व उनकी क्वालिटी भी बतानी होगी। 
 
जरूरी लेकिन बदलाव की जरूरत
- पिछले साल ई-फार्मेसी पर रिव्यू करने के लिए बनाई गई सब कमिटी ने कुछ बदलावों के साथ इसे जरूरी बताया था और ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से इसे मंजूर करने की सिफारिश की थी। हेल्थ मिनिस्‍ट्री के अनुसार ई-फॉर्मेसी जरूरत बन गई है।
- इंटरनेट की पहुंच बढ़ने के साथ लोगों को इसके जरिए फायदा मिल रहा है। इसके जरिए घर बैठे 24 घंटे दवाइयों की अवेलेबिलिटी रहती है। हालांकि, भारत में ई-फॉर्मेसी का मॉडल अभी रेग्युलेट नहीं है, जिससे कुछ शिकायतें आ रही हैं। इस वजह से एक तय गाइडलाइन से मॉडल को रेग्युलेट किए जाने की जरूरत है। 
 

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