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डि‍लि‍टल वॉलेट कंपनि‍यों के लि‍ए सि‍क्‍युरि‍टी ड्रॉफ्ट गाइडलाइन जारी, 20 मार्च तक मांगी राय

डि‍लि‍टल वॉलेट कंपनि‍यों के लि‍ए सि‍क्‍युरि‍टी ड्रॉफ्ट गाइडलाइन जारी, 20 मार्च तक मांगी राय
  
नई दि‍ल्‍ली। केंद्र सरकार की ओर से डि‍जि‍टल वॉलेट कंपनि‍यों के लि‍ए ड्रॉफ्ट गाइडलाइन जारी की है। यह गाइडलाइन कंपनि‍यों की ओर से ट्रांजैक्‍शन की सि‍क्‍युरि‍टी को सुनि‍श्‍चि‍त करने के लि‍ए है। ऐसा इसलि‍ए कि‍या जा रहा है क्‍योंकि‍ सरकार और कंपनि‍यों की ओर इलेक्‍ट्रॉनि‍क पेमेंट्स को प्रोमोट कि‍या जा रहा है।
 
20 मार्च तक मांगे सुझाव
 
इलेक्‍ट्रॉनि‍क एंड इंफॉर्मेशन टेक्‍नोलॉजी मि‍नि‍स्‍ट्री ने लोगों से राय मांगने के लि‍ए ड्रॉफ्ट इंफॉर्मेशन टेक्‍नोलॉजी (सि‍क्‍युरि‍टी ऑफ प्रीपेड पेमेंट इंस्‍ट्रूमेंट) रूल्‍स 2017 को जारी कि‍या है। लोगों से 20 मार्च तक सुझाव मांगे हैं।
 
ड्रॉफ्ट में क्‍या कहा गया...
 
-ड्रॉफ्ट नि‍यमों में पेटीएम, फ्रीचार्ज और मोबि‍क्‍वि‍क जैसी डि‍जि‍टल वॉलेट कंपनि‍यों के लि‍ए सि‍क्‍युरि‍टी मापदंडों को बताया गया है।
-इसके अलावा, कस्‍टमर्स की शि‍कायतों और डाटा प्रोटेक्‍शन के लि‍ए एक अलग स्‍टैंडर्ड बनाने के लि‍ए कहा गया है।
-सरकार की ओर से बनए गए नि‍यमों और स्‍टैंडर्ड के आधार पर प्रत्‍येक प्रीपेड पेमेंट इंस्‍ट्रूमेंट (पीपीआई) या डि‍जि‍टल वॉलेट को सि‍क्‍युरि‍टी पॉलि‍सी को डेवलप करने के लि‍ए कहा गया है।
-ड्रॉफ्ट नि‍यमों में कहा गया, ‘प्रत्‍येक ई-पीपीआई प्रोवाइड को कम से कम एक साल में एक बार सि‍क्‍युरि‍टी मानकों का रि‍व्‍यू करना होगा।’
-‘इसके अलावा, कि‍सी भी प्रमुख सि‍क्‍युरि‍टी घटना या सेंध से पहले या इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर और प्रक्रि‍या में बड़ा बदलाव करने से पहले सि‍क्‍युरि‍टी मानकों का रि‍व्‍यू करना होगा।’
-इसके अलावा, नि‍यमों में प्रत्‍येक कस्‍टमर्स को डि‍लि‍टल वॉलेट्स जारी करते वक्‍त ट्रांजैक्‍शन के वक्‍त दो कारकों के ऑथेंटि‍केटेकशन को अपनाना अनि‍वार्य होगा।

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