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HDFC बैंक चीफ आदित्य पुरी ने डिजिटल वालेट पर उठाए सवाल, कहा-Paytm जैसी कंपनियों का नहीं है भविष्य

नई दिल्ली। एचडीएफसी बैंक के चीफ आदित्य पुरी ने डिजिटल वालेट कंपनियों पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पेटीएम जैसी प्रीपेड वालेट कंपनियों का कोई भविष्‍य नहीं है। ये कंपनियां कैश बैक के सहारे कस्टमर्स को अट्रैक्ट करती हैं और इनका भविष्‍य नजर नहीं आता। पुरी ने शुक्रवार को नैसकॉम इंडिया लीडरशिप फोरम में यह बात कही। बता दें कि नोटबंदी के बाद देश में होने वाले डिजिटल ट्रांजैक्शन का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है।
 
पेटीएम का वर्तमान घाटा 1600 करोड़ रुपए
डिजिटल पेमेंट के नए ट्रेंड को लेकर आदित्य पुरी आशंकित नजर आए। उन्होंने कहा कि पेमेंट बिजनेस में कोई फायदा नहीं है। पेटीएम का वर्तमान घाटा 1600 करोड़ रुपए है और इसका फाइनेंशियल मॉडल आंशकाओं से भरा है। आप ऐसा बिजनेस नहीं कर सकते, जिसमें यह कहा जाए कि 500 रुपए के बिल का पेमेंट करो और आपको इसके बदले 250 रुपए कैश बैक मिलेगा।
 
अलीबाबा नहीं बन सकता पेटीएम
पुरी ने कहा कि पेटीएम दूसरा अलीबाबा नहीं बन सकता है, क्‍योंकि इसके मॉडल की कॉपी नहीं की जा सकती। पुरी का यह कमेंट इसलिए भी अहम है, क्योंकि एचडीएफसी बैंक के पास खुद की वालेट सर्विस चिल्लर है।
 
UPI जैसे माध्यम ज्यादा कारगर होंगे
पुरी ने कहा कि लॉन्ग टर्म में UPI  (यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस) जैसे माध्यम ज्यादा कारगर होंगे क्योंकि उनके जरिए सीधे बैंक अकाउंट्स से पैसा ट्रांसफर किया जा सकता है। मोबाइल ई-वालेट को नोटबंदी के बाद लोकप्रियता मिली है, लेकिन जैसे-जैसे डिजिटल पेमेंट के नए विकल्प सामने आएंगे,  हो सकता है कि इनका इस्तेमाल कम हो जाए। उन्होंने कहा कि इनके जरिए एक्सचेंज नहीं किया जा सकता। ट्रांसफर के लिए पैसा भेजने वाले और रिसीव करने वाले के पास एक ही कंपनी का अकाउंट होना चाहिए।
 
ट्रांसफर किए गए पैसे पर ब्याज नहीं
इसके अलावा मोबाइल वालेट में ट्रांसफर किए गए पैसे पर कोई ब्याज भी नहीं मिलता। छोटे व्यापारी डिजिटल वालेट से 25 हजार रुपए प्रति माह से ज्यादा नहीं ले सकते, जिससे कैश फ्लो पर असर पड़ता है।
 
 

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