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अनलिस्‍टेड फर्म्‍स पर लगने वाले नए टैक्‍स से स्‍टार्टअप्‍स और एफडीआई को मिलेगी छूट : सरकार

अनलिस्‍टेड फर्म्‍स पर लगने वाले नए टैक्‍स से स्‍टार्टअप्‍स और एफडीआई को मिलेगी छूट : सरकार
नई दिल्‍ली।अनलिस्‍टेड कंपनियों को शेयर ट्रांसफर करने पर स्‍टार्टअप्‍स और एफडीआई के तहत लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन्‍स टैक्‍स नहीं लगेगा। सरकार ने इन्‍वेस्‍टर्स की आशंका को खत्‍म करते हुए कहा कि यह टैक्‍स सिर्फ खोका (फर्जी) कंपनियों पर लगाया जाएगा। लीगल तरीके से काम कर रहे इन्‍वेस्‍टर्स को इसके लिए परेशान नहीं किया जाएगा।
 
लिस्‍टेड सिक्‍युरिटीज को दी जाती है छूट
 
रेवेन्‍यू सेक्रेटरी हंसमुख अदिया ने बताया कि सिक्‍योरिटीज ट्रांजैक्‍शन टैक्‍स (एसटीटी) 2004 में लागू किया गया था। एसटीटी-पेड लिस्‍टेड स्‍टॉक्‍स से जो कैपिटल गेन्‍स हासिल किया जाता है। उनसे लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन्‍स टैक्‍स नहीं वसूला जाता। यह सिर्फ लिस्‍टेड सिक्‍युरिटीज के लिए मौजूद है। लेकिन कुछ लोग इस सुविधा का इसतेमाल फर्जी कंपनी बनाकर करते हैं। वह इसमें कुछ इन्‍वेस्‍टमेंट दिखाते हैं और कंपनी को लिस्‍ट कर देते हैं। लिस्‍ट होने के कुछ समय बाद ही उसे निकाल भी देते हैं। प्रभावी रूप में देखें तो इन्‍वेस्‍टमेंट एक साल के लिए किया गया था, लेकिन वे लिस्‍ट होते ही बाहर निकल जाते हैं।
 
फर्जी कंपनियां बनाकर ब्‍लैकमनी को बनाते हैं व्‍हाइट
 
यह ब्‍लैकमनी को व्‍हाइट बनाने का सबसे आसान तरीका बन गया था। इसके लिए उन्‍हें टैक्‍स भरना नहीं पड़ता था। लोग खोका कंपनियां बनाकर इस काम को अंजाम देते हैं। सरकार ऐसे इन्‍वेस्‍टर्स से लिस्टिंग के दौरान और इससे बाहर निकलते वक्‍त भी एसटीटी वसूलना चाहती है, लेकिन बजट में इसे बदलकर अब लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन्‍स में बदल दिया गया है।
 
बजट में किया गया है बदलाव
 
यह बदलाव अनलिस्‍टेड कंपनियो के लिए हुआ है, जो 1 अक्‍टूबर 2004 से लागू होगा, अगर इससे पहले एसटीटी नहीं भरा है। रेवेन्‍यू सेक्रेटरी ने बताया कि कानूनन हमारे पास अधिकार है कि हम कुछ कैटेगरीज के इन्‍वेस्‍टर्स को इसमें छूट दे सकते हैं। ऐसे में हम हर सही मामले में इस टैक्‍स छूट देने पर विचार किया जाएगा।

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