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निर्यात के लिए कुछ खट्टा-कुछ मीठा रहा बजट

निर्यात के लिए कुछ खट्टा-कुछ मीठा रहा बजट
सबसे पहले संतुलित और दूरगामी परिणाम वाले बजट के लिए सरकार को बधाई। मोदी सरकार के इस बजट में निर्यात को कई स्तर पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। लेकिन इसमें भी कोई दो राय नहीं है कि आने वाले समय में निर्यात के लिए तैयार चुनौतियों में कोई कमी आएगी। निर्यात को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। 
 
सरकार ने जताई चिंता
इससे पहले इकोनॉमिक सर्वे में सरकार ने गिरते निर्यात और घरेलू स्तर पर तैयार होने वाले उत्पादों में कमी और गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई थी। सरकार ने यह माना कि घरेलू स्तर पर तैयार होने वाले उत्पाद वैश्विक प्रतिस्पर्धी नहीं हैं। खासतौर से लेबर इंटेसिव सेक्टर में स्किल की बड़े स्तर पर जरूरत है।
 
बजट से टूटी इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम की आस
हमें उम्मीद थी कि सरकार इस बजट में छोटे निर्यातकों को प्रोत्साहित करने के लिए इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम लागू करेगी। हालांकि, सिर्फ इस स्कीम को लागू करने के लिए बजट में ही ऐलान हो जरूरी नहीं है। आगे इस संबंध में सरकार ऐलान कर सकती है।
 
सेनवेट क्रेडिट की अवधि 6 महीने बढ़ी
सेनवेट क्रेडिट के तहत एक्साइज ड्यूटी वापस करने की अवधि छह महीने थी। इसे बढ़ाकर 12 महीने कर दिया गया है। इस कदम से छोटे निर्यातकों को बड़ी राहत मिलेगी।  इससे पहले वे तय अवधि के भीतर कर्ज लौटा पाने में विफल हो जाते थे। अब उन्हें कर्ज वापसी का पर्याप्त समय मिलेगा।
 
टैक्स में नहीं हुए बदलाव
एसईजेड के तहत मिनिमम अल्टरनेट टैक्स और डिविडेंट डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स में कोई बदलाव नहीं किया है। निर्यात क्षेत्र को इस बजट में टैक्स दरों को कम करने की उम्मीद थी। लेकिन यहां मायूसी हाथ लगी।
 
स्किल डेवलपमेंट थी बड़ी जरूरत
सरकार ने उक्त समस्याओं को ध्यान में रखते हुए कई अहम प्रस्ताव इस बजट में दिए हैं। नेशनल स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम इस दिशा में काफी मददगार होगा। क्योंकि उत्पादों को वैश्विक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कुशल श्रमिकों की जरूरत है। निर्यात क्षेत्र में कई श्रम प्रधान उद्यमों की बड़ी भागीदारी है। ऐसे में मेक इन इंडिया के जरिए रोजगार और स्किल डेवलपमेंट से श्रमिकों की भागीदारी बढ़ेगी। उत्पादन बढ़ेगा। निर्यात में भी बढ़ोत्तरी आएगी।
 
इंफ्रास्ट्रक्चर पर काफी फोकस, मिलेगा इससे फायदा
सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर में काफी फोकस किया है। इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होने से निर्यात को भी गति मिलेगी। सरकार ने रोड, अल्ट्रा मेगापावर प्रोजक्ट इत्यादि पर बड़े निवेश की बात कही है। इसका दूरगामी सकारात्मक परिणाम निर्यात पर पड़ेगा।
  
रोड ट्रांसपोर्ट के लिए सर्विस टैक्स छूट
अब निर्यातकों को फैक्ट्री से प्रोडक्ट को निर्यात के लिए पोर्ट तक पहुंचाने में लगने वाला सर्विस टैक्स नहीं देना पड़ेगा। पहले निर्यातक को फैक्ट्री से बाहर माल निकलते ही सर्विस टैक्स देना पड़ता था। इससे निर्यातकों को काफी राहत मिलेगी।
 
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस
देश में कारोबार शुरू करने की आसान करने की के लिए सरकार ने कई प्रस्ताव किए हैं। इससे भी देश में उद्यमिता का माहौल तैयार होगा। इसके अलावा क्वालिटी युक्त प्रोडक्ट के निर्माण पर भी जोर देने की बात सरकार ने कही है। बजट में निर्यात के लिए दूरगामी घोषणाएं हैं। हालांकि, आने वाले समय में निर्यात चुनौतीपूर्ण रहेगा। 
 
( विशेषज्ञ अजय सहाय फेडरेशन ऑफ एक्सपोर्ट्स काउंसिल के डायरेक्टर जनरल हैं। )

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