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ऑपरेशन क्लीनमनी को अच्छा रिस्पॉन्स, 5.27 लाख टैक्सपेयर्स ने दिया जवाब

नई दिल्ली.इनकम टैक्स डिपार्टमें द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन क्लीन मनी को अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। इस स्कीम के तहत अभी तक भेजे गए 18 लाख एसएमएस और ईमेल्स पर 12 फरवरी तक 5.27 लाख टैक्सपेयर्स ने ई-फाइलिंग पोर्टल पर जवाब फाइल किया। एसएमएस और ई-मेल्स उन लोगों को भेजे गए थे, जिन्होंने नोटबंदी के बाद अपने अकाउंट्स में काफी कैश डिपॉजिट किया था और जो आईटी डिपार्टमेंट को संदिग्ध लगा। बचे हुए लोगों को जवाब देने के लिए 15 फरवरी तक का वक्त दिया गया है। जो लोग ऐसा नहीं कर पाएंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 99.5फीसदी ने माना-नोटबंदी के दौरान किया कैश डिपॉजिट...
 
 
 
 
- आईटी डिपार्टमेंट ने कहा कि 5.27 लाख लोगों में से 99.5 फीसदी ने 30 दिसंबर को खत्म हुए 50 दिन के नोटबंदी के पीरियड के दौरान कैश डिपॉजिट की बात मानी। ये डिपॉजिट 7.41 लाख बैंक अकाउंट्स में किए गए थे।
-सीबीडीटी ने एक बयान में कहा, ‘इस ऑपरेशन को अच्छा रिस्पॉन्स मिला और 12 फरवरी, 2017 तक 5.27 लाख टैक्सपेयर्स अभी तक अपना जवाब दे चुके हैं।’
 
एडिशनल 25हजार बैंक अकाउंट्स का हुआ खुलासा
-‘ऑपरेशन क्लीन मनी’ के अंतर्गत मिलीं एसएमएस/ईमेल क्वेरीज का जवाब देते हुए एसेसीज ने एडिशनल 25 हजार बैंक अकाउंट्स का खुलासा किया, जिनमें कैश डिपॉजिट किया गया।
-सीबीडीटी ने कहा, ‘डिपार्टमेंट इस बात से उत्साहित है कि टैक्सपेयर्स ने ऐसे एडिशनल 25 हजार अकाउंट्स का ब्योरा दिया है, जिनमें कैश डिपॉजिट किया गया है।’
 
 
रिस्पॉन्स का एनालिसिस कर रहा टैक्स डिपार्टमेंट
-आईटी डिपार्टमेंट की पॉलिसी मेकिंग बॉडी सीबीडीटी ने कहा, ‘टैक्सपेयर्स द्वारा कैश डिपॉजिट के संबंध में दिए गए जवाब का उनके बिजनेस के नेचर और पूर्व में फाइल किए गए रिटर्न के आधार पर एनालिसिस किया जा रहा है।’
-डिपार्टमेंट ने 31 जनवरी को लॉन्च किए गए ऑपरेशन क्लीन मनी के अंतर्गत 5 लाख से ज्यादा संदिग्ध कैश डिपॉजिट के मामले में 18 लाख लोगों को एसएमएस/ईमेल भेजे थे और उन्हें ई-फाइलिंग पोर्टल जवाब देने के लिए 10 दिन का समय दिया था।
-पिछले हफ्ते टैक्स डिपार्टरमें ने जवाब देने के लिए तय तारीख बढ़ाकर 15 फरवरी कर दी थी और टैक्सपेयर्स को जवाब देने में मदद के लिए एक विस्तृत एफएक्यू भी जारी किया था।
 
 
एसएमएस और ई-मेल क्वेरीज पर क्लैरिफिकेशन
-टैक्स डिपार्टमेंट ने एक एफएक्यू के माध्यम से नोट बंदी के बाद हुए संदिग्ध डिपॉजिट्स के संबंध में मिले एसएमएस या ई-मेल क्वेरीज के जवाब को लेकर होने वाली आशंकाओं को दूर करते हुए कहा कि एसेसीज को कैश के सोर्स पर ‘स्पष्टीकरण’ देना चाहिए।
-यदि मल्टीपल सोर्सेज से कैश डिपॉजिट किया गया हो या 8 नवंबर तक बड़ी मात्रा में कैश मौजूद था, तो एसेसीज को ई-फाइलिंग पोर्टल पर ब्योरा देना होगा, जो बैंक से निकाले गए कैश, बिना पैन वाले शख्स से मिले कैश, अनजान शख्स से मिले कैश और पूर्व की इनकम या सेविंग्स से मिले कैश के रूप में होगा।
 
पीएमजीकेवाई स्कीम में डिपॉजिट रकम की दे सकते हैं जानकारी
- एसेसी इस बात की भी जानकारी दे सकता है कि उसने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएमजीकेवाई) के तहत कितनी रकम जमा कराई है या वह इस स्कीम में कितनी रकम जमा करेगा, जिसमें 50 फीसदी टैक्स और पेनल्टी देकर पैसे को व्हाइट बनाया जा सकता है।
-आईटी डिपार्टमेंट ने कहा कि वेरिफिकेशन के लिए केस को चुने जाने के अवसर कम करने के लिए चिह्नित व्यक्ति (पैन सहित) की डिटेल्स उपलब्ध कराने की सलाह दी जाती है।
-डिपार्टमेंट ने कहा, ‘किसी एक व्यक्ति से 20 हजार रुपए या ज्यादा के कैश की प्राप्ति के मामले में उम्मीद की जाती है कि डिटेल्स उपलब्ध कराई जाए।’
 
फार्म इनकम और एडवांस सैलरी के मामले में क्या कहा
- इसके अलावा यदि किसी को कैश फार्म इनकम जैसे किसी ऐसे माध्यम से मिला है, जिसे टैक्स से छूट प्राप्त है तो उसे ‘कैश रिसीट्स एक्जंप्ट फ्रॉम टैक्स’ के हेड में दिखाया जा सकता है। ऐसा सिर्फ तभी किया जा सकता है, जब वह किसी बिजनेस में न हो।
- एसेसी को एडवांस सैलरी के मामले में एफएक्यू में कहा गया कि उसे आईटी पोर्टल पर रिस्पॉन्स फाइल करते समय इम्प्लॉयर का नाम और उससे जुड़ा ब्योरा देना होगा, जिससे उसे कैश मिला हो।

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