Home »Economy »Taxation» OECD Says India Should Cut Corporate Tax, Go For Inheritance Levy

गरीबी दूर करने में जीएसटी मददगार साबित होगा, टैक्‍स नीतियों में स्थिरता की जरूरत

नई दिल्‍ली। ग्‍लोबल थिंक टैंक आर्गनाइजेशन ऑफ इकोनामिक कोपरेशन एंड डेवलपमेंट  (ओईसीडी) का मानना है कि नोटबंदी का असर भारत की अर्थव्‍यवस्‍था पर थोड़े समय के लिए पड़ेगा, लेकिन बाद में यह फायदेमंद साबित‍ होगा। इनकी तरफ से कराए गए इकोनामिक सर्वे ऑफ इंडिया में कहा गया है कि जीएसटी के लागू होने के बाद राजस्‍व में बढ़ोत्‍तरी होगी, जिससे गरीबी दूर करने के कार्यक्रमों को अच्‍छी तरह से चलाया जा सकेगा। साथ ही सरकार को सलाह दी गई है उसे कार्पोरेट टैक्‍स 25 फीसदी तक लाना चाहिए और टैक्‍स नीतियों में स्थिरता दिखनी चाहिए। सर्वे में अनुमान जताया गया है कि चालू वित्‍त वर्ष में जीडीपी 7 फीसदी रहेगी, जबकि अगले साल यह 7.3 फीसदी और वर्ष 2018-19 में बढ़कर 7.7 फीसदी हो जाएगी।
 
संपन्‍नता बढ़ी, लेकिन गरीबी घटी नहीं
 
सर्वे में इस बात को उठाया गया है कि भारत में संपन्‍नता तो बढ़ी है, लेकिन गरीबी नहीं घटी है। सर्वे के अनुसार कृषि उत्‍पादकता बढ़ने, इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर में निवेश और उदार नीतियों के चलते देशभर में लोगों की लिविंग स्‍टैंडर्ड बढ़ा है।
 
जीएसटी रिफार्म का पूरा फायदा उठाने के‍ लिए बदलनी होंगी नीतियां
 
सर्वे के अनुसार पर्सनल इनकम और कार्पोरेट टैक्‍स के अलावा प्रॉपर्टी से जुड़े कानूनों में बदलाव से जीएसटी का पूरी तरह से फायदा उठाया जा सकेगा। ऐसा होने से सरकार की आमदनी बढ़ेगी, जिससे सोशल और फिजिकल इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर पर निवेश बढ़ेगा। इसका फायदा समाज को कई तरीके से मिलेगा।
 
टैक्‍स व्‍यवस्‍था में सुधार की जरूरत
 
सर्वे में कहा गया है कि कार्पोरेट टैक्‍स को 30 फीसदी से घटा कर धीरे धीरे 25 फीसदी किया जाना चाहिए और टैक्‍स का आधार भी बढ़ाना चाहिए। टैक्‍स का आधार बढ़ाने के लिए जरूरी है कि टैक्‍स नीतियां साफ सुथरी हों और उनमें स्‍थायित्‍व हो।

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