Home »Economy »Taxation» GST Will Be A Reality Soon As All States Were On Board Says Shaktikanta Das

1 जुलाई से लागू होगा GST, सभी राज्‍य सहमत: शक्तिकांत दास

नई दिल्‍ली. एक दशक से ज्‍यादा समय से अटका गूड्स एंड सर्विसेस टैक्‍स (जीएसटी) 1 जुलाई 2017 से लागू हो सकता है। इकोनॉमिक अफेयर्स सेक्रेटरी शक्तिकांत दास ने मंगलवार को कहा है कि जीएसटी 1 जुलाई से लागू हो जाएगा। सभी राज्‍य सहमत हो गए हैं। उन्‍होंने बताया कि जीएसटी गेमचेंजर होगा और यह कई कंज्‍प्‍शन टैक्‍सेस की जगह लेगा। जीएसटी लागू होने से इंडिया का कॉम्‍पीटिटवनेस, इन्‍वेस्‍टमेंट और जॉब क्रिएशन बढ़ेगा।  
 
 
 
- पिछली जीएसटी मीटिंग के बाद हालांकि यह कहा गया कि जीएसटी एक जुलाई से लागू नहीं हो सकता है।
- कई राज्‍यों ने शुरुआत में इकोनॉमिक और पॉलिटिकल कारणों से जीएसटी के कई प्रपोजल्‍स का विरोध किया था।
- जीएसटी के लागू होने से सेंट्रल, स्‍टेट, इंटरस्‍टेट और लोकल टैक्‍सेस खत्‍म हो जाएंगे। उनकी जगह देशभर में एक सिंगल टैक्‍स सिस्‍टम लागू होगा।  
 
वित्‍त मंत्री जेटली ने क्‍या कहा? 
- वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने लंदन से न्‍यूज एजेंसी पीटीआई को बताया, ‘‘तमाम अटकलों के बावजूद उम्‍मीद है कि जीएसटी 1 जुलाई तक लागू होने की स्थिति में आ जाएगा। इससे जुड़ी सभी प्रॉसेस को 15 सितंबर तक पूरा कर लिया जाएगा।’’
- ‘‘आजादी के बाद यह सबसे बड़ा टैक्‍स रिफॉर्म है। इसके एकबार लागू होने पर यह सबसे प्रभावकारी टैक्‍स सिस्‍टम होगा।’’
- उन्‍होंने कहा, ‘‘कानून का ड्रॉफ्ट तैयार हो गया है। दो हफ्ते पहले हमने पहले ड्रॉफ्ट को मंजूरी दे दी है। मार्च के पहले हफ्ते में दूसरे ड्रॉफ्ट का लाया जाएगा। संसद का सत्र 9 मार्च से शुरू हो रहा है।’’
 
4-5 मार्च को होगी काउंसिल की मीटिंग
- जीएसटी को लागू करने के लिए प्रपोज्ड 3 अन्य बिलों के ड्राफ्ट को मंजूरी 4-5 मार्च को जीएसटी काउंसिल की प्रपोज्‍ड मीटिंग में मिल सकती है।
- इनमें सेंट्रल जीएसटी (सीजीएसटी), इंटिग्रेटेड जीएसटी (आईजीएसटी) और स्टेट जीएसटी (एसजीएसटी) बिल शामिल हैं, जिनके 5-6 प्रोविजंस की लीगल लैंग्वेज को लेकर मंजूरी रुकी हुई है।
- जीएसटी के लागू होने से केंद्र और स्टेट के लेवेल पर लागू तमाम इनडायरेक्ट टैक्स उसमें शामिल हो जाएंगे।
- यह कॉम्पनसेशन बेस्ड सिस्टम है जो गुड्स और सर्विसेज की बिक्री, मैन्युफैक्चरिंग और कंजम्प्शन पर लगाया जाएगा। इससे पूरे देश में एक समान इनडायरेक्ट टैक्स सिस्टम लागू होगा।
- जीएसटी काउंसिल ने पिछली मीटिंग में राज्यों को होने वाले रेवेन्यू लॉस की भरपाई करने वाले कानून के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी थी। इसमें राज्यों के नुकसान की हालत में कॉम्पनसेशन का प्रोविजन है।
 
4 टैक्स रेट्स का प्रपोजल
- गुड्स और सर्विसेज को जीएसटी की प्रपोज्ड चार लेवेल टैक्स रेट्स 5, 12, 18 और 28% में कैटेगराइज किया जाना है।
- जीएसटी संशोधित बिल के संसद से पास होने के बाद हर स्टेट असेंबली से स्‍टेट जीएसटी एक्‍ट को मंजूरी मिलना जरूरी होगा।  
 
 
 

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