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बजट 2017: स्‍टार्टअप्‍स के लि‍ए टैक्‍स छूट की अवध्‍ि‍ा बढ़ाई, टैक्स के नियम किए आसान

नई दिल्ली। देश में कारोबार को आसान बनाने के लिए फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने बजट 2017-18 में  सरकार ने काफी घोषणाएं की हैं। ईज ऑफ डूईंग बिजनेस के लिए बजट में फाइनेंस मिनिस्टर ने टैक्स के नियमों को आसान बनाया है। अकाउंट मेंटेंन करने के लिमिट को प्रॉपराइटर और हिन्दू अविभाजित परिवार के लिए बढ़ा दिया है।  
स्‍टार्टअप्‍स के लि‍ए टैक्‍स छूट अवधि‍ बढ़ाई
 
स्‍टार्टअप इंडि‍या पॉलि‍सी के तहत आने वाले स्‍टार्टअप्‍स अब इनकम टैक्‍स एक्‍ट, 1961 सेक्‍शन 80-आईएसी के तहत पहले सात साल में से तीन साल टैक्‍स छूट का फायदा उठा सकते हैं। इससे पहले पांच साल में तीन साल टैक्‍स छूट दी जाती थी। सरकार को कई प्रस्‍ताव मि‍ले थे जि‍समें कहा गया था कि‍ स्‍टार्टअप्‍स अपने ऑपरेशन के शुरुआती सालों में प्रॉफि‍ट नहीं कमा पातेे हैं।  
 
कंपनियों के लिए कम किया टैक्स के नियमों का बोझ
 
एंटी अवॉएडेंस कदम के तहत डोमेस्टिक ट्रांसफर प्राइसिंग के तहत आने वाली कंपनियों को फाइनेंस एक्ट 2012 के तहत लाया गया था। ऐसा करने से डोमेस्टिक प्राइसिंग के तहत आने वाली कंपनियों की संख्या बढ़ गई। इससे घरेलू कंपनियों के लिए मुश्किलेंं बढ़ती जा रही थी। कंपनियों के लिए डोमेस्टिक ट्रांसफर प्राइसिंग प्रॉविजन के तहत आने वाले नियमों के बोझ को कम किया है। अब प्रॉफिट लिंक्ड डिडक्शन का फायदा उठाने वाली कंपनी ही डोमेस्टिक ट्रांसफर प्राइसिंग के नियमों के तहत आएंगी।
 
2 करोड़ रुपए पर कराना होगा अकाउंट ऑडिट
 
अभी तक एक करोड़ रुपए तक के टर्नओवर वाले कारोबर के अकाउंट ऑडिट करवाना होता है। बजट में प्रिजम्पटिव इनकम स्कीम के तहत अब 1 करोड़ रुपए की जगह 2 करोड़ रुपए पर अकाउंट ऑडिट कराना होगा। अब प्रॉपराइटरशीप में 10 लाख रुपए के टर्नओवर की जगह 25 लाख रुपए के टर्नओवर पर अकाउंट मेंटेन करना होगा। इसका फायदा छोटे कारोबारी को होगा 25 लाख रुपए के कम टर्नओवर पर अकाउंट मेंटेन करना अनिवार्य नहीं होगा। अब हिन्दू अविभाजित परिवार के लिए लिमिट 1.2 लाख की जगह 2.5 लाख रुपए पर अकाउंट मेंटेन करना अनिवार्य होगा।
 
फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर (एफपीआई) में किए बदलाव
 
साल 2012 में इनकम टैक्स एक्ट में बदलाव किए गए थे। इंडियन कंपनी अपनी विदेशी कंपनी को शेयर या इंटरेस्ट के रूप में ट्रांसफर को इनकम टैक्स प्रावधानों के तहत छूट दी गई थी। इसे लेकर कई आशंकाएं उठाई गई और कुछ मुश्किलें भी आई। ऐसे कई मामले सामने आए जब कंपनियों नें इंडिया में कमाए प्रॉफिट को विदेशी कंपनी में ट्रांसफर कर दिया। इससे निपटने के लिए इनडयारेक्ट ट्रांसफर प्रोविजन के तहत फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर (एफपीआई) केटेगरी वन और टू में छूट दी गई है। अब इंडिया के बाहर शेयर और इंटरेस्ट से हुई इनकम के ट्रांसफर को शामिल नहीं किया जाएगा।
 
इंश्योरेंस एजेंट को नहीं देना होगा टीडीएस

अभी तक 5 फीसदी टीडीएस इंश्योरेंस एजेंट के कमीशन से काटा जाता था। अब इन्डिविजुअल इंश्योरेंस एजेंट को टीडीएस से छूट बटज में दी गई है। हालांकि, उनकी टैक्सेबल इनकम से कम होनी चाहिए।
 
अगली स्लाइड में जानें – प्रोफेशनल्स के लिए की घोषणाएं...
 

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