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2016 में इन 10 ग्‍लोबल इवेंट्स ने दिया भारतीय शेयर बाजार को झटका

2016 में इन 10 ग्‍लोबल इवेंट्स ने दिया भारतीय शेयर बाजार को झटका
 
नई दि‍ल्‍ली।यह साल इकोनॉमी के हर पहलू को छूने वाली घटना का गवाह बना। ज्‍यादातर एनालि‍स्‍ट इसी कन्‍फ्यूजन में रहे कि‍ आखि‍र रि‍एक्‍ट कैसे करें, क्योंकि‍ एक के बाद एक कई घटनाओं ने उन्‍हें उलझाए रखा। हालांकि‍ दुनि‍याभर के बाजारों ने हल्‍का सा झटका महसूस कि‍या और वे तेजी से रि‍कवर कर गए..।
 
भारतीय बाजार को छोड़ दें तो दुनि‍याभर के बाजार में बुल्‍स हावी रहे। साल 2016 चीन की करेंसी युआन में गि‍रावट के साथ शुरू हुआ और लॉन्‍ग टर्म कैपि‍टल गैन पर टैक्‍स लगने के डर के साथ खत्‍म हुआ।
 
2016 में अमेरि‍की बाजार रि‍कॉर्ड हाई पर बंद हो रहे हैं। डाउ 20,000 के पास है जो उसका रि‍कॉर्ड लेवल है और वहीं भारतीय बाजार कमजोरी के साथ बंद हो रहे हैं। आइए 2016 की उन घटनाओं पर नजर डालते हैं, जि‍न्‍होंने भारतीय बाजारों पर असर डाला और यह असर कि‍तना रहा।
 
1.चीन की मुद्रा में गि‍रावट – साल 2016 की शुरुआत ही चीन के युआन में गि‍रावट के साथ हुई और इसका असर बाजारों पर नजर आया। इस साल युआन 6.50 प्रति ‍डालॅर से 6.95 प्रति डॉलर आ गया। इसका मतलब हुआ, 7 फीसदी की गि‍रावट। जनवरी में जैसे ही युआन का गि‍रना शुरू हुआ पूरी दुनि‍या में बाजार नीचे आने शुरू हो गए और निफ्टी 7946 से 6825 पर आ गया, जनवरी-फरवरी के महज दो माह में 14 फीसदी की गि‍रावट।
 
2.ईसीबी रेट कट – चीनी झटके के बाद यूरोप से जागी उम्‍मीदों और ईसीबी रेट कट से खुश हुए दुनि‍याभर के बाजारों ने धीरे-धीरे उबरना शुरू कर दि‍या। इसके अलावा अगले 7 माह यानी मार्च से लेकर सि‍तंबर में करीब 53, 361 करोड़ के एफआईआई फ्लो ने भारत में बाजार की रफ्तार को बरकरार रखा। नि‍फ्टी 2143 प्‍वाइंट्स की रि‍कवरी करते हुए 8968 के लेवल तक आ गया और इन्वेस्‍टर्स को 31 फीसदी का रि‍टर्न दि‍या।  
 
 
3.ब्रेग्जि‍ट – ब्रिटेन के इति‍हास में 23 जून एक ऐति‍हासि‍क तारीख के रूप में दर्ज हो गई, जब यहां की जनता ने यूरोपीय यूनि‍यन से बाहर नि‍कलने के पक्ष में वोट दि‍या। कि‍सी ने अंदाजा नहीं लगाया था कि‍ ब्रि‍टेन की जनता ऐसा फैसला लेगी। अगले ही दि‍न पूरी दुनि‍या के बाजार पर इसका असर देखने को मि‍ला और नि‍फ्टी ने सीधे 343 अंकों का गोता लगाया। हालांकि‍ बंद होने से पहले उसने काफी रि‍कवरी कर ली थी। उस दि‍न बस एक झटका लगा और दुनि‍याभर के बाजार महज एक सप्‍ताह में इससे बाहर आ गए। हालांकि‍ एक्‍सपर्ट कहते हैं कि‍ जि‍स दि‍न ब्रेग्जि‍ट पूरी तरह से लागू हो जाएगा उस दि‍न दुनि‍याभर के बाजार पर इसका असर पड़ेगा।
 
 
4.जीएसटी को मंजूरी – दो साल की मोदी सरकार की मेहनत रंग लाई और राज्‍यसभा ने 3 अगस्‍त को 203 वोटों के साथ जीएसटी को पास कर दि‍या। कि‍सी पार्टी ने इसके खि‍लाफ वोट नहीं कि‍या। शेयर बाजार ने इसे हाथोंहाथ लि‍या और वो 8968 के लेवल पर जा पहंचा। बताते चलें कि‍ सरकार ने इस बि‍ल में संशोधन किए हैं।
 
5.उर्जि‍त पटेल का आना – सरकार ने 20 अगस्‍त को आरबीआई के नए गवर्नर के तौर पर उर्जि‍त पटेल के नाम की घोषणा की। यह कई लोगों के लि‍ए चौंकाने वाला था और बाजार ने इसका स्‍वागत नहीं कि‍या। नि‍फ्टी 22 अगस्‍त को 37 प्‍वाइंट नीचे आकर बंद हुआ और बैंक नि‍फ्टी 84 प्‍वाइंट गि‍रकर बंद हुआ। पूरे सप्‍ताह बाजार कमजोर रहा। इसी सप्‍ताह में नि‍फ्टी ने 95 अंक और बैंक नि‍फ्टी ने 219 अंक खोए। भवि‍ष्‍य में मौद्रि‍क नीति‍ क्‍या होगी इसे लेकर बाजार में संशय का भाव रहा।
 
6.भारत-पाक टेंशन – जब भी कई जि‍यो पॉलि‍टि‍कल घटना होती है तो उसका बाजार पर असर जरूर पड़ता है। भारतीय जवानों ने उड़ी हमले का बदला लेने के लि‍ए बॉर्डर क्रॉस कर कार्रवाई की और 38 आतंकवादि‍यों व दो पाकि‍स्‍तानी सैनि‍कों को मारने का दावा कि‍या। इस घटना ने इन्वेस्‍टर्स के मूड को प्रभावि‍त कि‍या और नि‍फ्टी 150 अंक टूट गया और इस घटना ने भारतीय बाजारों से एफआईआई के बाहर जाने के पहले ट्रि‍गर का काम कि‍या। तब से एफआईआई लगातार शेयर बेच रहे हैं और क्रि‍समस तक 33,495 करोड़ रुपए की बिकवाली कर चुके हैं।
 
 
7.नोटबंदी – 8 नवंबर को रात 8 बजे जो हुआ उसके बारे में कि‍सी ने नहीं सोचा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 रुपये के नोटों पर पाबंदी लगा दी, जो भारत की कुल सर्कुलेटेड करंसी का 87 फीसदी था। इसका भारत के उपभोग पर सीधा प्रभाव पड़ा। अगली सुबह यानी 9 नवंबर को बाजार इसके लि‍ए पहले से तैयार था। इनवेस्‍टर्स ने अमेरि‍की चुनाव के नतीजों को भी कोई खास तवज्‍जो नहीं दी।
 
आखि‍रकार नि‍फ्टी 476 और सेंसेक्‍स में 1340 प्‍वाइंट की गि‍रावट के साथ 9 /11 शुरू हुआ हुआ। दि‍न में एक बार सेंसेक्‍स 1689 प्‍वाइंट डाउन हो गया था। उस दि‍न एफआईआई ने 2095 करोड़ के शेयर बेजे और एफआईआई ने पूरे नवंबर माह में 19, 982 करोड़ के शेयर बेच डाले। यह जनवरी 2008 के बाद एक माह में एफआईआई की दूसरी सबसे बड़ी सेलि‍ग थी। जनवरी 2008 में एफआईआई ने 29, 447 करोड़ के शेयर बेचे थे।
  
 
8.अमेरि‍की चुनाव – ब्रेग्‍जि‍ट नतीजों की तरह ही सबको चौंकाते हुए अमेरि‍की चुनाव में हि‍लेरी की हार और ट्रंप की जीत ने शेयर बाजारों पर अपना असर दि‍खाया। पूरी दुनि‍या के बाजार हि‍लेरी की जीत को तय मानकर चल रहे थे। हालांकि‍ बाजार इस खबर के असर से भी जल्‍द ही उबर गए और डाउ उसी दि‍न 257 चढ़त के साथ बंद हुआ।
 
10 नवंबर को यह 18, 809 के रि‍कॉर्ड हाई लेवल पर बंद हुआ। उस दि‍न से यहां का शेयर बाजार इस उम्‍मीद में आगे बढ़ रहा है कि‍ ट्रंप टैक्‍स रि‍फॉर्म की घोषणा करेंगे। डाउ में करीब 10 फीसदी का उछाल आया है और 20, 000 के जादुई आंकड़े के करीब है।  
 
 
9.ओपेक – क्रूड प्रोडक्‍शन कट – 30 नवंबर की बैठक में ओपेक देशों ने यह फैसला कि‍या कि‍ वह जनवरी 2017 से क्रूड के प्रोडक्‍शन में 3 फीसदी की कटौती करेंगे। ओपेक ने ऐसा फैसला 2008 के बाद पहली बार लि‍या था। इस घोषणा के बाद कच्‍चे तेल की कीमतों में सीधे 10 फीसदी का उछाल आ गया और यह अब भी 50 डॉलर प्रति‍बैरल पर है।
 
कच्‍चे तेल की कीमतें बढ़ने का भारत पर हमेशा नेगेटि‍व असर पड़ता है। क्रूड के दाम में प्रति‍ 10 डॉलर प्रति‍ बैरल की कीमत का भारत के सीएडी पर 9.20 अरब डॉलर का असर पड़ता है। इससे जीडीपी पर 0.43 फीसदी का असर पड़ता है और इनफ्लेशन 0.50 फीसदी बढ़ जाता है।
 
भारतीय बाजारों ने भी इसका नेगेटि‍व इफेक्‍ट दि‍खाया और नि‍फ्टी तब से 240 प्‍वाइंट डाउन है। क्रूड की कीमतें फरवरी में 26 डॉलर प्रति‍बैरल तक पहुंच गई थीं मगर उत्‍पादन में कटौती की खबर के बाद कीमत में करीब 100 फीसदी का इजाफा हो गया।
 
 
10.फेड रेट हाइक – 14 दि‍संबर को अमेरि‍का के सेंट्रल बैंक ने 25 बीपीएस से इंटरेस्‍ट रेट बढ़ाने के साथ 2017 में तीन बढ़ोतरी करने का संकेत दि‍या। हर उछाल 25 बीपीएस तक का हो सकता है। अमेरि‍का में इंटरेस्‍ट रेट बढ़ने का भारतीय बाजार पर हमेशा बुरा असर पड़ता है और इसके चलते तब से नि‍फ्टी 200 प्‍वाइंट गि‍रा है।
 
इमर्जि‍ग मार्केट के लि‍ए यह फैसला अच्‍छा नहीं है क्‍योंकि‍ ऐसे में एफआईआई इन बाजारों से अपना पैसा नि‍काल लेते हैं मगर अमेरि‍की बाजार ने इस फैसले के बाद मजबूती दि‍खाई। अमेरि‍का इस समय ट्रप के राज में फि‍सकल पॉलि‍सी में राहत और 2017 की मॉनेट्री पॉलि‍सी में सख्‍ती पर नजर गड़ाए हुए है।
 
टफ 2017
 
भारतीय बाजार जनवरी 2017 की शुरुआत कई चुनौति‍यों के साथ करने जा रहा है जैसे ब्‍लैकमनी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक्‍शन, क्रूड के दाम में बढ़ोतरी, फेड रेट में बढ़ोतरी, रुपये की कीमत में गि‍रावट, चीन की सख्‍त मौद्रिक नीति‍, यूपी चुनाव, देश में करंसी की कमी, जीएएआर, जीएसटी वगैरा। अगले चार माह भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था और बाजारों के बेहद फैसलापरक साबि‍त होने जा रहे हैं।
 
 
(विवेक मित्तल वीएम फाइनेंशियल के रिसर्च हेड हैं।)

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