Home »Economy »Policy» Health Card For All, 80% Will Get Free Medicines And Treatment

नई हेल्थ पॉलिसी: जीडीपी का 2.5% होगा खर्च, सबका बनेगा हेल्थ कार्ड और गरीबों के फ्री ईलाज का दावा

नई दिल्ली। हेल्थ केयर सेक्टर में बदलाव के लिए नेशनल हेल्थ पॉलिसी को मंजूरी दे दी गई है। नई पॉलिसी के तहत सरकार हेल्थ केयर पर जीडीपी का 2.5 फीसदी खर्च करेगी। देश में हर नागरिक को सरकारी योजनाओं को लाभ मिल सके, इसके लिए सभी का हेल्थ कार्ड बनाया जाएगा। वहीं, प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स और जिला अस्पतालों का अपग्रेडेशन किया जाएगा। सरकार का टारगेट है कि देश के 80 फीसदी लोगों को सरकारी अस्पतालों में क्वालिटी इलाज मिल सके।
 
66 फीसदी खर्च प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स पर
स्वास्थ मंत्री जेपी नड्डा ने भी इस बात की जानकारी लोकसभा में दी है। स्वास्थय मंत्री का कहना है कि नेशनल हेल्थ पॉलिसी से सभी को निश्चित तौर पर बेसिक हेल्थ केयर की सुविधा मिल सकेगी। उनका कहना है कि हेल्थ केयर पर खर्च का 66 फीसदी प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स पर किया जाएगा। सरकारी अस्पतालों का इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर होगा। इनके अपग्रेडेशन में पीपीपी मॉडल को भी शामिल किया जा सकता है। सरकार का टारगेट है कि कम आय वर्ग के लोगों को सरकारी हेल्थ सेंटर्स पर दवा और जांच की सुविधा से लेकर इलाज भी मुफ्त मिल सके।
 
पीएचसी में हर तरह की सुविधा
अभी तक पीएचसी के तहत कुछ खास तरह की जांच की सुविधाएं ही हैं। नई पॉलिसी के तहत अब इन सेंटर्स पर भी डायग्नोस्टिक जांच से लेकर हर तरह की जांच की सुविधा होगी। नॉन कम्युनिकेबल डिजीज के इलाज की भी सुविधा होगी। वहीं, पॉलिसी में इंश्योरेंस की भी व्यवस्था की गई है। सभी मरीजों को इसका लाभ दिया जाएगा।
 
सबका बनेगा हेल्थ कार्ड
जेपी नड्डा का कहना है कि देश में हर नागरिक के हेल्थ का ब्यौरा सुरक्षित रखने के लिए इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड रखने की शुरूआत की जाएगी। इसके तहत सभी का हेल्थ कार्ड बनाया जाएगा। हेल्थ कार्ड में सभी का डाटा रहेगा। इसका फायदा यह होगा कि किसी हेल्थ सेंटर पर कार्ड दिखाते ही इलाज शुरू हो सकेगा। यह डाटा एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक आसानी से ट्रांसफर हो जाएगा।
 
10 हजार लोगों पर 2 बेड की सुविधा
नेशनल हेल्थ पॉलिसी के तहत अस्पतालों में बेड की संख्‍या बढ़ाई जाएगी। इसे हर 10 हजार मरीज के रेश्‍यो में 2 किया जाएगा। अभी यह संख्‍या 1 है। वहीं, जीडीपी का 2.5 फीसदी हेल्थ केयर पर खर्च किया जाएगा।
 
इलाज करने से मना नहीं कर पाएंगे अस्पताल
नेशनल हेल्थ पॉलिसी के तहत अब मरीजों को कोई भी अस्पताल इलाज करने से मना नहीं कर पाएंगे। एक्सपर्ट्स से इलाज के लिए लोगों को सरकारी या निजी अस्पताल में जाने की छूट होगी। स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत निजी अस्पतालों को ऐसे इलाज के लिए तय रकम दी जाएगी। बता दें कि देश में इलाज की बात करें तो करीब 70 फीसदी हिस्सा प्राइवेट सेक्टर का है। लेकिन, प्राइवेट सेक्टर में खर्च बहुत ज्यादा है।
 
प्राइवेट हेल्थ सेक्टर का भी होगा विस्तार
नेशनल हेल्थ पॉलिसी के तहत प्राइवेट हेल्थ सेक्टर के विस्तार का भी रोडमैप है। हेल्थ सेक्टर में 100 फीसदी एफडीआई और डायरेक्ट टैक्स को कम कर सरकार का फोकस प्राइवेट हेल्थ सेक्टर पर भी है। सरकार का हेल्थ सेक्टर में पब्लिक स्पेंडिंग पर भी फोकस है।
  
राज्यों के पास होगा विकल्प 
फिलहाल खर्च का रोडमैप अभी सरकार को तैयार करना है। माना जा रहा है कि इस पॉलिसी को लागू करने से सरकार पर 2.5 लाख करोड़ का अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा। राज्यों के लिए इस पॉलिसी को मानना जरूरी नहीं होगा, हालांकि इस मॉडल को वे अपने यहां अपना सकते हैं।

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