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स्टील 30 फीसदी हुआ महंगा, कंपनियों ने लगातार चौथे महीने बढ़ाए दाम

नई दिल्ली।नोटबंदी के बावजूद स्टील प्रोडक्ट की कीमतें दो साल के पीक पर पहुंच चुकी हैंं। स्टील कंपनियों ने जनवरी में लगातार चौथी बार दाम बढ़ा दिए हैं। कंपनियों का कहना है कि बढ़ती इनपुट कॉस्ट, रेलवे के मालभाड़े और रॉ मैटेरियल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण दाम बढ़ाए गए हैं।
 
स्टील कंपनियों ने एचआर क्वॉयल और सीआर क्वॉयल के दाम नए साल में 2,500 रुपए प्रति टन तक बढ़ा दिए हैं। कंपनियां पिछले छह महीने में स्टील के दाम 30 फीसदी चुकी हैं। इस कदम से ऑटो, इंजीनियरिंग, यूटेन्सिल्स, मेडिकल इक्विपमेंट सेक्टर्स पर सीधा असर पड़ेगा। स्टील प्रोड्क्ट बनाने वाले कारोबारियों के मुताबिक नोटबंदी के बाद डिमांड कम होने के कारण वह बढ़ी हुई कीमतें कस्टमर को भी पास नहीं कर सकते।
 
स्टील की कीमत दो साल के पीक पर
 
मेटल एंड स्टेनलेस स्टील मर्चेंट एसोसिएशन (एमएसएमए) के प्रेसिडेंट जितेंद्र शाह ने moneybhaskar.com  को बताया कि स्टील की कीमतें दो साल के हाई लेवल पर हैं। सरकार के एंटी डंपिंग ड्यूटी और एमआईपी लगाने से इंपोर्टेड स्टील की कीमत बढ़ गई हैं, जिसका फायदा लोकल स्टील इंडस्ट्री को मिला है। पिछले छह महीने में एचआर क्वॉयल और सी आर क्वॉयल की कीमतों में 30 फीसदी तक का इजाफा हो चुका है। 
 
कंपनियों ने बढाए स्टील प्राइस
 
स्टील कंपनियों ने बीते छह महीने में स्टील के दाम 30 फीसदी तक बढ़ा दिए हैं। छह महीने में स्टील क्वायल की कीमत 127 रुपए से 163 रुपए प्रति किलो पहुंच गई है। जबकि 304 ग्रेड के स्टील की कीमत 163 रुपए से 215 रुपए पहुंच गई है। स्टील की बढ़ी कीमतों को लेकर जब moneybhaskar.com ने कंपनयों से बात की उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला।
 
सितंबर-अक्टूबर में भी बढ़ाई थी कीमतें
 
जिंदल, सेल जैसी स्टील कंपनियों ने पिछले साल सितंबर, अक्टूबर और नवंबर में कीमतें हर बार 5 से 7 फीसदी बढ़ाई थींं। रॉ मैटेरियल की कॉस्ट बढ़ने और स्टील की डिमांड बढ़ने के कारण कीमतें 2,000 से 2,500 रुपए प्रति टन सितंबर में बढ़ाई थी। सितंबर से नवंबर तक जिंदल, एस्सार स्टील, टाटा स्टील और सेल ने अपनी कीमतें रिवाइज की थींं।
 
क्यूं बढ़ रही हैं स्टील की कीमतें
 
बीते आठ महीनों में कोकिंग कोल, जिंक की कीमत बढ़ने के कारण स्टील प्रोडक्शन की कॉस्ट 4-5,000 रुपए बढ़ चुकी है। अभी कोकिंग कोल की कीमत 127 डॉलर प्रति टन है जबकि जनवरी में ये 75 डॉलर प्रति टन थी। रेलवे के माल भाड़ाा बढ़ाने का असर भी लागत पर पड़ा है। ये बढ़ी हुई लागत कंपनियां कस्टमर को पास कर रही हैं।
 
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