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रोड प्रोजेक्‍ट्स को लोन देने में बैंकर्स ने खड़े किए हाथ, सेक्‍टर का रिवाइवल हुआ मुश्किल

रोड प्रोजेक्‍ट्स को लोन देने में बैंकर्स ने खड़े किए हाथ, सेक्‍टर का रिवाइवल हुआ मुश्किल
 
 
नई दिल्‍ली। हाईवे प्रोजेक्‍ट्स के रिवाइवल की संभावनाएं मुश्किल होती जा रही हैं। बैंकर्स ने हाईवे प्रोजेक्‍ट्स को लोन देने से लगभग इनकार कर दिया है। सोमवार को रोड एंड ट्रांसपोर्ट मिनिस्‍टर नितिन गडकरी के साथ हई मीटिंग में बैंकर्स ने कहा कि पिछले साल से शुरू हुए हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल के तहत बन रहे प्रोजेक्‍ट्स को लोन देने में कई दिक्‍कतें हैं, जिनमें बदलाव होने के बाद ही फंडिंग की जा सकती है।
 
टारगेट से पिछड़ी सरकार
 
पिछले साल गडकरी ने घोषणा की थी कि साल 2016-17 में रोजाना 41 किलोमीटर के हिसाब से हार्इवे बनाए जाएंगे, लेकिन दिसंबर तक सरकार केवल 17 किलोमीटर रोजाना के हिसाब से हाईवे बना रही है। अब गडकरी की कोशिश है कि मार्च खत्‍म होते होते हाईवे के टारगेट हासिल करने की कोशिश की जाए। इसलिए उन्‍होंने सोमवार को बैंकर्स से बातचीत की।
 
हाइब्रिड मॉडल में है दिक्‍कतें
 
मुंबई में हुई बैठक में शामिल एक अधिकारी ने बताया कि सरकार का फोकस है कि हाइब्रिड एन्यूइटी मॉडल के तहत घोषित प्रोजेक्‍ट्स को बैंक फाइनेंस करें, लेकिन बैंकर्स ने कहा कि ये प्रोजेक्‍ट्स वायबिल नहीं हैं, इसलिए बैंकर्स फाइनेंस नहीं कर पाएंगे। गडकरी ने उन्‍हें आश्‍वासन दिया कि वे हाइब्रिड एन्यूइटी  मॉडल के साथ साथ दूसरे मॉडल की समीक्षा कराएंगे और बैंकर्स को जो दिक्‍कतें आ रही हैं, उसे जल्‍द से जल्‍द दूर किया जाएगा।
 
अब तक 33 प्रोजेक्‍ट्स हो चुके हैं लॉन्‍च
 
गौरतलब है कि देश भर में नेशनल हाइवे का जाल बिछाने के लिए मोदी सरकार एक नई पॉलिसी (हाइब्रिड एन्‍यूइटी मॉडल) की शुरुआत की थी। एक साल के दौरान 33 एक्‍सप्रेस और हाइवे के प्रोजेक्‍ट्स का टेंडर इस मॉडल के तहत दिया गया है, लेकिन ज्‍यादातर प्रोजेक्‍ट्स का फाइनेंशियल क्‍लोजर नहीं हो पाया है, क्‍योंकि बैंक फाइनेंस करने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं।
 
क्‍या है हाइब्रिड एन्‍यूइटी मॉडल
 
अब तक देश में पीपीपी मोड पर हाइवे प्रोजेक्‍ट्स बनते रहे हैं। इसके तहत सरकार टेंडर जारी कर देते हैं, जिसके बाद रोड डेवलपर ( कंस्‍ट्रक्‍शन कंपनी) को टोल वसूल कर अपने पैसा वापस लेना पड़ता है। लेकिन पिछले कुछ सालों से डेवलपर्स के लिए यह घाटे का सौदा बनता जा रहा है। टोल से पैसा नहीं आता, इसलिए डेवलपर्स ने प्रोजेक्‍ट्स लेने छोड़ दिए। पिछले साल सरकार ने हाइब्रिड एन्‍यूइटी मॉडल की शुरुआत की। इसके तहत डेवलपर्स को कुल प्रोजेक्‍ट कॉस्‍ट का 40 फीसदी पैसा सरकार देती है, डेवलपर को केवल 60 फीसदी का इंतजाम करना होता है। इसके अलावा टोल वसूलने का काम भी सरकार करती है और हर साल एक तय रकम डेवलपर को रोड बनाने के लिए दिया जाता है। 

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