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कोयले और गैस से सस्‍ती हुई सोलर पावर, पर वायबिलिटी पर उठ रहे हैं सवाल

 
नई दिल्‍ली। सोलर पावर का टैरिफ रिकॉर्ड लो स्‍तर पर पहुंच चुका है। रीवा (मध्‍यप्रदेश) में एक सोलर प्रोजेक्‍ट्स के लिए 2 रुपए 97 पैसे प्रति यूनिट से कम बोली लगाई गई। इससे पावर सेक्‍टर के लोग हैरान हैं, क्‍योंकि पिछले साल जब 4 रुपए 34 पैसे प्रति यूनिट टैरिफ पर बोली लगाई गई थी तो माना जा रहा था कि सोलर पावर का टैरिफ इससे कम नहीं जाएगा, लेकिन 54 पैसे और कम होने से एक बार फिर से यह सवाल उठने लगा है कि क्‍या इस प्राइस पर सोलर पावर उपलब्‍ध कराना संभव है। हालात यह बन गए हैं कि कोयले और गैस से पैदा होने वाली बिजली की कीमत सोलर से अधिक हो गई है, ऐसे में सरकार के सामने दूसरा संकट खड़ा हो गया है।
 
कहां हुई सबसे सस्‍ती सोलर पावर
 
मध्‍यप्रदेश के रीवा में एक मेगा सोलर पावर प्रोजेक्‍ट बन रहा है। यहां 250-250 मेगावाट के तीन प्‍लांट लगने हैं। इसके लिए तीन कंपनियों ने बोली लगाई। महिंद्रा ने पहले प्‍लांट के लिए 2 रुपए 97 पैसे प्रति यूनिट, प्‍लांट दो के लिए एक्‍मे ने 2 रुपए 90 पैसे, जबकि प्‍लांट तीन के लिए सोलनबर्ग ने 2 रुपए 97 पैसे प्रति यूनिट रेट कोट किया। महेंद्रा और एक्‍मे तो इंडियन कंपनी हैं, जबकि सोलनबर्ग ब्राजील की कंपनी है। यह रेट पहले साल के लिए लगाया गया है, इसके बाद हर साल 5 पैसे प्रति यूनिट की दर से टैरिफ बढ़ जाएगा और 15 साल बाद यहां का टैरिफ 3 रुपए 29 पैसे प्रति यूनिट हो जाएगा।
कोयला और गैस के लिए बनी चुनौती
पिछले कुछ सालों में जिस तेजी से सोलर पावर का टैरिफ गिर रहा है, उससे यह आभास हो रहा था कि सोलर का टैरिफ थर्मल या गैस पावर से कम हो जाएगा। यह स्थिति आ गई है। सोलर पावर पर काम कर रही कंसलटेंसी एजेंसी ब्रिज टू इंडिया के ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो साल के दौरान नए थर्मल प्‍लांट्स के लिए जो बिड आई हैं, उनका टैरिफ 3.93 रुपए से लेकर 4.98 रुपए तक रहा, जबकि गैस बेस्‍ड पावर प्‍लांट्स का टैरिफ 6 रुपए प्रति यूनिट के आसपास रहा, जबकि भारत में पर्याप्‍त गैस उपलब्‍ध भी नहीं है। इसी तरह विंड पावर का टैरिफ भी 4 से 6 रुपए प्रति यूनिट रहा। एक्‍सपर्ट्स मानते हैं कि सोलर पावर का टैरिफ इसी तरह से कम होता रहा तो राज्‍य सरकारें और डिस्‍कॉम्‍स थर्मल पावर खरीदना बंद कर देंगी, ऐस में कोयले की मात्रा सरप्‍लस हो सकती है, जो सरकार के समक्ष नई चुनौती बन सकता है।
 
लेकिन खरीदेगा कौन?
 
एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि सोलर पावर सस्‍ती होने का बड़ा कारण चीन है। चीन के पास सोलर पैनल का स्‍टॉक काफी बढ़ गया है, जिस कारण चीन की पैनल मैन्‍युफैक्‍चरर्स कीमतें घटा रहे हैं। फीडबैक इंफ्रा के कॉरपोरेट अफेयर्स एंड कॉम्‍युनिकेशंस के हेड हर्ष श्रीवास्‍तव ने ‘मनीभास्‍कर’ से कहा कि पिछले एक साल के दौरान सोलर पैनल की कीमतों में 26 फीसदी की कमी आई है, जो सोलर पावर के टैरिफ गिरने का बड़ा कारण हो सकता है। श्रीवास्‍तव के मुताबिक, यह लम्‍बे समय के लिए अच्‍छा है, लेकिन वर्तमान में देश में पावर सरप्‍लस होने के कारण एक्‍सचेंज में कीमतें कम हैं और डिस्‍कॉम्‍स की स्थिति यह है कि वे पावर खरीद नहीं रही हैं, इसलिए सरकार को इस ओर भी फोकस करना होगा।
 
यह भी है सवाल
 
काउंसिल ऑन एनर्जी, इन्‍वायरमेंट एंड वाटर (सीईईडब्‍ल्‍यू) के मिहिर शाह ने बताया कि सोलर प्रोजेक्‍ट्स के महंगे होने का बड़ा कारण लैंड की कीमत है। संभव है कि रीवा में लैंड मुफ्त या काफी कम कीमत पर दी जा रही हो, जिसके कारण डेवलपर्स ने काफी कम कीमत पर बिड की है। सोलर पार्क या प्रोजेक्‍ट्स में लैंड की कीमत काफी अहम है, जिस कारण प्रोजेक्‍ट कॉस्‍ट बढ़ जाती है। सोलर पावर डेवलपर्स की एक और दिक्‍कत यह है कि उन्‍हें इस बात की गारंटी नहीं मिलती कि डिस्‍कॉम्‍स उनसे बिजली खरीदेंगी या नहीं। साथ ही, बिजली खरीदने के बाद भी उन्‍हें समय पर पैसा देंगी या नहीं। यदि राज्‍य या केंद्र सरकार इस बात की गारंटी दे दें कि उन प्‍लांट्स की बिजली खरीदी जाएगी और डेवलपर्स को पूरा पैसा दिया जाएगा तो डेवलपर्स टेंडर भरते समय कम रेट कोट कर सकते हैं। 
 
 

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