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कैशलेस नहीं हो पाए टोल प्‍लाजा, जाम से हो रहा रोजाना 350 करोड़ का नुकसान

 
 
नई दिल्‍ली। नोटबंदी के बाद यह अनुमान लगाया जा रहा था कि टोल प्‍लाजा पर कैशलेस ट्रांजैक्‍शन बढ़ जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। देश के कई टोल प्‍लाजा अब तक कैशेलस नहीं हो पाए हैं और जहां कैशलेस सुविधा है भी तो वहां लोग खासकर ट्रक ऑपरेटर कैशलेस ट्रांजैक्‍शन नहीं कर रहे हैं। जिसके चलते टोल प्‍लाजा पर पहले की तरह ही जाम लग रहा है और इस जाम के कारण रोजाना लगभग 350 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है।
 
नहीं बढ़ा फास्‍टैग का इस्‍तेमाल
 
टोल प्‍लाजा में कैशलेस ट्रांजैक्‍शन बढ़ाने के लिए पिछले साल नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने पिछले साल अप्रैल में फास्‍टैग लॉन्‍च किया था। यानी कि गाड़ी पर एक ऐसा टैग लगाया जाएगा, जिसे रिचार्ज करने के बाद टोल प्‍लाजा पर गाडि़यां नहीं रुकेंगी। ये फास्‍टैग बैंकों के साथ मिलकर लॉन्‍च किए गए थे। नोटबंदी के बाद यह उम्‍मीद की जा रही थी कि टोल प्‍लाजा पर फास्‍टैग का इस्‍तेमाल बढ़ जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है।
 
चालू हालत में नहीं हैं फास्‍टैग लेन
 
मिनिस्‍ट्री ऑफ रोड एंड ट्रांसपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक नेशनल हाइवे पर बने देश भर के 394 टोल प्‍लाजा में से 346 पर फास्‍टैग की व्‍यवस्‍था कर दी गई है, लेकिन जानकारों के मुताबिक, इनमें से अधिकतर टोल प्‍लाजा पर फास्‍टैग लेन अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। जबकि हाल ही में, ट्रांसपोर्ट मिनिस्‍ट्री का कहना है कि नेशनल के साथ स्‍टेट हाइवे के टोल प्‍लाजा पर भी फास्‍टैग का इंतजाम किया जाएगा और जल्‍द ही लगभग 980 टोल प्‍लाजा पर फास्‍टैग के माध्‍यम से टोल का भुगतान किया जाएगा।
 
जाम से हो रहा है नुकसान  
 
कुछ समय पहले आईआईएम- कोलकाता ने देश भर के टोल प्लाजा पर बर्बाद होने वाले समय को लेकर एक अध्ययन किया था। इसके अनुसार राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्थित टोल प्लाजा पर वाहनों का काफी समय व ईंधन बर्बाद होता है। इसकारण सालाना लगभग 1.25 लाख करोड़ रुपए ( 350 करोड़ रुपए रोजाना) का नुकसान होता है। अध्‍ययन के मुताबिक, टोल प्‍लाजा पर ट्रकों को औसतन 70 मिनट इंतजार करना पड़ता है और ट्रक औसतन 300 किलोमीटर की दूरी तय कर पाते हैं, जबकि दूसरे देशों में ट्रक औसतन 700 से 800 किलोमीटर की दूरी तय करते हैं। इसके चलते देश की इकोनॉमी और इंडस्‍ट्री प्रभावित हो रही है। 
 
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