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कैग ने एयर इंडिया के फैसलों पर उठाया सवाल, पुराने प्लेेन बदलने में देरी को बताया खर्च बढ़ने की वजह

कैग ने एयर इंडिया के फैसलों पर उठाया सवाल, पुराने प्लेेन बदलने में देरी को बताया खर्च बढ़ने की वजह
नई दिल्‍ली। कम्‍पट्रोलर ऑडिटर जनरल (कैग) ने एयर इंडिया के फैसलों पर सवाल उठाया है। कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि एयर इंडिया को वित्‍तीय पुनर्गठन योजना का पूरा फायदा नहीं मिल पा रहा है। इसके लिए एयरलाइन की तरफ से बड़ी संख्‍या में लिए गए शॉर्ट टर्म लोन्‍स जिम्‍मेदार हैं। कैग ने एयर इंडिया की तरफ से पुराने प्‍लेन्‍स की जगह नए प्‍लेन लीज लेने में की देरी को भी एयरलाइन का खर्चा बढ़ने की वजह बताया है।
 
वित्‍तीय स्थिति सुधारने में जुटी है एयर इंडिया
 
शुक्रवार को कैग ने पार्लियामेंट में अपनी रिपोर्ट पेश की। सीएजी की रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जब एयर इंडिया अपनी वित्‍तीय स्थिति को सुधारने की जुगत में जुटी हुई है। ऑडीटर बॉडी ने कहा कि वैरिएबल कॉस्‍ट के मामले में एयरलाइन फायदे में रही है। सभी सर्विसेज ने फ्यूल का खर्चा भी पूरा वसूल किया है। इसके लिए टरबाइन फ्यूल के प्राइस में कमी आना जिम्‍मेदार रही। हालांकि कंपनी को अभी भी अपने पूरे ऑपरेशन का खर्च वसूलना बाकी है।
 
 
320एयरक्राफ्ट बदलने में देरी ने बढ़ाया खर्चा  
 
कैग ने अपनी रिपोर्ट में विंटेज ए320 एयरक्राफ्ट की जगह नए प्‍लेन्‍स को लीज पर लेने में हुई देरी के लिए एयर इंडिया की खिंचाई की है। सीएजी के मुताबिक इस देरी की वजह से ए320 के मेंटेंनेस में काफी ज्‍यादा खर्च हुआ। यह खर्च इतना था कि इसमें नए प्‍लेन खरीदे जा सकते थे। कंपनी ने इस ग्‍लोबल टेंडर को मंजूर करने में तीन साल से ज्‍यादा का वक्‍त लगा दिया। इसके बाद इन प्‍लेन्‍स को काम पर लगाने में 5 साल और लगा दिए।
 
ग्‍लोबल कंसल्‍टंट फर्म ने दिया था प्‍लेन बदलने का सुझाव
 
ग्‍लोबल नेटवर्क कंसल्टंट एसएचएंडई ने मई, 2010 में बताया था कि 1989-94 विंटेज एयरबस ए-320 प्‍लेन्‍स का इस्‍तेमाल करना अब ज्‍यादा खर्चीला साबित हो रहा है। इसलिए इन प्‍लेन्‍स को जल्‍द ही बाहर कर दिया जाना चाहिए। इनके मेंटेनेंस पर हर साल 40 लाख डॉलर तक खर्च हो रहे थे। कंसल्‍टंट फर्म ने 10 ए-320 और बी-737 को लीज पर लेने का सुझाव दिया था।
 
एफआरपी को2012में किया गया था मंजूर  
 
वित्‍तीय पुनर्गठन योजना (एफआरपी) को अप्रैल, 2012 में मंजूरी दी गई थी। इस दौरान सरकार ने 2011-12 से 2031-32 के बीच 42,182 करोड़ की इक्विटी देने का वादा किया था। सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बहुत ज्‍यादा लघु अवधि के लोन और इक्विटी रिलीज में कमी आने की वजह से एयर इंडिया इसका पूरा फायदा नहीं उठा पा रही है।
 
खर्च पर कंट्रोल करने की दी हिदायत
 
इसमें ऑडिटर बॉडी ने एयर इंडिया को अपने खर्चे को कंट्रोल करने की हिदायत दी है। सीएजी ने अन्‍य कई सुझाव दिए हैं। ऑडिटर बॉडी ने कहा है कि सरकार को इक्विटी फंडिंग देने से पहले लोन अमाउंट में आई कमी को भी इसमें शामिल करना चाहिए। इसके अलावा नॉन-कनवर्टिबल डिबेंचर्स पर भी कम इंटरेस्‍ट वसूलने का सुझाव दिया है।

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