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जानिए, क्‍या है गोल्‍ड मोनेटाइजेशन स्‍कीम, कैसे करेगा काम

नई दिल्‍ली।भारत दुनिया का सबसे बड़ा सोने की खपत करने वाला देश है। ऐसे में अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए हर साल 900-1000 टन सोने का आयात करता है। जिसका नकारात्‍मक प्रभाव देश की इकोनॉमी पर पड़ रहा है। जबकि देश भर में घरों, मंदिरों और ट्रस्‍टों में तकरीबन 20,000-24,000 हजार टन सोना बेकार पड़ा हुआ है। सरकार लोगों के पास बेकार पड़े हुए इस सोने के भंडार को निकाल करके इकोनॉमी में लगाना चाहती है। इसके लिए सरकार गोल्‍ड मोनेटाइजेशन स्‍कीम लाने की तैयारी में है और इसका ड्राफ्ट नोट तैयार कर लिया गया है। इस स्‍कीम को जल्‍द ही कैबिनेट से मंजूरी मिलने की संभावना है।
 
गोल्‍ड मोनेटाइजेशन स्‍कीम के तहत ग्राहक को अपना सोना, ज्‍वैलरी और सिक्‍कों को सरकार के द्वारा निर्धारित किए गए सेंटरों पर जमा करना होगा। जहां पर उसकी जांच करने के बाद गलाकर ग्राहक को सोने की मात्रा के बराबर सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा। जिसके आधार पर ग्राहक बैंक में गोल्‍ड सेविंग अकाउंट खोलकर ब्‍याज प्राप्‍त कर सकेगा। सरकार इस स्‍कीम के जरिए सोने के आयात में कमी लाएगी जिससे इसका आयात 10-20 फीसदी तक घट सकता है। वहीं, सरकार को उम्‍मीद है कि इस स्‍कीम से सोने का आयात बिल कम होगा। जिसका इस्‍तेमाल इकोनॉमी को बेहतर बनाने और विकास के कामों में किया जा सकेगा। गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम से देश में मौजूद सोने के भंडार का सर्कुलेशन बढ़ेगा। इसके अलावा सीआरआर, एसएलआर में गोल्ड शामिल होने से बाजार में नकदी का प्रवाह भी बढ़ेगा।
 
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