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INDIRECT TAX रिफॉर्म से पूरा होगा ‘मेक इन इंडिया’ का सपना

INDIRECT TAX रिफॉर्म से पूरा होगा ‘मेक इन इंडिया’ का सपना
भारत में कारोबारी के लिए सफलतापूर्वक बिजनेस कर पाना किसी सपने से कम नहीं है। क्‍योंकि वास्‍तविक दुनिया में कारोबार को शुरू करना और उसे लगातार चलाना मुश्किल ही नहीं एक दर्दभरा अनुभव भी है। भारत में बिजनेस की शुरूआत से ही कारोबारी को इस बात का अंदाज लग जाता है कि इस डगर पर मुश्किलें कितनी बड़ी और नुकसान की खाई कितनी गहरी है।
 
यही कारण है कि भारत लगातार कारोबार शुरू करने के लिए दुनिया के मुफीद देशों की सूची में अंतिम पायदान के आसपास है। विश्‍व बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के मामले में भारत 189 देशों की सूची में 142वें पायदान पर है।  
 
कारोबार शुरू करने में भारत की इसी खस्‍ता रैंकिंग को देखते हुए केंद्र सरकार ने अपनी प्राथमिकता की सूची में इंवेस्‍टमेंट सेंटिमेंट सुधारने को शामिल किया है। प्रधानमंत्री मोदी फिलहाल दो पक्षों पर सर्वाधिक जोर दे रहे हैं। पहला दुनिया की विकसित अर्थव्‍यवस्‍थाओं से संभावित विदेशी निवेश को देश में आकर्षित करने का प्रयास करना। और दूसरा देश में कारोबार को आसान बनाने के लिए पॉलिसी स्‍तर पर सुधार करना।
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया अभियान शुरू किया है। लेकिन अभी सरकार को कई टैक्‍स पॉलिसी के साथ दूसरे अन्‍य रिफॉर्म अपनाने की जरूरत है। देश में नए कंपनी एक्‍ट को लागू हुए अभी एक साल भी नहीं बीता है। अभी भी इस कानून के 470 सेक्‍शन को अभी भी केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी मिलनी बाकी है। वहीं पिछले सप्‍ताह ही कैबिनेट ने भारत में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की सोच को आगे बढ़ाते हुए कंपनी कानून से जुड़े संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है। इसी प्रकार सभी प्रमुख सेक्‍टर्स में तुरंत बदलाव किए जाने जरूरी हैं।
 
इसी प्रकार के बदलाव इनडायरेक्‍ट टैक्‍स के मोर्चे पर भी किया जाना जरूरी है। पूर्व आईआरएस अधिकारियों के संगठन कर क्षेत्र फाउंडेशन ने देश में इन डायरेक्‍ट टैक्‍स के क्षेत्र में 100 से अधिक बदलावों की सिफारिश की है।
 
पूर्व सीबीईसी चेयरमैन तरुण रॉय, पूर्व सदस्‍य सीजी लाल, पूर्व डीजी, डीआरआई, आएस सिद्धू औश्र पूर्व जेएस वीके गर्ग और अन्‍य सदस्‍यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर देश में तुरंत 100 से अधिक कर कानूनों में बदलाव करने को कहा है।
 
संगठन के अनुसार यदि सरकार इन कानूनों में बदलाव करती है तो यह न सिर्फ मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसे कार्यक्रमों में सहायक होगा। वहीं यह बदलाव जीएसटी के जंजाल से निपटने में भी केंद्र के लिए बेहद सहायक सिद्ध हो सकता है।
 
डिजिटल इंडिया को ध्‍यान में रखते हुए फाउंडेशन ने सिफारिश की है कि मौजूदा फिजिकल डॉक्‍यूमेंटेशन की व्‍यवस्‍था को समाप्‍त करते हुए एक्‍साइज, सर्विस टैक्‍स और कस्‍टमर डॉक्‍यूमेंट में डिजिटल सिग्‍नेचर को अनुमति प्रदान की जाए।
 
सिफारिशों के अनुसार सीबीएसई को तुरंत डिजिटली हस्‍ता‍क्षरित सेनवेट क्रेडिट और इलेक्ट्रॉनिकली रिसीव इनवॉइस को कुछ सुरक्षा उपायों के साथ जरूरी बनाना होगा। इसी के साथ ही डिजिटल डॉक्‍यूमेंट को भी आधिकारिक मान्‍यता प्रदान करनी चाहिए। यदि मौजूदा टैक्‍स ढांचे को देखते हुए संगठन द्वारा सुझाए गए ये सुझाव उपयुक्‍त हैं। वित्‍त मंत्री केा तुरंत इन सुझावों पर अपनी मुहर लगानी होगी।
 
आज जिस प्रकार ऑनलाइल कारोबार का विस्‍तार हो रहा है, ऐसे में आईसीटी फॉर्म मौजूदा कारोबार की रीढ़ बन गया है। ऐसें ई कल्‍चर को आगे बढ़ाने के लिए जो भी उपाय जरूरी हैं, उन्‍हें तुरंत अपनाना होगा। बेहतर होगा कि केंद्र सरकार ई-गजट को आवश्‍यक बनाए, जिससे सरकार के आदेश शीघ्रता के साथ लोगों तक पहुंचाए जा सकें।
 
आज भी केंद्र सरकार के बहुत से मंत्रालय और विभाग नोटिफिकेशन जारी होने से पहले डॉक्‍यूमेंट प्रिंट होने और जीएसआर नंबर प्राप्‍त होने का इंतजार करते हैं। जरूरी है कि इन सभी नोटिफिकेशन की ई गजटिंग शुरू की जाए। और हार्ड कॉपी का कल्‍चर समाप्‍त करते हुए ऑनलाइन अपलोडिंग शुरू की जाए।
 
सिंगल रजिस्‍ट्रेशन
 
फाउंडेशन ने सेंट्रल एक्‍साइज के लिए के लिए सिंगल रजिस्‍ट्रेशन की सिफरिश की है। फैक्‍ट्री के बाहर कैपिटल गुड्स की परमीशन, इनपुट टैक्‍स क्रेडिट के प्रयोग, 15 दिनों के भीतर टैक्‍स रिफंड के भुगतान, 90 से 180 दिनों के भीतर विवादों के निपटान के लिए सिंगल रजिस्‍ट्रेशन की नीति बेहद असरकारक सिद्ध होगी।
 
इंस्‍पेक्‍टर राज के अंत के लिए जरूरी डिजिटलाइजेशन
 
सीबीईएस के नियम कानून में आज भी बरसों पुराने इंस्‍पेक्‍टर राज की छाया दिखाई देती है। टैक्‍स डिपार्टमेंट में सुधार तब और भी जरूरी हो जाते हैं देश के कुल कर राजस्‍व में 85 फीसदी हिस्‍सेदारी बड़े टैक्‍स पेयर्स की है। टैक्‍स सुधारों के साथ हम न सिर्फ इन बड़े टैक्‍स पेयर्स को देश के वि‍कास में भागीदार बना सकते हैं। वहीं लोगों को भी ईमानदारी और बिना किसी हेरफेर के टैक्‍स अदा करने वाले प्रोत्‍साहित कर सकेंगे।
 
बड़े टैक्‍स पेयर्स पर दिया जाए ध्‍यान
 
देश में करीब 900 बड़े टैक्‍स अदाकर्ता कंपनियां एवं लोग हैं, जो कि देश की कुल टैक्‍स रिवेन्‍यू में 85 फीसदी हिस्‍सेदारी रखते हैं। इसे देखते हुए फाउंडेशन ने सिफारिश की है कि सीबीईएस को प्रत्‍येक 150 बड़े करदाताओं से संबंधित एक इंचार्ज की व्‍यवस्‍था करे। इससे इन करदाताओं के साथ टैक्‍स विभाग को तालमेल बैठाने में मदद मिलेगी। साथ ही कंपनियों की विस्‍तार योजनाओं की जानकारी के साथ टैक्‍स रिवेन्‍यू बढ़ाने में भी मदद मिल सकेगी। फिलहाल टैक्‍स प्रशासन में इस प्रकार की कोई व्‍यवस्‍था नहीं है। यही कारण है कि टैक्‍स रिवेन्‍यू घटे या बढ़े। अधिकारियों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
 
रजिस्‍ट्रेशन में हो तेजी
 
फाउंडेशन ने यह भी सिफारिश की है कि सेंट्रल एक्‍साइज और सर्विस टैक्‍स रजिस्‍ट्रेशन कंपनियों को तुरंत प्रदान किया जाएग। अभी वैरिफिकेशन के इंतजार में यह प्रक्रिया लंबी हो जाती है। इसके साथ ही किसी फैक्‍ट्री के लिए आवश्‍यक विभिन्‍न रजिस्‍ट्रेशन जैसे सर्विस टैक्‍स के लिए एकल व्‍यवस्‍था हो। साथ ही ईआर4, ईआर5, ईआर6 और ईआर7 और ईआर21 के रजिस्‍ट्रेशन की अवधि 1 महीने से बढ़ाकर 6 महीने करनी चाहिए। 
 
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लेखक देश के प्रमुख टैक्‍स विशेषज्ञ और टैक्‍सइंडियाऑनलाइनके संपादक हैं। 
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