Home »Experts »Taxation» Govt Cross Big Hurdle Of GST But Mail Fight Is Yet To Concord

GST: सरकार ने पार की बड़ी बाधा, असली लड़ाई तो बाकी है

GST: सरकार ने पार की बड़ी बाधा, असली लड़ाई तो बाकी है
पिछले एक दशक के इंतजार के बाद जीएसटी बिल संसद में पेश कर दिया गया। आजादी के बाद टैक्‍स को लेकर होने जा रहे इस सबसे बड़े रिफॉर्म को लेकर भारतीय और विदेशी कंपनियां इस बात का इंतजार कर रही हैं कि अब मोदी सरकार इसको लागू करने पर कितनी गंभीरता दिखाती है। हालांकि जीएसटी को लेकर हुई लंबी चर्चाओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रवैया इस बात को लेकर स्‍पष्‍ट रहा कि रिफॉर्म की गाड़ी किसी भी हालत में पटरी से नहीं उतर पाए। क्‍योंकि इससे वैश्विक स्‍तर पर भारत की छवि खराब होगी। जीएसटी को लेकर प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री ने जिस तत्परता और प्रतिबद्धता के साथ काम किया। वह काफी प्रशंसनीय है।
 
जीएसटी को लेकर पिछले दो सप्ताह में जिस प्रकार केंद्र और जीएसटी के लिए बनी एंपावर्ड कमेटी के बीच बातचीत और संबंधों में जिस प्रकार बदलाव आया। यह जानना भी बहुत जरूरी है। 11 दिसंबर को कमेटी के चेयरमैन अब्दुल रहीम ने जीएसटी में एंट्री टैक्‍स जैसे आक्ट्रॉय, परचेज टैक्‍स और पेट्रोलियम तथा शराब को शामिल करने का विरोध किया था। लेकिन उसी दिन शाम तक केंद्र और राज्‍यों के बीच मीलों की दूरी समझौते के रूप में सिमट नी शुरू हो गई थी।
 
केंद्र सरकार 3 साल तक राज्‍यों को होने वाले घाटे की भरपाई के साथ ही 11 हजार करोड़ रुपये के मुआवजे पर भी राजी हो गई है। लेकिन ताज्जुब है कि इस समझौते के बावजूद केंद्र और राज्‍यों या फिर एंपावर्ड कमेटी के साथ कोई जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं हुई है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि विवादों के धागे अभी और उलझ सकते हैं। यदि केंद्र अपने कदम आगे बढ़ाने से पहले थोड़ी पारदर्शिता बरतती तो जीएसटी लागू होने में थोड़ी आसानी अवश्य हो सकती थी।
 
अब जरूरी है कि केंद्र सरकार अब ऐसी ही तत्परता लोकसभा और राज्‍य सभा में पारित करने पर दिखानी चाहिए। यदि किसी प्रकार मोदी सरकार लोक सभा में बिल को पास करवा भी लेती है तो राज्‍य सभा में जहां विपक्षी पार्टियां बहुमत में हैं, वहां इस बिल को सलेक्ट कमेटी को सौंपा जा सकता है। इसके लिए केंद्र सरकार 2016 का इंतजार कर सकती है। संभव है तब तक राज्‍य सभा में मोदी सरकार अपनी संख्‍या बल और बढ़ा ले। 
 
                                    लेखक टैक्‍स इंडिया ऑनलाइन के संपादक एवं सीईओ हैं। 

Recommendation

    Don't Miss

    NEXT STORY