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व्यापार बढ़ाने के लिए अतिरिक्‍त सक्रियता जरुरी

व्यापार बढ़ाने के लिए अतिरिक्‍त सक्रियता जरुरी
इस दौरान कैड अपने शीर्ष यानि 4.7 फीसदी था। हर कोई निर्यात और उसमें महत्वपूर्ण उपायों के जरिए सुधार लाने की बात कर रहा था। क्योंकि निर्यात अर्थव्यवस्था का एक बेहद अहम बिंदु है, जिसे आसानी से दरकिनार नहीं किया जा सकता। इसके अगले साल 2013-14 में कैड अपने न्यूनतम स्तर यानि 1.7 प्रतिशत पर जा पहुंचा जिससे निर्यात की तरफ से ध्यान विकेंद्रीकत करना एक खतरा सा बन रहा था। इसे ध्यान में रखते हुए नई सरकार को निर्यात क्षेत्र को प्राथमिक्ता के आधार पर लेना होगा और मैन्युफैक्चिरिंंग को रफ्तार देनी होगी। इससे बेहतर अंतरराष्ट्रीय माहौल में निर्यात को बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी। 
 
बाली समझौते के जरिए भी निर्यात क्षेत्र पर ध्यान आकर्षित किया गया है। मैं निराशावादी की तरह चीजों को नहीं देख रहा हूं, लेकिन व्यापार घाटे को कम करने और एफडीआई जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने के बाद भी कैड की स्थिति संतोषजनक नहीं बन पाई है। पोर्टफोलियो फ्लो, कर्मशियल बाेरोइंग और एफडीआई की स्थिति बेहतर हुई है। विदेशी मुद्रा भंडार की हालत भी संतोषजनक है, लेकिन विदेशी कर्ज काफी ज्यादा है। लघु अवधि ऋण 6 महीने में मिच्योर हो जाएगा और उस दौरान यह राशि 96 बिलियन डॉलर पर पहुंच जाएगी। 
 
यूएनसीटीएड के शोध के हिसाब से औसत एक कस्टम ट्राजेंक्शन में 20-30 पार्टियां, 40 दस्तावेज, 200 डेटा शामिल रहते हैं। एपीईसी शोध के हिसाब से व्यापार प्रोत्साहन योजना के जरिए विकासशील देशों में निर्यात की कीमतों में 1 से 2 फीसदी तक बढ़ाया जा सकेगा। हमारे मामले में यह 5 से 10 बिलियन डॉलर की बचत थी। देश के सामने बड़ी चुनौती भारत में व्यापार करने की है। वर्ल्‍ड बैंक डूइंग बिजनेस रिर्पोट 2014 के हिसाब से भारत रैकिंग में 134वें स्थान पर काबिज हुआ है। ट्रेडिंग अक्रॉस सेक्सन में की गई वार्षिक समीक्षा के हिसाब से हम तीन पायदान नीचे खिसककर 132वें स्थान पर आ गए हैं। इससे यह पता चलता है कि बाकी देश व्यापार को बढ़ावा देने के लिए हमारे मुकाबले ज्यादा तेज और कारगर कदम उठा रहे हैं। 
 
हम कई दशकों से सॉफ्टवेयर क्षेत्र में शीर्ष पर है, लेकिन ईडीआई नेटवर्क में हमारे सामने कई चुनौतियां मौजूद हैं। ट्राजेक्शन कीमत भारत में एक बड़ा मसला है और यह हमारी रिर्पोट के हिसाब से निर्यात कीमत का 8 से 10 फीसदी है। आंकड़ों के हिसाब से यह 300 बिलियन का औसत निर्यात है। हमें दीर्धावधि एजेंडा के हिसाब से इंफ्रासचक्चर क्षेत्र की हालत सुधारने के लिए काम किया जा सकता है, जिसमें मैन्युफेक्चरिंग और निर्यात रफ्तार पकड़ सकता है। हम कुछ छोटे कदमों की वजह से भी इस व्यापार की हालत सुधार सकते हैं, जिनमें यह कदम प्रमुख हैं। 
 
1 ट्रेड फेसिलिटेशन एग्रीमेंट का एक अहम पहलू है पब्लिक कमेंट। इसमें ट्रेड फेसलिटेशन नॉर्मस को लागू करने से पहले सभी हितधारकों के साथ वृहद स्तर पर बातचीत करनी चाहिए। 
 
2 एक्लरेटेड क्लाइंट प्रोग्राम (एसीपी), ऑथराइजइड इकनॉमिक ऑपरेटर (एईओ) और निर्यात-आयात कंसाइनमेंट के लिए ऑन साइट पोस्ट क्लेयरेंस स्‍कीम सहायक हो सकती हैं। 
 
3 एक्सपोर्टर/ इंपोर्टर के साथ सिंगल पाइंट इंट्रेक्शन होना चाहिए।        
 
4 ट्रेड फेसलीटेशन एग्रीमेंट के हिसाब से डीजीएफटी को सारी सूचना एक केंद्र के जरिए मुहैया करनी चाहिए। यह समझौता वर्ष 2015 तक लागू हो जाएगा। हमारे पास कानून में मौजूद प्रावधानों पर विचार-विमर्श कर उन पर सहमति जताने का बेहद कम समय है। हमें अपने काम को बहुत जल्दी शुरु करना होगा और इनके क्रियान्वयन ने बेहद सक्रिय भूमिका निभाने पर काम करना चाहिए।          
     
लेखक एफआईईओ में महानिदेशक और सीईओ हैं।  
 
    

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