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एजुकेशन लोन के जरिए उच्च शिक्षा के साथ कर-लाभ

एजुकेशन लोन के जरिए उच्च शिक्षा के साथ कर-लाभ

कोईभी व्यक्तिअपनी पत्नी या अपने बच्चों की सेकंडरी एजूकेशन या उच्च शिक्षा के लिए एजूकेशन लोन ले सकता है
एजूकेशनलोन के ब्याज के भुगतान पर आयकर अधिनियम की धारा 80ई के तहत छूट का लाभ मिलता है
पार्टटाइम कोर्स के लिए भी एजूकेशन लोन पर कर छूट प्राप्त कर सकते हैं बशर्ते यह कोर्स सरकार से मान्यता प्राप्त हो

शिक्षा, खास तौर से उच्च शिक्षा की लागत में साल दर साल लगातार इजाफा हो रहा है। ऐसे में एजूकेशन लोन का सहारा उन अभिभावकों के लिए एक अच्छा विकल्प है जो अपने बच्चे को उच्च शिक्षा दिलाना चाहते हैं। एजूकेशन लोन न केवल पढ़ाई के लिए पैसों की कमी को पूरा करता है बल्कि इसके भुगतान पर आयकर का लाभ भी मिलता है।

टैक्स का फायदा
दिल्ली स्थित सीए फर्म गर्ग नवीन एंड कंपनी के चार्टर्ड एकाउंटेंट नवीन गर्ग कहते हैं कि कोई भी व्यक्ति अपने, अपनी पत्नी या अपने बच्चों की सेकंडरी एजुकेशन या उच्च शिक्षा के लिए एजूकेशन लोन ले सकता है। इसके ब्याज के भुगतान पर आयकर अधिनियम की धारा 80ई के तहत आयकर का लाभ मिलता है।

एजुकेशन लोन का रिपेमेंट पढ़ाई के दौरान या फिर पढ़ाई पूरी होने के बाद की जा सकती है। गर्ग कहते हैं कि एजुकेशन लोन के ब्याज पर आयकर का लाभ लेने पर कोई प्रतिबंध नहीं है।

वास्तविक रूप से चुकाए गए ब्याज के आधार पर ही कर-छूट की सुविधा उपलब्ध है। यदि आप एक वर्ष के भीतर एक साल के ब्याज का भुगतान करते हैं, तब आप उस साल में चुकाए गए वास्तविक ब्याज पर कर छूट पाने का दावा करने के हकदार होंगे।

यदि आप ब्याज के एरियर का भुगतान करते हैं तब आपको अपने बैंकर से चुकाए गए कुल ब्याज के रकम का प्रमाणपत्र लेना जरूरी होगा। गर्ग कहते हैं कि एजूकेशन लोन के ब्याज भुगतान पर कर छूट लगातार आठ सालों के लिए उपलब्ध है।

लिए गए एजूकेशन लोन पर जिस साल से आप ब्याज का भुगतान करना शुरू करते हैं उसे पहला साल माना जाएगा। इसके लिए यह जरूरी नहीं है कि आपने इस साल लोन लिया है या नहीं। यदि आपकी लोन अवधि आठ साल से अधिक है तब आप आठ साल के बाद वाले सालों के लिए कर छूट का दावा नहीं कर सकते।

तर्कसंगत रूप से यदि आप आठ साल से पहले या एक बार में ही पूरा लोन चुकाते है तो भी आपको इस पर कर छूट की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी। इसलिए आपको एजूकेशन लोन को आठ साल के भीतर ही चुकाने का प्लान बनाना चाहिए।  

किस कोर्स के लिए मिलेगा एजूकेशन लोन?
हायर सेकेंडरी सर्टिफिकेट परीक्षा पास करने के बाद किसी भी कोर्स के लिए एजूकेशन लोन लिया जा सकता है। इससे पहले मेडिकल और इंजीनियरिंग आदि जैसे विशेष क्षेत्रों में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन के फुल टाइम कोर्स के लिए ही यह सुविधा उपलब्ध थी।

हालांकि, साल 2009 के बजट में यह सब बदल दिया गया और अब आप पार्ट टाइम कोर्स के लिए भी एजूकेशन लोन पर कर छूट प्राप्त कर सकते हैं। यह कोर्स किसी भी सरकारी मान्यता प्राप्त स्कूल, बोर्ड या यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त होनी चाहिए।

कौन ले सकता है लाभ
यह फायदा केवल व्यक्तिगत तौर पर उपलब्ध है और एचयूएफ (अविभाजित हिंदू परिवार) को इसका कोई लाभ नहीं मिलता। इसके विपरीत कई इनकम टैक्स बेनेफिट्स व्यक्तिगत और एचयूएफ दोनों के लिए समान रूप से उपलब्ध हैं।

इससे पूर्व केवल स्वयं की पढ़ाई हेतु लिए गए लोन के ब्याज भुगतान पर ही कर छूट का लाभ मिलता था। वर्ष 2007 के बजट में संशोधन किया गया और तब से स्वयं, पत्नी, बच्चे और अभिभावक के रूप में किसी भी बच्चे के लिए लिए गए एजूकेशन लोन के ब्याज भुगतान पर कर छूट का लाभ लिया जा सकता है।

लोन संयुक्त नाम से लें
एजूकेशन लोन हमेशा माता-पिता और छात्र के नाम से लिया जाना चाहिए। पढ़ाई के दौरान एजूकेशन लोन के ब्याज के भुगतान पर माता-पिता कर-छूट का दावा कर सकते हैं।

ऐसे अधिकतर मामले देखने में आए हैं कि माता-पिता जिन्होंने अपने बच्चे के लिए एजूकेशन लोन लिया वह उच्च कर की श्रेणी में आने से बच जाते हैं जबकि जिस छात्र के लिए लोन लिया गया वह उच्च कर-वर्ग में आ जाता है।

ऐसे मामले में जिसके लिए लोन लिया गया है और वह उच्च कर-वर्ग में आता है तो वह एजूकेशन लोन के ब्याज का भुगतान कर सकता है। साथ ही इस कर-छूट का दावा वह अपने इनकम टैक्स रिटर्न में कर सकता है।

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