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359 मीटर ऊचा 1,315 मीटर लंबाई वाला दुनिया का सब से बड़ा रेलवे का पुल अब आप के देश में

359 मीटर ऊचा 1,315 मीटर लंबाई वाला दुनिया का सब से बड़ा रेलवे का पुल अब आप के देश में

फ्रांस से भी ऊंचा -विशेष प्रकार के इस्पात से आर्क शेप में बने इस पुल की ऊंचाई चिनाब नदी के तल से 359 मीटर ऊंची होगी। पुल की लंबाई 1,315 मीटर की होगी। विश्व में अब तक का सबसे ऊंचा रेल पुल दक्षिणी फ्रांस के टार्न नदी पर है जिसका सबसे ऊंचा खंभा भी 340 मीटर का ही है।

25,000 टनस्टील की खपत होगी इस पुल में जबकि फ्रांस के पुल में 36,000 टन स्टील की खपत हुई थी
512 करोड़ रुपये में ही उत्तर रेलवे कश्मीर में यह रेल पुल बना रहा है मगर फ्रांस के उस पुल की लागत तब 2,200 करोड़ रुपये आई थी

कुतुबमीनार की ऊंचाई का अहसास तो आपको होगा ही। यदि एक के ऊपर एक, पांच कुतुब मीनार रख दिया जाए और उसके ऊपर रेलगाड़ी चलाई जाए तो कैसी दिखेगी रेल लाइन। आप कहेंगे अद्भुत, पर यह तो सपना है। लेकिन यह सपना नहीं बल्कि हकीकत बनने जा रहा है और इसे हकीकत बनाने का बीड़ा उठाया है उत्तर रेलवे ने।

उत्तर रेलवे में उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियेाजना के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी भगवान दास गर्ग के मुताबिक जम्मू के रियासी जिले में कौड़ी और बक्कल गांव के बीच चिनाब नदी पर पुल न सिर्फ देश में बल्कि दुनिया में भी अद्भुत होगा।

विशेष प्रकार के इस्पात से धनुषाकार (आर्क शेप में) बनने वाले इस पुल की ऊंचाई चिनाब नदी के तल से 359 मीटर ऊंची होगी। पुल की लंबाई 1,315 मीटर की होगी।

विश्व में अब तक का सबसे ऊंचा रेल पुल दक्षिणी फ्रांस के टार्न नदी पर है जिसका सबसे ऊंचा खंभा भी 340 मीटर का ही है। हालांकि उस पुल पर रेलगाड़ी 300 मीटर की ऊंचाई से ही गुजरती है जबकि चिनाब पुल से 359 मीटर की ऊंचाई से गुजरेगी।

इस पुल में 25,000 टन स्टील की खपत होगी जबकि फ्रांस के पुल में 36,000 टन स्टील की खपत हुई थी। उसकी लागत (तत्कालीन कीमत स्तर पर) 2200 करोड़ रुपये थी जबकि उत्तर रेलवे महज 512 करोड़ रुपये में इसे बना रही है। पेरिस (फ्रांस) का अजूबा एफिल टावर 324 मीटर ऊंचा है जबकि चिनाब ब्रिज 359 मीटर ऊंचा होगा मतलब यह एफिल टावर से भी 35 मीटर ऊंचा होगा।

कुछ ही साल पहले कौड़ी गांव के पास पहुंचना बेहद मुश्किल था लेकिन जब से इस पुल को बनाने के लिए वहां पहुंच पथ बनायी गई, (जिस पर रेलवे के दो-ढाई सौ करोड़ रुपये खर्च हो गए) तब वहां ट्रक-ट्रेलर पहुंचने लगे।

इसी से पुल के लिए स्टील, सीमेंट एवं अन्य साजो सामान की ढुलाई हो रही है। वहां आर्क ब्रिज बनाने के लिए नदी के दोनों छोर पर दो-दो पायलोन बनाए गए हैं जिस पर केबल क्रेन चढ़ाया जाएगा। 

भिलाई में बने विशेष किस्म के स्टील से बनने वाले इस पुल को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह 266 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाले तूफान को भी झेल जाए। जहां पुल बनाया जा रहा है, वहां सौ डेढ़ सौ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफान चलना आम बात है।

गर्ग ने बताया कि धनुषाकार पुल का डिजाइन जर्मन फर्म लियोनहार्ट, एंड्रा एंड पार्टनर तथा फ्लिंट एं नील पार्टनरशिप, (लंदन) ने किया है जबकि वायडक्ट और फाउंडेशन की डिजाइन फिनलैंड की कंपनी डब्ल्यूएसपी कंसल्टिंग कोट्र्स ने किया है। विंड टनल टेस्ट डेनमार्क के फोर्स टेक्नोलॉजी ने किया है।

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