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SPECIAL: 3 सरकारी और 2 निजी कंपनियों को मिलेगा नया बैंक लाइसेंस!

SPECIAL: 3 सरकारी और 2 निजी कंपनियों को मिलेगा नया बैंक लाइसेंस!

इनमें से तीन सरकारी कंपनियां और दो निजी कंपनियां हो सकती हैं

पहला चरण
: भारतीय रिजर्व बैंक ने ड्यू डिलिजेंस के तहत पांच दावेदारों के बारे में मांगी है जानकारी
: आईडीएफसी, भारतीय डाक, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, एलएंडटी और बंधन इनमें हैं शामिल

25 दावेदार हैं नए बैंक लाइसेंस के लिए कुल मिलाकर

आमचुनाव का बिगुल भले ही बज चुका हो, लेकिन नए बैंक लाइसेंस पाने के इच्छुक दावेदारों पर इससे कोई खास असर नहीं होगा। खबर है कि रिजर्व बैंक पहले चरण में पांच दावेदारों को नए बैंक लाइसेंस दे सकता है। इनमें से तीन सरकारी कंपनियां और दो निजी कंपनियां हो सकती हैं।

सूत्रों के मुताबिक रिजर्व बैंक ने ड्यू डिलिजेंस के तहत जिन दावेदारों की जानकारी मांगी है उनमें आईडीएफसी, भारतीय डाक और एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस जैसी तीन सरकारी कंपनियां शामिल हैं। उधर निजी कंपनियों में लार्सन एंड टुब्रो और बंधन शामिल हैं। बंधन एक माइक्रोफाइनेंस कंपनी है। इसके पीछे तर्क यह है कि रिजर्व बैंक सार्वजनिक क्षेत्र की तीन, निजी क्षेत्र की एक बड़ी कंपनी तथा एक छोटी कंपनी को लाइसेंस देकर संतुलन बिठाना चाहता है।

फिलहाल ब्रोकरेज हाउसेज को लाइसेंस देने पर सहमति नहीं है और इसी कारण बंधन जैसे छोटे दावेदार को चुना गया है। वैसे तो इससे पहले रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर के.सी. चक्रबर्ती एनबीएफसी यानी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को बैंक लाइसेंस में प्रमुखता देने की वकालत कर चुके हैं, लेकिन यह काम रिजर्व बैंक अगले चरण में कर सकता है।

पहले चरण में लाइसेंस पाने के बाद भी नए बैंक का परिचालन शुरू करने में 18 से 24 माह का समय लगेगा। ऐसे में रिजर्व बैंक पहले चरण वाले दावेदारों का परिचालन और काम देखने के बाद ही दूसरे चरण में बैंक लाइसेंस देने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।

गौरतलब है कि रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर बिमल जालान की अगुवाई वाली कमेटी ने हाल ही में अपनी सिफारिशें सौंप दी हैं और अब रिजर्व बैंक के पाले में गेंद है कि किसे लाइसेंस दिया जाए और किसे बाहर रखा जाए।

नए बैंक लाइसेंस के लिए कुल मिलाकर 25 दावेदार हैं। टाटा संस ने पहले ही अपना आवेदन वापस ले लिया है। आदित्य बिड़ला ग्रुप और अनिल अंबानी समूह भी दावेदारों की सूची में हैं, लेकिन इन दोनों कंपनियों से जुड़े कोल ब्लॉक और 2जी मामलों की जांच चल रही है।

इसलिए बताया जाता है कि इन दोनों कंपनियों को पहले चरण में बैंक लाइसेंस देने की कोई योजना नहीं है। जब अगले चरण में बैंक लाइसेंस देना होगा, तब तक हो सकता है कि इन दोनों कंपनियों पर जो आरोप लगे हैं, उन पर कुछ फैसला भी आ जाए।

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