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मेडिक्लेम के साथ गंभीर बीमारियों का कवर न भूलें

मेडिक्लेम के रहने पर छोटी-मोटी बीमारियों जैसे कि फूड प्वाइजनिंग या एपेंडिसाइटिस की दशा में जांच के खर्च समेत अस्पताल का व्यय का वहन बीमा कंपनी द्वारा दिया जाता है। लेकिन कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में ज्यादा पैसा लगता है जो कि क्रिटिकल इलनेस पॉलिसी से पूरा होगा

मार्केटिंगएक्जीक्यूटिव मयंक देसाई को पिछले दिनों 45 साल की उम्र में हार्ट अटैक का हल्का झटका लगा और स्वस्थ होने के लिए उन्हें सर्जरी करानी पड़ी।

मयंक देसाई की आर्थिक दशा अभी कुछ ऐसी हैं कि उन पर कार और हाउसिंग लोन की अदायगी का बोझ तो है, साथ ही उनके दो बच्चे विदेश में पढ़ रहे हैं। अगर वह भविष्य में इसी तरह बीमार रहे तो उन्हें एक बार में चार लाख रुपये का भुगतान करना बहुत मुश्किल हो जाएगा।

यह तो अच्छा था कि एक मित्र की सलाह पर उन्होंने कुछ समय पहले एक हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ले ली थी जिस कारण इलाज का आर्थिक बोझ उन्हें नहीं सहना पड़ा। वैसे तो हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी ने अस्पताल के बिलों का भुगतान कर दिया पर देसाई के परिवार को तब वित्तीय संकटों का सामना करना पड़ा जब वे घर पर रह कर स्वास्थ्य लाभ कर रहे थे।

देसाई का मामला कोई अनूठा नहीं है क्योंकि वह ऐसे लोगों की बढ़ती आबादी के एक अंग हैं जो काफी कम उम्र में ही जीवन शैली से जुड़ी बीमारियों के शिकंजे में फंस जाते हैं और ऐसे समय में जब हेल्थ केयर की लागत आसमान छू रही हो तो लोगों के लिए हेल्थ केयर के खर्चों का भुगतान करना बहुत बड़ी समस्या बन गई है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए आज के जमाने में एक कंप्रिहेंसिव हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेकर चलना आपके लिए तथा आपके परिवार के लिए बहुत जरूरी हो गया है।

दो तरह की पॉलिसियां
हालांकि, कोई भी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेते समय विभिन्न हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों की संरचना और उसके लाभों को भी ठीक तरह से समझ लीजिए। वैसे हेल्थ इंश्योरेंस प्लान को लाभ देने के आधार पर दो भागों में बांटा जा सकता है- इंडेम्निटी आधारित और लाभ आधारित।

इंडेम्निटी आधारित हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में मेडिकल ट्रीटमेंट पर बीमित व्यक्ति जो खर्च करता है, उसका पूरा भुगतान किया जाता है बशर्ते कि वह सम एश्योर्ड के बराबर या उससे कम हो। लाभ आधारित प्लान मुख्यत: क्रिटिकल इलनेस प्लान हैं जिसमें बीमित व्यक्ति को पॉलिसी में उल्लिखित गंभीर बीमारियों के इलाज पर हुआ पूरा खर्च सम एश्योर्ड की सीमा के तहत एकमुश्त मिल जाता है।

दोनों प्लान के लक्ष्य अलग-अलग
इंडेम्निटी आधारित प्लान, मुख्यत: मेडिक्लेम और लाभ आधारित यानी कि क्रिटिकल इलनेस प्लान दो अलग-अलग ध्येय की पूर्ति करते हैं और दोनों ही आपके हेल्थ इंश्योरेंस पोर्टफोलियो में शामिल होने चाहिए। दोनों के अपने अलग-अलग उपयोग हैं। मेडिक्लेम के रहने पर छोटी-मोटी बीमारियों जैसे कि फूड प्वाइजनिंग या एपेंडिसाइटिस की दशा में टेस्ट के खर्च समेत अस्पताल का व्यय का वहन बीमा कंपनी द्वारा दिया जाता है।

लेकिन कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में ज्यादा पैसा लगता है जो कि क्रिटिकल इलनेस पॉलिसी से पूरा होगा। किसी भी हेल्थ इंश्योरेंस प्लान की खरीदारी करने से पहले सम एश्योर्ड, एंट्री एज, कवर की गई बीमारियां, अवधि और प्रीमियम की राशि देखने व समझने की जरूरत होती है।

हालांकि कम प्रीमियम के हेल्थ इंश्योरेंस प्लान को लिया जा सकता है पर यह भी देखना होगा कि उसमें कितनी गंभीर बीमारियों को कवर किया गया है। ग्राहक को हेल्थ इंश्योरेंस प्लान खरीदते समय क म प्रीमियम के मायाजाल में फंसना अच्छा नहीं है।

ऑनलाइन प्लान भी हैं उपलब्ध
इन दिनों कुछ बीमा कंपनियां ऑनलाइन हेल्थ इंश्योरेंस प्लान भी देने लगी हैं जो कि बेहतर विकल्प है क्योंकि ऐसी योजनाओं का प्रीमियम कम होता है जबकि इसमें लाभ समान होते हैं।

निवेशकों को यह भी सलाह दी जाती है कि वे किसी जीवन बीमा कंपनी से एंडोमेंट आधारित हेल्थ इंश्योरेंस प्लान खरीदें जिसमें क्रिटिकल इलनेस राइडर हो ताकि उन्हें कंप्रिहेंसिव हेल्थ पालिसी का लाभ मिल सके। ऐसी पॉलिसियां बेहतरीन होती हैं।

हेल्थ इंश्योरेंस प्लान मेडिकल खर्च मुहैया कराने के साथ कर लाभ भी देते हैं लिहाजा ऐसे प्लान में निवेश कर आप अपने मन की शांति में भी निवेश कर रहे हैं।
टी. आर. रामचंद्रन - लेखक अवीवा लाइफ इंश्योरेंस के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर हैं। प्रकाशित विचार उनके निजी हैं।

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