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नई आवक शुरू होने पर भी सरसों में तेजी

नई आवक शुरू होने पर भी सरसों में तेजी

मध्यप्रदेश में रबी सीजन की तीसरी सबसे महत्वपूर्ण फसल सरसोंं की आवक शुरू हो गई है। प्रदेश के मालवांचल में करीब 25 दिन पूर्व सरसों की आवक शुरू हो गई थी लेकिन प्रदेश के सबसे बड़े उत्पादक क्षेत्र ग्वालियर-चंबल संभाग में करीब एक सप्ताह पूर्व ही आवक शुरू हुई है।

ओला और बारिश के कारण मंडियों में अभी सरसों की आवक कम है लेकिन प्लांट संचालकों की मांग होने से भावों में इजाफा हो रहा है।

बीते 20 दिनों में ही नयी सरसों के भाव 500 से 800 रुपये प्रति क्विंटल तक चढ़ गए जबकि अभी 10 फीसदी तक सरसों में नमी आ रही है। वर्तमान में सरसों का भाव 3800 रुपये क्विंटल चल रहा है। अभी सरसों की करीब 1000 से 1500 क्विंटल प्रतिदिन की आवक हो रही है।  

नीमच के थोक सरसो व्यापारी और प्लांट संचालक अशोक कुमार गुप्ता ने कहा कि बीते एक सप्ताह पहले सरसों की आवक शुरू हो गई थी लेकिन बारिश-ओलों के कारण मंडी में आवक प्रभावित हुई है। वर्तमान में 3750 से 3800 रुपये प्रति क्विंटल भाव है। उन्होंने कहा कि भावों में बढ़त का मुख्य कारण प्लांट संचालकों की मांग है। प्लांट को माल चाहिए लेकिन खेरीज में सरसों की आवक कम है।

मुरैना मंडी में मंगलवार को 400 क्विंटल सरसों की आवक रही। वहीं, दूसरी ओर ग्वालियर के व्यापारी नवीन जैन ने कहा कि अभी कारोबार मालवा की सरसों पर ही हो रहा है क्योंकि क्षेत्र में सरसों की आवक मुश्किल से 500 बोरी प्रतिदिन है। उन्होंने कहा कि आवक बढऩे पर अगले 20 दिनों में सरसों के भाव में 200 से 300 रुपये क्विंटल की गिरावट आ सकती है।

अभी नये माल में नमी आ रही है, यह 8 से 10 फीसदी तक हैं। वहीं नीमच के व्यापार व गौरव ट्रेडर्स के नीमच में वर्तमान में करीब 800 क्विंटल नयी सरसों प्रतिदिन आ रही है। जबकि इसका भाव 3700 से 3800 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। जबकि पुरानी सरसो का भाव 3700 रुपये क्विंटल चल रहा है।

अब हमारे यहां सूखा माल आने लगा है लेकिन बारिश के कारण अभी नमी युक्त माल ही ज्यादा आ रहा है। उन्होंने कहा कि भावों में लंबी गिरावट की उम्मीद नहीं है। प्रदेश में इस बार 8.11 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में सरसों की बुआई का कृषि विभाग ने अनुमान व्यक्त किया है।

मध्य प्रदेश में ग्वालियर, चंबल अंचल के अतिरिक्त टीकमगढ़, छतरपुर, मंदसौर, नीमच, उज्जैन और रतलाम जिलों में प्रमुख तौर पर सरसों की खेती की जाती है।

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