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खनन लीज के लिए पर्यावरण नियमों में हुई और सख्ती

खनन लीज के लिए पर्यावरण नियमों में हुई और सख्ती

मुश्किल - चूना पत्थर, ग्रेनाइट, डोलोमाइट का खनन होगा प्रभावित

दिक्कत कहां
बहुत से खनिजों के लिए अभी तक सिर्फ राज्य स्तर पर अनुमति
अब केंद्रीय वन एवं पर्यावरण विभाग से एनओसी लेना जरूरी
केंद्र ने इस संबंध में राज्य सरकार के लिए जारी की गाइडलाइन
एनओसी से पहले आवेदक को देनी होगी सीडी में कुछ जानकारी

छत्तीसगढ़में गौण और मुख्य खनिज के उत्खनन ठेके की आवेदन प्रक्रिया में नया पेंच जोड़ दिया गया है। अब डोलोमाइट, लाइमस्टोन व अन्य खनिजों के ठेके के लिए वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के अनापत्ति प्रमाणपत्र को अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा एनओसी से पहले आवेदक को सीडी में 14 पेज की जानकारी रायपुर स्थित खनन मंत्रालय में जमा करनी होगी।

छत्तीसगढ़ खनन एवं भौमिकी विभाग के अधिकारी ने बताया कि चूना पत्थर, ग्रेनाइट, डोलोमाइट, फर्शी पत्थर जैसे गौण खनिजों के साथ विभिन्न मुख्य खनिजों के विशाल निक्षेप मौजूद हैं। इनके खनन के लिए अभी तक राज्य स्तर पर ही अनुमति प्रदान की जाती थी।

लेकिन अब इसके लिए वन एवं पर्यावरण विभाग की ओर से नया आदेश प्रेषित किया गया है। अब खनिज उत्खनन से पहले वन एवं पर्यावरण विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होगा। इसके लिए केंद्र सरकार ने राज्य सरकार के लिए गाइडलाइन भी जारी कर दी है।

एनओसी के लिए सबसे पहले रायपुर स्थित वन विभाग में आवेदन देना होगा। यहां से लीज संबंधी शर्तों के अलावा आवेदन के साथ दी जाने वाली जानकारी के बारे में बताया जाएगा। इसी के अनुसार आवेदन देना होगा। खदानों को लीज में लेने के लिए आवेदनकर्ता को 14 पेज में जानकारी देनी होगी।

इसमें जमीन के मालिकाना हक अथवा जमीन के लीज एग्रीमेंट के दस्तावेज, नक्शा, खसरा बी वन के अलावा पर्यावरण से संबंधित अन्य जानकारी भी देनी होगी। सीडी वन विभाग को सुपुर्द करनी होगी। वन विभाग द्वारा आवेदन को केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भेजा जाएगा, जहां पड़ताल के बाद मंत्रालय एनओसी जारी करेगा।

चूना पत्थर की खदान के एक आवेदक ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने मुख्य खनिजों के लिए पर्यावरण संबंधी नियमों को काफी सख्त बना दिया है। इसके चलते एक खनिज लीज की अनुमति के लिए औसतन 3 से 4 वर्ष का समय लग जाता था।

हालांकि कुछ गौण खनिजों को पर्यावरण की एनओसी से छूट मिली थी। लेकिन अब सरकार ने गौण खनिजों के लिए भी पेचीदगी बढ़ा दी है। इस नए नियम के चलते खनन आवेदनों की प्रक्रिया में पहले से और अधिक समय लगेगा।

आज की स्थिति में राज्य में खदानों के उत्खनन ठेके के लिए सैकड़ों आवेदन लंबित हैं। ऐसे में इनके निपटारे में विभाग के लिए मुश्किलें आएंगी। इसके अलावा खनन के लिए कतार में खड़े सैकड़ों आवेदकों को भी नई तरह से आवेदन की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ेगी।

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