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बंद होने के कगार पर इंटरनेट कारोबार

बंद होने के कगार पर इंटरनेट कारोबार

देशमें भले ही इंटरनेट ग्राहकों की संख्या में तेजी के साथ इजाफा हो रहा है, लेकिन देश में इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स (आईएसपी) की संख्या में तेजी के साथ गिरावट आ रही है। अभी तक देश में 900 इंटरनेट कंपनियों को लाइसेंस दिए गए हैं जिनमें से फिलहाल सिर्फ 150 कंपनियां इंटरनेट सेवाएं दे रही हैं।

यही नहीं, वर्ष 2015 तक इन 150 कंपनियों में से भी 60-70 फीसदी कंपनियां अपने लाइसेंस सरेंडर कर सकती हैं या फिर कारोबार बंद कर सकती हैं। 

इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स का कहना है कि नई टेलीकॉम नीति 2012 के तहत 15 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस तय की गई है। इन कंपनियों का कहना है कि 15 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस चुकाने के बाद कंपनियों के सामने बिजनेस की गुंजाइश नहीं बचती है। लिहाजा जिन कंपनियों के लाइसेंस 2015 में एक्सपायर हो रहे हैं, वे  कंपनियां अपने लाइसेंस रिन्यू नहीं करवाएंगी।

इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएसपीएआई) के प्रेसिडेंट राजेश छरिया ने 'बिजनेस भास्करÓ को बताया कि मौजूदा समय में देश भर में सिर्फ 150 कंपनियां ऐसी हैं जिनके पास इंटरनेट सेवाएं देने का लाइसेंस बचा है। अभी तक 900 से ज्यादा कंपनियों ने लाइसेंस लिए थे।

लेकिन, सरकार की नीति मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों की तरफ ही झुकी रही। लिहाजा, कंपनियों ने इस कारोबार से हाथ खींचना शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि 150 लाइसेंस जिन कंपनियों के पास हैं उनमें से 60-70 फीसदी लाइसेंस 2015 में एक्सपायर हो रहे हैं।

सरकार ने लाइसेंस फीस में कमी जैसे कदम नहीं उठाए तो कंपनियां लाइसेंस रिन्यू नहीं कराएंगी। इस तरह देश में इंटरनेट कंपनियों का कारोबार पूरी तरह से बंद होने के कगार पर होगा।

एक अन्य कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि सरकार ने इंटरनेट टेलीफोनी को बढ़ावा न देकर सबसे बड़ी गलती की है। इंटरनेट कंपनियों पर कई अन्य पाबंदी भी है। लिहाजा, इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स काफी बढ़ ही नहीं पाए।

सरकार ने देशव्यापी लाइसेंस फीस 15 करोड़ रुपये तय कर दी है। ऐसे में जो कंपनियां मौजूद हैं वह भी हाथ खींच लेंगी। इस तरह देश में इंटरनेट कंपनियों का कारोबार पूरी तरह से बंद हो सकता है।

 

15 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस चुकाने के बाद कंपनियों के सामने नहीं बचती है बिजनेस की गुंजाइश

घटती संख्या
देश में 900 इंटरनेट कंपनियों को लाइसेंस जिनमें से फिलहाल सिर्फ 150 कंपनियां दे रही हैं सेवाएं
2015 तक इन 150 कंपनियों में से भी 60-70 फीसदी सरेंडर कर सकती हैं अपने लाइसेंस

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