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लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में भारतीयों को ज्यादा मौके

लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में भारतीयों को ज्यादा मौके

योजना
एजुकेशन और रिसर्च में भारत-ब्रिटिश सहयोग बढ़ाने की कवायद के तहत उठाया कदम
जरूरत के हिसाब से 3,000 से 32,000 पाउंड के बीच स्कॉलरशिप इसी सत्र में मिलेगी
फिलहाल लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में हर साल 300 से 400 भारतीय छात्र पहुंचते हैं

अपनीतीन दिवसीय भारत यात्रा पर इस समय भारत में मौजूद ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरून की आपसी सहयोग की घोषणाओं का असर तुरंत दिखने लगा है।

ब्रिटेन के प्रसिद्ध लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंडपॉलिटकल साइंस (एलएसई) ने  कहा है कि एजुकेशन और रिसर्च में भारत-ब्रिटिश सहयोग को बढ़ाने की कवायद के तहत वह स्नात्कोत्तर स्तर पर 50 भारतीय छात्रों को छात्रवृत्ति देगा।

एलएसई की इस कवायद से और अधिक भारतीय छात्रों को इसी साल से लंदन स्थित प्रतिष्ठित ब्रिटिश यूनिवर्सिटी में पढऩे का मौका मिलेगा।

यह स्कॉलरशिप सफल भारतीय छात्रों की जरूरत के हिसाब से 3,000 से 32,000 पाउंड के बीच होगी और उन छात्रों को मिलेगी जो एलएसई के मास्टर प्रोग्राम में 30 अप्रैल 2013 से शुरू हो रहे पाठ्यक्रम में शामिल होंगे।

लंदनस्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स का भारत से रिश्ता एक सदी से भी पुराना है। इस बार एलएसई में ज्यादा संख्या में भारतीय छात्रों के पहुंचने की संभावना है।

एलएसई के डायरेक्टर प्रोफेसर क्रैग कैल्होन ने कहा कि उनका मकसद एलएसईके दरवाजे सभी प्रतिभाशाली स्टूडेंट्स के लिए खुले रखना है, भले ही उनकी आर्थिक पृष्ठभूमि कुछ भी हो।इसी संबंध को और मजबूत करते हुए भारत से आने वाले छात्रों को 50 छात्रवृत्तियां दी जा रही हैं।

कैल्होन इस समय ब्रिटिश पीएम के प्रतिनिधिमंडल में भारत यात्रा पर हैं।वह ब्रिटिश पीएम कैमरून के उस संदेश को दोहराना चाहते हैं कि भारतीय स्टूडेंट्स का ब्रिटेन में पढऩे और काम करने के लिए स्वागत है।

लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में हर साल 300 से 400 भारतीय छात्र दाखिला लेते हैं और उनमें से ज्यादातर पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम में दाखिला लेते हैं। एलएसई ने मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) के साथ भी लैंगिक समानता पर एक रिसर्चप्रोग्राम में साझेदारी के लिए समझौता किया है।

इस समझौते को जमशेदजी टाटा ट्रस्ट सपोर्टकर रहा है। ट्रस्ट 2007 से ही संयुक्त रिसर्च प्रोजेक्ट्स को आर्थिक मदद दे रहा है और अब तक 18 लाख पाउंड की मदद दे चुका है।

अब वे महिलाओं से संबंधित मुद्दों पर शोध के लिए सहयोग करना चाहते हैं।एलएसई के प्रमुख प्रो. कैल्होन का कहना है कि लिंग समानता से महत्वपूर्ण कोई मुद्दा नहीं हो सकता और वे सामाजिक चुनौतियों से निपटने के लिए शोध आधारित ज्ञान पर काम कर रहे हैं।

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