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कंपनियों पर भारी पड़ेंगी कोयला समूह की सिफारिशें

कंपनियों पर भारी पड़ेंगी कोयला समूह की सिफारिशें

क्या कहती है रिपोर्ट
कंपनियों के पास नहीं रहेगा खनन चालू रखने का कोई रास्ता
कंपनियों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ेगा इस कदम से
सेक्टर के लिए भारी विपरीत प्रभाव वाला साबित होगा फैसला
छोटी कंपनियों को आएगी इस मामले में सबसे ज्यादा समस्या

सरकारके अंतर-मंत्रालय समूह (आईएमजी) द्वारा उत्पादन में देरी करने वाली कंपनियों को कोयला खदानों का आवंटन रद्द करने और कुछ कंपनियों की बैंक गारंटी जब्त कर लेने की सिफारिशों को घरेलू रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स ने कंपनियों की वित्तीय स्थिति के लिए बेहद घातक करार दिया है।

एजेंसी का कहना है कि इन सिफारिशों के लागू होने की स्थिति में कंपनियों के सामने कोयला ब्लॉकों को डेवलप करने का कोई रास्ता नहीं रह जाएगा और इससे उन्हें भारी वित्तीय नुकसान झेलना पड़ेगा।

बीते सालों में आवंटित ऐसी कोयला खदानों, जिनमें खनन शुरू करने के मामले में बेहद धीमी गति से काम हुआ है या फिर डेवलपरों द्वारा काम शुरू करने में गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है, अंतर-मंत्रालय समूह ने ऐसी खदानों का आवंटन रद्द करने की सिफारिश की है।

साथ ही, आईएमजी ने कई मामलों में यह कोयला खदानें हासिल करने वाली कंपनियों द्वारा जमा की गई बैंक गारंटी को भी जब्त कर लेने की सिफारिश की है। इसमें कैप्टिव माइन्स के साथ ही एंड-यूज माइन्स को भी शामिल किया गया है।

इंडिया रेटिंग्स ने कहा है कि अगर समूह की सिफारिशें मान ली जाती हैं, तो इनके गंभीर परिणाम होंगे, क्योंकि इससे एक तो खनन अधिकार हासिल करने वाली कंपनी के पास काम चालू रखने का कोई रास्ता नहीं जाएगा, साथ ही इससे कंपनियों को भारी वित्तीय नुकसान भी उठाना पड़ेगा।

केंद्र सरकार ने कोयला मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव की अध्यक्षता वाले इस समूह का गठन पिछले साल किया था। इस समूह को कैप्टिव माइनिंग के लिए आवंटित की गई कोयला खदानों पर हो रहे काम की प्रगति की समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई थी। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च की यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जबकि एक संसदीय पैनल ने अब तक उत्पादन शुरू न कर पाने वाली खदानों का आवंटन रद्द करने की सिफारिश की है।

साथ ही, पैनल ने वर्ष 1993 से वर्ष 2010 के बीच आवंटित की गई सभी खदानों को अवैध और गैरकानूनी घोषित कर दिया है। अपनी रिपोर्ट में इंडिया रेटिंग्स ने चेतावनी दी है कि अगर खदानों का आवंटन रद्द करने की कार्यवाही शुरू कर दी जाती है तो इससे कोयला सेक्टर में निवेश की रफ्तार में खासी गिरावट आ सकती है।

इसके चलते, यह कदम कोयला सेक्टर के लिए विपरीत प्रभाव वाला साबित हो सकता है। साथ ही, इंडिया रेटिंग्स ने कहा है कि छोटी नेटवर्थ व कम कैश फ्लो वाली कंपनियों के मामले में बैंक गारंटी जब्त कर लेने का कदम काफी गंभीर नकारात्मक असर पैदा कर सकता है।

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