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विदेश में चीनी सस्ती होने से निर्यात मुश्किल

विदेश में चीनी सस्ती होने से निर्यात मुश्किल

विपरीत दिशा
घरेलू बाजार में चीनी के दाम 581 डॉलर प्रति टन पर
लिफ्फे एक्सचेंज में व्हाइट शुगर 495 डॉलर प्रति टन
विदेशी बाजार में भाव दो साल के निचले स्तर पर

विश्वबाजार में चीनी के दाम करीब दो वर्ष के निचले स्तर पर चल रहे हैं जबकि घरेलू बाजार में चीनी के दाम ऊंचे हैं। उद्योग संगठन का कहना है कि चीनी उत्पादन की लागत बढऩे के कारण भारत से चीनी का निर्यात करना मुश्किल होगा। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) का कहना है कि अगले तीन साल तक भारत से चीनी का निर्यात करना मुश्किल होगा।

भारत से पिछले दो वर्षों के दौरान चीनी का जोरदार निर्यात हुआ। अगर विश्व बाजार में भारतीय चीनी की सप्लाई बाधित होती है तो मूल्यों को समर्थन मिलेगा।

हालांकि अभी विदेश में भाव दो वर्ष के निचले स्तर पर होने से चीनी का निर्यात करना फायदेमंद नहीं है। भारत में पिछले सीजन के दौरान अल्प वर्षा के कारण चीनी का उत्पादन भी कम रहने से निर्यात प्रभावित होगा।

इस्मा के डायरेक्टर जनरल अबिनाश वर्मा ने कहा कि इस समय चीनी का निर्यात फायदेमंद नहीं है। इस वजह से इस समय निर्यात नहीं हो रहा है। अगर आगे भी विदेशी बाजार में दाम नहीं बढ़े तो निर्यात संभव नहीं होगा।

भारतीय वायदा बाजार में चीनी के दाम 3156 रुपये प्रति क्विंटल (581.5 डॉलर प्रति टन) चल रहे हैं जबकि लंदन के लिफ्फे एक्सचेंज में मई डिलीवरी चीनी का भाव मंगलवार को 495.60 डॉलर प्रति टन रहा।

अप्रैल में ब्राजील का नया सीजन शुरू होने पर विश्व बाजार में चीनी के दाम और घट सकते हैं। मुंबई में एक ग्लोबल ट्रेडिंग कंपनी के डीलर ने कहा कि भारतीय चीनी निर्यात के लिए विश्व बाजार में मूल्य सुधार की जरूरत है। जबकि इस समय मूल्यों में सुधार आने की कोई संभावना नहीं है।

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