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सरकार की कड़ाई से सोने की मांग 12 फीसदी घटकर 864 टन

सरकार की कड़ाई से सोने की मांग 12 फीसदी घटकर 864 टन

सख्ती का असर
वर्ष 2012 में ज्वैलरी के लिए मांग 11 फीसदी घटकर 552 टन
निवेश के लिए सोने की मांग 15 फीसदी घटकर 312 टन रह गई
ऊंची घरेलू कीमत और आयात शुल्क में बढ़ोतरी से मांग प्रभावित
 

भारत के अल्प विकसित वित्तीय बाजार में सोने की अहमियत ज्यादा : डब्ल्यूजीसी

पिछलेवर्ष 2012 के दौरान देश में सोने की मांग करीब 12 फीसदी घटकर 864.2 टन रह गई। वल्र्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार घरेलू बाजार में सोने के ऊंचे दाम, आयात शुल्क में बढ़ोतरी और ज्वैलर्स की हड़ताल के कारण भारत की मांग प्रभावित हुई।

डब्ल्यूजीसी की सोने पर जारी रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2011 के दौरान भारत में सोने की कुल मांग 986.3 टन रही थी। सोने की मांग के लिहाज से भारत और चीन दो प्रमुख देश हैं।

भारत में सरकार सोने की मांग नियंत्रित करने के लिए कई तरह के उपाय कर रही है। इनमें सोने पर आयात शुल्क में बढ़ोतरी प्रमुख उपाय है। लेकिन भारत में सोने की खरीद पारंपरिक रूप से होती है।

डब्ल्यूजीसी के मैनेजिंग डायरेक्टर (इन्वेस्टमेंट) मारकस ग्रब ने कहा कि भारत में वित्तीय सिस्टम काफी कम विकसित हो पाया है। इस वजह से सोना अहम भूमिका निभा रहा है। डब्ल्यूजीसी का अनुमान है कि चालू वर्ष 2013 के दौरान भारत में सोने की मांग 865 से 965 टन के बीच रह सकती है।

इस तरह अगर सोने की मांग 865 टन रहती है तो यह वर्ष 2012 के बराबर ही होगी। लेकिन यह आंकड़ा 965 टन पर पहुंचता है तो मांग में 11 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज होगी।

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2012 की पहली छमाही में उपभोक्ताओं का रुझान कम रहा क्योंकि सोने की आयात में शुल्क में बढ़ोतरी, आयात पर अंकुश के उपायों और घरेलू बाजार में ऊंचे भाव ने ज्वैलरी को अनाकर्षक बना दिया। लेकिन दूसरी छमाही में मांग सुधर गई क्योंकि पिछले वर्ष की चौथी तिमाही में शादियों और त्यौहारी सीजन की खरीद मजबूत रही।

डब्ल्यूजीसी के अनुसार आलोच्य वर्ष में मूल्य के लिहाज से सोने की मांग 8 फीसदी बढ़ गई। लेकिन मात्रा के लिहाज से गिरावट ही दर्ज की गई क्योंकि पिछले एक साल के दौरान सोने के मूल्य में भारी तेजी दर्ज की गई। सोने की कीमत बढऩे के कारण लिहाज से लिहाज से सोने की मांग में वृद्धि दिखाई दी।

मात्रा के लिहाज से वर्ष 2012 में सोने की ज्वैलरी मांग 11 फीसदी घटकर 552 टन रह गई। जबकि वर्ष 2011 के दौरान ज्वैलरी के लिए 618.3 टन सोने की मांग रही थी। इसी तरह निवेश के लिए सोने की मांग 15 फीसदी घटकर 312.2 टन रह गई। वर्ष 2011 में निवेश के लिए 368 टन सोने की मांग रही थी।

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