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Ada Louise Huxtable
रेलवे जब बना तो सबसे आधुनिक था,आज इससे पुराना कुछ भी नहीं।
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Ground Report: क्या आप भी अपने बैंक के 'झूठ' में फंस गए हैं?
बैंकों और उनके ग्राहकों का रिश्ता विश्वास पर टिका होता है। इसी विश्वास की झलक बैंकों के स्लोगन में भी देखने को मिलती है, फिर चाहे वो एसबीआई का स्लोगन 'हर मोड़ पर आपके साथ' हो, या यूको बैंक का 'ऑनर्स योर ट्रस्ट' हो।
इसी ट्रस्ट के चलते खाताधारक या लोन लेने वाले अपनी कमाई या कागजात बैंकों के हवाले करते हैं। कुछ ऐसा ही किया था यूको बैंक से लोन लेने वाले स्टेनली पुनस्वामी नाडर ने। लेकिन यूको बैंक उनके विश्वास पर खरा नहीं उतरा। नाडर ने लोन के बदले सिक्योरिटी के रूप में बैंक के पास अपने कुछ कागजात जमा किये थे। लोन पूरा होने के बाद जब वे अपने ऑरिजनल कागजात लेने बैंक पहुंचे तो उन्हें जवाब मिला कि आपके कागजात हमसे खो गए हैं।
यहीं से नाडर और उनके बैंक के बीच का विश्वास टूटने का सिलसिला शुरू होता है। यह कहानी सिर्फ नाडर की ही नहीं है, बल्कि ऐसा कभी भी किसी भी बैंक के ग्राहक के साथ हो सकता है।
ऐसे में अब यह सवाल उठता है कि क्या बैंक जो अपने स्लोगन में लिखते हैं, उसे किस हद तक पूरा करते हैं? क्या उन स्लोगनों में झूठ बोलते हैं बैंक?
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