CORPORATE
Home » News Room » Corporate »'पानी पर राज्यों के अधिकारों का अतिक्रमण नहीं'
Randy Thurman
एक पैसा बचाने का मतलब दो पैसा कमाना जरूर है लेकिन टैक्स चुकाने के बाद।
'पानी पर राज्यों  के अधिकारों का अतिक्रमण नहीं'

प्रधानमंत्री के आश्वासन के बाद राष्ट्रीय जल नीति को मंजूरी

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आश्वासन दिया है कि जल प्रबंधन को लेकर राज्यों के अधिकारों पर अतिक्रमण की केंद्र की कोई मंशा नहीं है। प्रधानमंत्री के इस आश्वासन के बाद राष्ट्रीय जल संसाधन परिषद की बैठक के दौरान नई जल नीति को मंजूरी दे दी गई।


परिषद की छठी बैठक विज्ञान भवन में आयोजित थी। इसमें विभिन्न राज्यों और केंद्र सरकार के प्रतिनिधि शामिल थे। बैठक में मुख्य रूप से नई राष्ट्रीय जल नीति पर ही चर्चा हुई। इसमें जल  प्रबंधन के बारे में राष्ट्रीय विधि तंत्र बनाने का प्रस्ताव है। इसका कई राज्यों ने विरोध किया था। उनके मुताबिक यह केंद्र द्वारा राज्यों के अधिकारों में अतिक्रमण की कोशिश है।


इसे स्पष्ट करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जल प्रबंधन पर प्रस्तावित विधि तंत्र को सही परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए। इसमें केंद्र-राज्य सरकार और स्थानीय निकायों के अधिकारों का स्पष्ट उल्लेख किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने भू-जल के गिरते स्तर पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जल के दोहन और उपयोग के बारे में कोई नियमन नहीं है। इसके नियमन की जरूरत है।


डॉ. सिंह ने कहा कि भविष्य में पानी की कमी देश के सामाजिक और आॢथक विकास में बाधा खड़ी कर सकती है। भारत में दुनिया की लगभग 18 प्रतिशत आबादी है। जबकि इस्तेमाल करने लायक पानी सिर्फ चार प्रतिशत। जलवायु परिवर्तन से आगे चलकर पानी की कमी और गंभीर रूप ले सकती है। इससे पहले केंद्रीय जल संसाधन मंत्री हरीश रावत ने कहा कि सबको पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती है। विभिन्न क्षेत्रों में पानी की जरूरत पूरी करने के लिए 2050 में 450 अरब घन मीटर जल भंडारण की जरूरत होगी। अभी देश में यह क्षमता 253 अरब घन मीटर है।

Email Print Comment