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Home » Market » Commodity » Agri »खेतों की बढ़ती लवणता, घटता जलस्तर चुनौती
Ludwig von Mises
फायदा सफल कदमों का भुगतान है,जिसे बिना मूल्यांकन के बताया नहीं जा सकता।

मछली पालन और पशुपालन से छोटे किसान अपनी आय में बढ़ोतरी कर सकते हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. एस. अयप्पन ने केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान, करनाल द्वारा आयोजित दो दिवसीय बैठक में कृषि से संबंधित समस्याओं के निराकरण हेतु रणनीति तैयार करने पर बल दिया।


उन्होंने कहा कि घटती फसल उत्पादकता, जमीन में लवणता का बढऩा, गिरते भूमि जलस्तर जैसी चुनौतियों का सामना किसानों को करना पड़ रहा है। इनसे निपटने के लिए और प्रयास किए जाने की जरूरत है।


उन्होंने कहा कि जीरो टिलेज, कृषि में मिट्टी तथा जल का उपयोग, पशुपालन में संकर किस्मों तथा मछली पालन पर जोर देने की आवश्यकता है क्योंकि यह छोटे किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हैं। भूमिगत जलस्तर को बढ़ावा देने जैसे कार्यक्रम, पानी के बहुआयामी उपयोग, मछली तथा
फसलों के उन्नतशील प्रजातियों के बीजों को बड़े पैमाने पर हर किसान तक उपलब्ध कराने का आह्वान किया।


भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उपमहानिदेशक (पशु विज्ञान) डॉ. के एम एल पाठक ने बताया कि देश को जलवायु के आधार पर 8 क्षेत्रीय समितियों में विभाजित किया गया है। इन समितियों का उद्देश्य तय समय पर क्षेत्रीय कृषि संबंधित समस्याओं को ध्यान में रखते हुए कृषि अनुसंधान की प्राथमिकता के आधार पर अवलोकन करना और विकास कार्यों की आवश्यकता की नीति निर्धारण करना है।

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