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Warren Buffett
नियम नंबर एक: पूंजी को खोना नहीं चाहिए, नियम नंबर दो: पहले नियम को ना भूलें।

विशेषज्ञों की टिप्पणी
बीमा कंपनियों का पेंशन प्लान महंगाई के हिसाब से पेंशन नहीं बढ़ता
एक ही फंड के प्रदर्शन पर निर्भर रहना पड़ेगा
पेंशन प्लान पर  लागत आती है ज्यादा
फंड के अंडर परफॉर्म करने पर एक्जिट के विकल्प सीमित
इसकी तुलना में एनपीएस में हैं छह फंड मैनेजर
एनपीएस लो कॉस्ट मॉडल के साथ ज्यादा पारदर्शी और भरोसेमंद

जीवन बीमा कंपनियों की ओर से पेश किए जा रहे पेंशन उत्पाद स्वतंत्र विश्लेषकों की राय में आम आदमी की पेंशन जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं हैं। विश्लेषकों का कहना है कि पहला, तो इन पर मिलने वाला रिटर्न तेजी से बढ़ रही महंगाई को मात देने में सक्षम नहीं है। दूसरा, इस तरह के पेंशन प्लान में आपको एक ही फंड के प्रदर्शन पर निर्भर रहना पड़ता है तो वह बेहतर प्रदर्शन नहीं करते हैं तो आपके पास सरेंडर के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं हैं।


इसके अलावा बीमा कंपनियों के पेंशन प्लान की लागत दूसरे विकल्प की तुलना में अधिक है। विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा समय में देश की अर्थव्यवस्था जिस तरह से बढ़ रही है इससे यह साफ है कि हम निश्चित रूप से उस दिशा में जा रहे हैं, जब 10 या 20 वर्ष बाद ब्याज दरें घटकर 2-3 फीसदी के स्तर पर आ जाएंगी।


ऐसे में बीमा कंपनियां पेंशन उत्पादों पर क्या रिटर्न देंगी, यह आप खुद सोच सकते हैं। स्वतंत्र विश्लेषक और फाइनेंशियल प्लानर कार्तिक झावेरी का कहना है कि मेरी राय में बीमा कंपनियों के पेंशन उत्पाद से जो पैसा आपको मिलेगा, वह आपके बुढ़ापे की जरूरतों को पूरा नहीं कर सकता। इसके पीछे अहम कारण यह है कि बीमा कंपनियों के पास ऐसा कोई भी प्लान नहीं है जो बढ़ती महंगाई के हिसाब से आपकी पेंशन को बढ़ाता रहे।


इसके अलावा बीमा कंपनियों के पेंशन प्लान के तहत आप जो रकम जिंदगी भर जमा करते हैं, रिटायरमेंट पर आपको उसका एक हिस्सा ही मिल सकता है। ऐसे में अगर आपको कोई बड़ी स्वास्थ्य संबंधी समस्या आ जाती है या आपको पैसे की जरूरत होती है, तो आपका अपना पैसा ही आपके काम नहीं आ पाएगा। इसके अलावा महंगाई के कारण मासिक पेंशन से भी आपकी जरूरतें पूरी नहीं होंगी।


ऐसे मे आपको अपना मूल धन तो खर्च करना ही पड़ेगा। झावेरी का कहना है कि बीमा कंपनियों के पेंशन उत्पाद की डिजाइन ही गलत है। इन कंपनियों को नए सिरे से रिटायरमेंट प्लान के बारे में सोचना होगा। बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) ने बीमा कंपनियों के लिए पेंशन उत्पादों पर नियम तो बना दिए हैं लेकिन लोगों की पेंशन जरूरतों के बारे में इरडा की सोच स्पष्ट नहीं है।


दिल्ली स्थित जेएस फाइनेंशियल एडवायजर्स के सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर जीतेंद्र सोलंकी का कहना है कि अगर आप रिटायरमेंट प्लान कर रहें हैं और बाजार में इसके और विकल्पों पर नजर दौड़ाएं तो बीमा कंपनियों के पेंशन प्लान ज्यादा आकर्षक नजर नहीं आते हैं। इसके बजाए न्यू पेंशन स्कीम, म्यूचुअल फंड और पब्लिक प्रोविडेंट फंड के जरिए आप रिटायरमेंट के लिए बेहतर कॉरपस जमा कर सकते हैं।


जीवन बीमा कंपनियों के पेंशन प्लान की सबसे बड़ी कमी रिटर्न को लेकर है। अगर आप ट्रेडिशनल प्लान की बात करें तो यह 5-6 फीसदी से अधिक रिटर्न नहीं देता है। यह रिटर्न मौजूदा समय में महंगाई की मौजूदा दर को भी पूरा करने में सक्षम नहीं हैं।


इसका आशय है कि इस रिटर्न के साथ मूल राशि की क्रय शक्ति निश्चित समय बाद तुलनात्मक रूप से कम रहेगी अगर आप यूलिप पेंशन उत्पादों की बात करें तो इसमें लागत का मसला है। कंपनी यह लागत भी आपके प्रीमियम से निकालती है। ऐसे में सभी तरह के चार्ज निकालकर रिटर्न देखना पड़ेगा। यूलिप उत्पादों के साथ एक दिक्कत और है। उदाहरण के लिए एचडीएफसी लाइफ का फंड परफॉर्म नहीं कर रहा है तो सरेंडर करने के अलावा आपके पास कोई विकल्प नहीं हैं।


सोलंकी का कहना है कि इरडा के पहले की गाइडलाइंस की तुलना में ये पेंशन उत्पाद ज्यादा कॉस्ट इफेक्टिव तो हैं लेकिन अगर फंड अंडर परफार्म करता है तो एक्जिट के ज्यादा ऑप्शन नहीं है। इसकी तुलना में न्यू पेंशन स्कीम बेहतर विकल्प है। एनपीएस में आपके पास चुनने के लिए छह फंड मैनेजर हैं।


इसके अलावा इरडा की नई गाइडलाइंस के तहत आपको उसी कंपनी से पेंशन यानि एन्युटी खरीदनी होगी, जिससे आपने पेंशन उत्पाद खरीदा है। अब अगर 20 साल बाद कोई कंपनी बेहतर पेंशन दे रही है तो आप उसे नहीं खरीद सकते हैं। इसकी तुलना में एनपीएस लो कॉस्ट मॉडल है और यह आपको ज्यादा विकल्प देता है। बीमा कंपनियों की तुलना में एनपीएस ज्यादा पारदर्शी है।

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