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George W. Bush
इसमें कितने सारे आंकड़े हैं! बिल्कुल यह बजट ही है और कुछ नहीं।
रेलवे की अजब कहानी, खाना सस्ता महंगा पानी

दिलचस्प बात
पिछले 13 वर्षों से रेलवे ने चाय, नाश्ता या भोजन की कीमतों में नहीं किया है इजाफा
लेकिन महज पांच वर्षों में पानी की कीमत में दो बार 25-25% की बढ़ोतरी कर दी है

आप जब अगली बार रेलवे स्टेशन जाएंगे और वहां पानी की बोतल खरीदेंगे तो आपको ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी। रेलवे ने बोतलबंद पानी की कीमत में 25 फीसदी का इजाफा किया है जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। दिलचस्प बात यह है कि पिछले 13 वर्षों से रेलवे ने चाय, नाश्ता या भोजन की कीमतों में तो कोई इजाफा नहीं किया है जबकि पिछले पांच वर्षों के दौरान पानी की कीमत में दो बार 25-25' की बढ़ोतरी कर दी है।


रेलवे बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर के सप्लायर लंबे समय से कीमतों में वृद्धि की मांग कर रहे थे। बाजार में इस समय 17 रुपये में एक लीटर पानी की बोतल मिल रही है, जबकि रेलवे स्टेशनों और रेलगाडिय़ों पर उसे 12 रुपये में ठंडा कर बेचना पड़ रहा था। इसमें बचत नहीं होने की वजह से बोतलबंद पानी के क्षेत्र की कई बड़ी कंपनियों का पानी रेलवे स्टेशनों या रेलगाडिय़ों में मिलना बंद हो गया था।


उसकी जगह छोटी-मोटी कंपनियों की बोतल ने ले लिया था। उनके मुताबिक रेलवे के ब्रांड रेल नीर को भी प्रति बोतल एक से सवा रुपये के नुकसान पर बेचा जा रहा था। इसलिए अब इसकी कीमत तीन रुपये बढ़ाकर 15 रुपये प्रति बोतल कर दी गई है। यही कीमत रेल नीर के साथ-साथ अन्य बोतलों पर भी लागू होगी। वर्ष 2008 की पहली छमाही तक रेलवे स्टेशनों पर पानी की बोतल (एक लीटर) की कीमत 10 रुपये थी।


उसी वर्ष जुलाई में इसका मूल्य 25 फीसदी बढ़ाकर 12 रुपये किया गया था। इसमें अभी 25 फीसदी की फिर बढ़ोतरी की गई है। हालांकि चाय-नाश्ता या भोजन के मामले में ऐसी कोई बात नहीं है। इस बात को सभी जानते हैं कि पिछले पांच वर्ष के दौरान खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतें 50 से 100 फीसदी बढ़ गई हंै। इसके बावजूद रेलवे ने पिछले 13 वर्षों से इसकी कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है।


रेलवे के रेटलिस्ट के मुताबिक अभी भी आप टी पॉट में 285 मिलीलीटर चाय के साथ 170 मिलीलीटर क्षमता वाले कागज के दो कप, दो टी बैग और चीनी के दो पाउच महज पांच रुपये में ले सकते हैं। हालांकि, चिंता की बात यह है कि कीमत में इजाफा नहीं होने की वजह से रेलगाडिय़ों में स्टैंडर्ड भोजन मिलता ही नहीं है। उसका स्थान अला कार्टा (पसंदीदा) भोजन ने ले लिया है जो बेहद महंगा है।

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