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Warren Buffett
निवेश की दुनिया में भव‍िष्‍य के बजाय अतीत को देखना ज्‍यादा बड़ी समझदारी है।
नए साल में औसत वेतन बढ़ोतरी रहेगी दहाई अंकों में

रिपोर्ट
: ज्यादातर कंपनियां वेतन बढ़ोतरी के लिए प्रदर्शन आधारित वृद्धि के सिद्धांत का पालन करते हैं
: रिपोर्ट के मुताबिक नए ग्रेजुएट्स की सैलरी 18,500 से 25,000 रुपये प्रति माह के औसत पर रहेगी
: केमिकल्स, एफएमसीजी सेक्टर सीटीसी व ऑयल एंड गैस, (वेतन पैकेज) के मामले में बाजी मारते हैं
: 80% कंपनियां अपने कर्मचारियों के वेतन स्तर की तुलना के लिए अपने सेक्टर को देखती हैं

आने वाला नया साल नौकरीपेशा लोगों को निराश नहीं करेगा। वर्ष 2013 में नई नौकरियों की संख्या में तो अच्छी खासी बढ़ोतरी रहेगी ही, वेतन वृद्धि भी अच्छी रहेगी। वैश्विक प्रबंधन सलाहकार कंपनी हे ग्रुप ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि नए वर्ष में औसत वेतन वृद्धि 11.2 फीसदी रहेगी। हालांकि यह 2012 में रही 12 फीसदी से थोड़ी कम है।


रिपोर्ट में कहा गया है कि इंडिया इंक में अब अच्छे प्रदर्शन के लिए अच्छी वेतन बढ़ोतरी का मंत्र चल निकला है। हालांकि फिर भी औसत वेतन वृद्धि में गत वर्ष के मुकाबले मामूली गिरावट की संभावना इंडिया इंक ने जताई है। भारतीय कंपनियों में प्रमुख रूप से नौकरी में चार तरह की भूमिकाएं होती हैं क्लेरिकल एंडऑपरेशंस, सुपरवाइजरी एंड जूनियर प्रोफेशनल्स, मिडल मैनेजमेंट एंड सीजंड प्रोफेशनल्स और सीनियर मैनेजमेंट एंड एग्जीक्यूटिव्स।क्लेरिकल एंडऑपरेशंस की जॉब में औसत वेतन वृद्धि विभिन्न स्तरों पर 11.2 फीसदी रहने की संभावना रिपोर्ट में जताई गई है, जो 2012 में 11.5 फीसदी रही थी।


जबकि मध्य स्तर के प्रबंधन से जुड़े प्रोफेशनल्स इस बार वेतन में औसतन 10.9 फीसदी की बढ़ोतरी की उम्मीद कर सकते हैं।  हे ग्रुप की यह जनरल इंडस्ट्री कंपनसेशन रिपोर्ट औद्योगिक उत्पादों, एफएमसीजी, कंस्ट्रक्शन, रिटेल और सेवा क्षेत्र से जुड़ी 410 कंपनियों के करीब 4.18 लाख कर्मचारियों के वेतन पर निगरानी के बाद यह रिपोर्ट जारी की जाती है। इस रिपोर्ट में बड़ी कंपनियों के सीईओ और वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारियों के वेतन को शामिल नहीं किया जाता है।


हे ग्रुप इंडिया के कंट्री मैनेजर (प्रोडक्टाइज्ड सर्विसेज) एमर हलीम का कहना है कि सर्वे में शामिल ज्यादातर कंपनियों का कहना है कि वे वेतन बढ़ोतरी के लिए प्रदर्शन आधारित वृद्धि के सिद्धांत का पालन करते हैं। इसमें बदलाव उसी स्थिति में होता हैजब किसी कंपनी के बिजनेस की परिस्थितियां बदल जाती हैं। वेतन को पुरस्कार के तौर पर देखे जाने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है।


रिपोर्ट के मुताबिक नए ग्रेजुएट्स की सैलरी 18,500 से 25,000 रुपये प्रति माह के औसत पर रहेगी और इंजीनियरिंग इसमें लीड करेगी। इसके अलावा फाइनेंस/अकाउंटिंग, आईटी/टेलीकम्यूनिकेशन इस समय इंडस्ट्री में लोकप्रिय हैं।इसके बाद एडमिनिस्ट्रेशन/सपोर्ट/सर्विस और हेल्थ/एन्वायरमेंट की बारी आती है।


इस अध्ययन में यह भी सामने आया हैकि 80% कंपनियां बाजार में वेतन के स्तर की तुलना करने के लिए अपने औद्योगिक सेक्टर या कुछ चुनिंदा कंपनियों का उदाहरण सामने लेती हैं। विभिन्न उद्योगों के आधार पर देखें तो ऑयल एंड गैस, केमिकल्स और एफएमसीजी सेक्टर सीटीसी (वेतन पैकेज) के मामले में बाजी मारते हैं।

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