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संवारे अपने विकलांग बच्चों का भविष्य

मानसिक रूप से कमजोर बच्चों का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग काफी महत्वपूर्ण हो जाती है। फाइनेंशियल प्लानिंग के अलावा भी कई सारे मसले हैं जिसमें से कुछ कानूनी हैं और माता-पिता को इसका ध्यान रखना जरूरी होता है

विकलांग बच्चा वह होता है जो या तो शारीरिक रूप से विकलांग हो या फिर जिसे अपने फैसले लेने के लिए आजीवन दूसरों पर आश्रित रहना पड़े। मानसिक रूप से कमजोर बच्चों का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग काफी महत्वपूर्ण हो जाती है। फाइनेंशियल प्लानिंग के अलावा भी कई सारे मसले हैं जिसमें से कुछ कानूनी हैं और माता-पिता को इसका ध्यान रखना जरूरी होता है।  इन मुद्दों के बारे में अनभिज्ञता परेशानी की बड़ी वजह हो सकती है और इससे बच्चे का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। इस मसले पर विचार करने की जरूरत है जिससे बच्चे के भविष्य को सही हाथों में सुरक्षित किया जा सके।


गार्जियनशिप
इसमें कोई शक नहीं है कि माता पिता किसी भी बच्चे के नेचुरल गार्जियन होते हैं। ऐसे में बच्चे की सही देखभाल वे ही कर सकते हैं। यह बात और है कि उनकी गार्जियनशिप तभी तक रहती है जब तक बच्चा अवयस्क है। वयस्क यानि की 18 साल का होने पर एक विकलांग बच्चे को कोर्ट से गार्जियनशिप लेने की जरूरत पड़ती है।


इसका कारण यह है कि अगर माता-पिता को कुछ हो जाता है तो ऐसे बच्चे की जिम्मेदारी कौन उठाएगा। जिन माता-पिता का एक ही बच्चा है और वह भी विकलांग तो उनके लिए एक सही गार्जियन ढूंढना काफी मुश्किल काम है। यहां तक कि जिन परिवारों में भाई-बहन मौजूद होते है उनमें भी गार्जियनशिप के बारे में जल्द से जल्द विचार करना चाहिए।


एक मामले में ऐसा ही हुआ जबकि विकलांग बच्चा भारत में था और उसका भाई विदेश में। ऐसे में परिवार वालों की चिंता यह थी कि हो सकता है कि बड़ा भाई विदेश से वापस नहीं आएगा क्योंकि वह वहां अच्छा कमा रहा है। ऐसी परिस्थितियां किसी के भी सामने आ सकती हैं। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि गार्जियनशिप ऐसी हो जिससे बच्चे को फायदा मिले। इससे यह भी पता चल सकता है कि नियुक्त किया गया गार्जियन बच्चे की जिम्मेदारी उठाने के लिए कितना इच्छुक है।


जहां बच्चे का गार्जियन किसी और परिवार का सदस्य है वहां उसे बच्चे की जरूरतों से वाकिफ कराना जरूरी हो जाता है। कई बार विकलांग बच्चे के परिवार के लिए दो गार्जियन नियुक्त करने की जरूरत भी पड़ जाती है। एक गार्जियन रोजाना के कामों के लिए और दूसरा वित्त संबंधी जरूरतों के लिए। जिस परिवार में कोई गार्जियन मौजूद नहीं होता है वहां नेशनल ट्रस्ट ऑफ इंडिया की भी मदद ली जा सकती है। यह एक सरकारी संस्था है जो चार तरह की विकलांगता से ग्रस्त बच्चों की मदद करती है।


विकलांग बच्चों के लिए आवास
एक विकलांग बच्चे के लिए आवास प्रमुख मुद्दा होता है। ऐसे में जिन माता-पिता के पास रहने की सही जगह मौजूद नहीं है, उन्हें इसके लिए सरकार की मदद लेनी पड़ती है। अगर उन्हें कुछ हो जाए तो ऐसी स्थिति में उनके बच्चे के पास रहने की कोई जगह तो हो। यही कारण है कि रियल एस्टेट की खरीदारी ऐसे परिवार के लिए काफी अहम हो जाती है जिसके यहां कोई विकलांग बच्चा है।


इसकी योजना जल्दी बनानी चाहिए जिससे आपके पास घर खरीदने के लिए पर्याप्त फंड मौजूद हो। बहुत से परिवार विकलांग बच्चे की जिम्मेदारी की वजह से होम लोन के चक्कर में नहीं पडऩा चाहते हैं। अगर ऐसे बच्चे का कोई भाई बहन है तो माता पिता को दोनों के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए। ऐसे में वसीयत लिख कर दोनों बच्चों के हितों को सुरक्षित किया जा सकता है।


लेटर ऑफ इंटेंट
एक विकलांग बच्चे की रोजाना की जरूरतें काफी अलग होती हैं और उन्हें सुनना भी बेहद जरूरी होता है। माता-पिता होने के नाते आपको पता हो सकता है कि आपके बच्चे की जरूरतें क्या है पर अगर कोई अप्रत्याशित घटना हो जाए तो ऐसे में नियुक्त किए गए गार्जियन को इसकी जिम्मेदारी उठानी होगी। यह जिम्मेदारी अचानक से नियुक्त किए गए गार्जियन पर आ जाए तो उसकी जरूरतों को समझने में काफी वक्त लग सकता है।


ऐसी स्थिति से निबटने के लिए अमेरिका में लेटर ऑफ इंटेंट काफी अहम इंस्ट्रूमेंट है। इसमें बच्चे के जीवन से जुड़ी हर जानकारी का ब्योरा होता है। इसमें उसके खाने-पीने की आदतों से लेकर उसके व्यवहार और हर पहलू का जिक्र होता है। इस इंस्ट्रूमेंट का इस्तेमाल न सिर्फ गार्जियन करता है बल्कि यह विकलांग बच्चे के भाई-बहन के भी काम आता है जिससे वे उसकी जरूरतों को समझ सकें।


कई मौकों पर तो यह विकलांग बच्चे के पालन-पोषण में माता-पिता के भी काम आता है। आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि जैसे ही आपको पता चले कि आपका बच्चा विकलांग है तो उसकी सभी तरह की जरूरतों को लिख कर रखें। जैसे ही बच्चा बड़ा हो इन दस्तावेजों में बदलाव भी करें जिससे ज्यादा से ज्यादा जानकारी इसमें शामिल की जा सके।


सबसे अहम यह है कि जो लोग भविष्य में आपके बच्चे की देखभाल करने वाले हों उन्हें इसके बारे में जरूर बताएं। इसके अलावा भी कई ऐसे मसले हैं जिस पर आपको सोचने की जरूरत है और इसके लिए पहले से प्लानिंग करनी बेहद जरूरी है।
-लेखक दिल्ली स्थित जे. एस. फाइनेंशियल एडवाइजर्स के सर्टिफायड फाइनेंशियल प्लानर हैं।

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