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Randy Thurman
एक पैसा बचाने का मतलब दो पैसा कमाना जरूर है लेकिन टैक्स चुकाने के बाद।
धारा 80डी की सीमा में ही है हेल्थ चेक-अप का खर्च

मेरे पास पहले से एक हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी है जिस पर मैंने धारा 80डी के तहत 15,000 रुपये की कटौती का लाभ पाया है। क्या प्रिवेंटिव हेल्थ चेक-अप के तहत मैं अतिरिक्त 5,000 रुपये की कटौती का लाभ पा सकता हूं?  -रणधीर, भोपाल


-जब तक आम बजट में इसकी घोषणा नहीं हुई थी तब तक एक वित्त वर्ष में हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम के भुगतान पर धारा 80डी के तहत 15,000 रुपये तक की कटौती का लाभ मिलता था। वरिष्ठ नागरिकों को यह लाभ 20,000 रुपये तक मिलता था।


इसके अलावा  अगर आप अपने माता-पिता के हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम भरते हैं तो अतिरिक्त 15,000 रुपये की कटौती का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। अगर माता-पिता वरिष्ठ नागरिक है तो यह लाभ 20,000 रुपये तक का हो सकता है।


अब नियमों के अनुसार, उपरोक्त के अलावा हेल्थ चेक-अप के लिए खर्च किए 5,000 रुपये को भी धारा 80डी में शामिल कर लिया गया है। इसलिए अगर आप धारा 80डी के तहत हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम के भुगतान पर 15,000 रुपये की कटौती का लाभ पा रहे हैं तो हेल्थ चेक-अप पर किए गए खर्च पर आपको अतिरिक्त कटौती का लाभ नहीं मिलेगा।


क्या बजट में प्रस्तावित राजीव गांधी इक्विटी सेविंग्स स्कीम (आरजीईएसएस) में निवेश के लिए डीमैट खाता होना जरूरी है? कृपया इस स्कीम की विस्तार से जानकारी दें। यह भी बताएं कि क्या जो निवेशक अधिक जोखिम उठा सकते हैं उनके लिए यह स्कीम ठीक है? इस स्कीम में हम कब से निवेश कर सकते हैं?  -रत्नेश कुमार, रायुपर


-राजीव गांधी इक्विटी सेविंग्स स्कीम कर कटौती के निवेश विकल्प के तौर पर आम बजट में घोषित किया गया था। वित्त मंत्रालय ने 23 दिसंबर 2012 को आरजीईएसएस के दिशानिर्देशों को अधिसूचित किया। नये रिटेल इन्वेस्टर जिनकी सालाना कमाई 10 लाख रुपये या इससे कम है वह इस स्कीम के तहत 50,000 रुपये का  निवेश कर आयकर अधिनियम की धारा 80सीसीजी की उप धारा (1) तहत कर कटौती का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।


म्यूचुअल फंडों की क्लोज्ड एंडेड स्कीम और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड जो आरजीईएसएस के दिशानिर्देशों के अनुरूप हैं, वह आरजीईएसएस के तहत निवेश के पात्र होंगे। केंद्र सरकार द्वारा घोषित महारत्न, नवरत्न और मिनीरत्न कंपनियों  के शेयर भी आरजीईएसएस में निवेश के योज्य होंगे। सार्वजनिक कंपनियों के आईपीओ और फॉलो ऑन पब्लिक इश्यू भी इसके दायरे में आएंगे।


आरजीईएसएस के तहत निवेशक चाहें तो एकमुश्त या फिर किस्तों में निवेश कर सकते हैं। निवेशकों को पहले साल अपनी होल्डिंग के खरीद-बिक्री की अनुमति नहीं होगी। इसके बाद के वर्षों में निवेशक ट्रेड कर सकते हैं। इन शेयरों में निवेशकों को प्रत्येक दो वर्षों की फ्लेक्सिबल लॉक-इन अवधि के दौरान 270 दिनों तक निवेश बनाए रखना होगा।


इसे इस तरह भी समझा जा सकता है कि पात्र प्रतिभूतियों में तीन वर्षों तक निवेश बनाए रखना होगा जिसमें एक साल की तय लॉक-इन अवधि होगी और दो वर्षों की फ्लेक्सिबल लॉक-इन अवधि। फ्लेक्सिबल लॉक-इन अवधि के दौरान निवेशक सशर्त कारोबार कर सकते हैं। आधिकारिक गजट में इसके नियम अधिसूचित होने के बाद यह स्कीम लांच किया जाएगा।

सुरेश के. नरूला, सर्टिफायड फाइनेंशियल प्लानर, प्रूडेंट एफपी, पंचकुला

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