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Home » Market » Stocks »सेबी के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी में फंड वितरक
Warren Buffett
नियम नंबर एक: पूंजी को खोना नहीं चाहिए, नियम नंबर दो: पहले नियम को ना भूलें।

जनवरी से डायरेक्ट निवेश से वितरक और एएमसी खफा

पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा 1 जनवरी, 2013 से म्यूचुअल फंडों में डायरेक्ट निवेश की योजना को अब फंड वितरकों और एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (एएमसी) के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। खबर है कि इसके खिलाफ म्यूचुअल फंड वितरक अदालत में जाने की तैयारी कर रहे हैं।


दरअसल, सेबी ने पिछले दिनों अपने सर्कुलर में कहा कि एक जनवरी से म्यूचुअल फंड के निवेशक डायरेक्ट इनवेस्ट कर सकते हैं। इसके लिए किसी वितरक की जरूरत नहीं होगी। सेबी का यह आदेश नये और पुराने, दोनों निवेशकों पर लागू होता है। सेबी के इस सर्कुलर का असर यह होगा कि जो निवेशक डायरेक्ट प्लान के जरिए निवेश करता है तो उन्हें वितरकों को कोई शुल्क नहीं देना होगा।


लेकिन वितरकों और एएमसी का इस पर विरोध है। एक अग्रणी एएमसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी का कहना है कि देश में कुल 45 म्यूचुअल फंड कंपनियां हैं और 130 करोड़ की जनसंख्या में सक्रिय रूप से महज 5,000 फंड वितरक हैं। ऐसे में सेबी को वितरकों को बढ़ावा देने और नए रिटेल निवेशक लाने के लिए प्रयास करना चाहिए। लेकिन सेबी इसके उल्टा कर रहा है।


अगर यह 5,000 वितरक भी फंड बेचना बंद कर दिए तो इसका हर्जाना फंड उद्योग को भरना होगा। फंड उद्योग में रिटेल का हिस्सा मुश्किल से 30 फीसदी है। नए डायरेक्ट प्लान से यह होगा कि जो एचएनआई 40-50 फीसदी हिस्सेदारी रखते हैं वे वितरकों की बजाय इसी प्लान से जाएंगे। उनकी भारी बचत होगी, पर वितरकों का नुकसान होगा और अगर एचएनआई डायरेक्ट प्लान में आते हैं तो वितरकों की रोटी बंद हो सकती है।

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