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Peter Drucker
मुनाफा किसी कंपनी के लिए उसी तरह है जैसे एक व्यक्ति के लिए ऑक्सीजन।
उपभोक्ता हित के लिए जरूरी है रियल्टी रेग्यूलेटर

क्या हैं बिल की खास बातें
हरेक राज्य में एक रेग्यूलेटरी अथॉरिटी की स्थापना की जाएगी
प्रॉपर्टी एजेंट्स एवं रियल्टी प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
बगैर रजिस्ट्रेशन प्लॉट या अपार्टमेंट की बिक्री करने पर सजा
लागत के 10 फीसदी तक आर्थिक दंड या तीन वर्ष की कैद या दोनों
खरीदार की रकम का इस्तेमाल सिर्फ उसी प्रोजेक्ट में हो सकेगा

रियल एस्टेट रेगुलेशन बिल संसद के वर्तमान शीत सत्र में पेश किया जाना प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य रियल एस्टेट सेक्टर में नियमन तथा योजनाबद्ध विकास के लिए रेगुलेटरी अथॉरिटी की स्थापना करना, एक कारगर और पारदर्शी तरीके से अस्थायी संपत्तियों की बिक्री करना एवं इस क्षेत्र में उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है।


बिल के कुछ प्रावधानों पर अब भी डेवलपर्स सहमत नहीं हैं। बावजूद इसके इनका मानना है कि नियामक के आने से क्षेत्र को संगठित किया जा सकेगा और साथ ही पारदर्शिता को भी बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, हाल ही डेवलपर्स के राष्ट्रीय संगठन कन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (क्रेडाई) ने बिल के प्रस्तावित प्रारूप पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा।


ड्राफ्ट बिल का सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव हरेक राज्य में एक रेगुलेटरी अथॉरिटी की स्थापना करना है। इसके अनुसार, प्रॉपर्टी एजेंट्स एवं रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य बनाया जाएगा। प्रस्तावित रियल एस्टेट रेगुलेटर के साथ बगैर रजिस्ट्रेशन कराए प्लॉट या अपार्टमेंट की बिक्री करने पर सजा का प्रावधान होगा। इस सजा में अनुमानित लागत के 10 फीसदी तक का आर्थिक दंड या तीन वर्ष की सजा या दोनों शामिल हंै। प्रस्तावित बिल के अनुसार, डेवलपर्स को खरीदारों से प्राप्त फंड का 70 फीसदी डिपोजिट करना होगा जिसका उपयोग केवल प्रोजेक्ट के डेवलपमेंट के लिए किया जाएगा।


समझा जा रहा है कि संशोधित ड्राफ्ट में डेवलप किए जाने वाली प्रस्तावित जमीन के आकार को कम करके 1,000 वर्ग मीटर कर दिया गया है जो पहले 4,000 वर्ग मीटर था। हालांकि राज्यों को इस सीमा में बदलाव करने की आजादी रहेगी।


प्रत्येक राज्य में एक रियल एस्टेट अथॉरिटी की स्थापना करने की योजना के अतिरिक्त संशोधित बिल में खरीदारों एवं डेवलपरों के बीच मतभेदों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए एक विवाद निवारण तंत्र का गठन किए जाने का भी प्रस्ताव है बिल के प्रस्तावों के अनुसार, बिल्डर या डेवलपर को पहले अथॉरिटी के साथ रजिस्टर करना होगा। इससे अथॉरिटी की वेबसाइट पर डेवलपर की सारी इंफार्मेशन अपलोड हो जाएगी। अथॉरिटी के फैसले को केवल अपीली ट्रिब्यूनल में ही चुनौती दी जा सकेगी जिसे केंद्र के स्तर पर स्थापित किए जाने का प्रस्ताव है।


क्रेडाई अध्यक्ष ललित कुमार जैन ने प्रस्तावित बिल को जनविरोधी बताया है। इनका मानना है कि नियामक को व्यापक अधिकार मिलने से रियल एस्टेट में भ्रष्टाचार बढ़ेगा। हालांकि, इनका कहना है कि खरीदारों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार का यह कदम सराहनीय है लेकिन प्रस्तावित बिल के वर्तमान प्रारूप से समस्याओं का पूर्ण समाधान नहीं होगा।


इसी संबंध में एसोटैक रियल्टी के निदेशक नीरज गुलाटी ने बिजनेस भास्कर को बताया कि बिल से क्षेत्र के प्रत्येक शेयरधारक को लाभ होगा। ग्राहक के साथ डेवलपर के हितों की भी सुरक्षा की जा सकेगी। क्लीयरेंस की प्रक्रिया में तेजी आने से समस्याओं का शीघ्र निवारण होगा जिसकी आज इंडस्ट्री को सख्त जरूरत है। इस क्षेत्र में लंबे समय से सरकारी हस्तक्षेप की अनदेखी की जा रही थी।


उन्होंने कहा कि रियल एस्टेट का पूरा सिस्टम दस्तावेज आधारित है और कानूनी प्रक्रियाओं से होकर गुजरता है। इस कारण रियल एस्टेट से जुड़े मुद्दे काफी जटिल और पेचीदा हो जाते हैं। ऐसे में आम आदमी के लिए इनका अर्थ स्पष्ट रूप से समझना उचित नहीं है। अब तक ग्राहक के लिए अपनी समस्या के समाधान के लिए किसी नियामक के नहीं होने से उन्हें लंबी अदालती कार्यवाही का सामना करना पड़ता है। जो एक अनिश्चितकालीन और बोझिल प्रक्रिया है।


रियल एस्टेट डेवलपर 3सी कंपनी के निदेशक (सेल्स एंड मार्केटिंग) बृजेश भानोत ने बताया कि बिल से ग्राहकों के हितों की रक्षा होगी जिससे उनके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। केंद्र सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों से भी इस तरह के कदम उठाने की उम्मीद है।


सुपरटेक लिमिटेड के सीएमडी आर के अरोड़ा के मुताबिक प्रस्तावित रियल्टी रेग्यूलेटर से सिस्टम में पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि हमें पूरा भरोसा है कि क्लीयरेंस और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रियाओं में लगने वाले समय में कमी आएगी। उपभोक्ता के असंतोष को सुलझाने के लिए विश्वसनीय प्लेटफॉर्म उपलब्ध होगा। सीएचडी डेवलपर्स के मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) रवि सौंद ने भी सरकार की ओर से प्रस्तावित नियमन बिल से भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में मानकीकरण और प्रणाली को व्यवस्थित बनाने के साथ पारदर्शिता में बढ़ावा लाए जाने की बात कही।

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