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Warren Buffett
निवेश की दुनिया में भव‍िष्‍य के बजाय अतीत को देखना ज्‍यादा बड़ी समझदारी है।
रियल्टी रेग्यूलटरी अथॉरिटी

धोखेबाज बिल्डरों से बचाने के लिए स्वतंत्र नियामक जरूरी
केंद्र सरकार द्वारा रियल्टी सेक्टर के लिए रेग्यूलेटरी अथॉरिटी बनाने का निर्णय हम जैसे ग्राहकों के लिए बहुत अच्छा है। मैं पिछले चार सालों से एक घर खरीदने की योजना बना रहा हूं, लेकिन हर साल घर की कीमत बजट से ऊपर निकल जाती है। मुझे समझ नहीं आता कि जब पिछले दो सालों से रियल एस्टेट कारोबार मंदी की चपेट में है, फिर भी मकानों की कीमतें हर साल कैसे बढ़ रही हैं।


मुझे लगता है कि रेग्यूलेटर न होने के कारण बिल्डर मोटा फायदा कमाने के लिए नाजायज तरीके से प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ा रहे हैं और प्रॉपर्टी मार्केट को प्रभावित कर रहे हैं। इसलिए कोई निगरानी तंत्र होना बहुत जरूरी है। साथ ही कई ग्राहक ऐसे भी हैं जो डेवलपर्स की वायदा खिलाफी से पीडि़त हैं। उनकी शिकायतें दूर करने के लिए स्वतंत्र रेग्यूलेटर की अत्यधिक जरूरत है।  -अमरीक सिंह, लुधियाना

मैंने रायपुर के निकट सड्डू इलाके में फ्लैट बुक कराया है। बुकिंग के वक्त बिल्डर ने अक्टूबर 2012 में कब्जा देने का वादा किया था। लेकिन अभी इलेक्ट्रिसिटी और फिनिशिंग से जुड़े काम होने बाकी हैं। मकान की किस्त पहले से ही चालू हो चुकी है। मकान के कब्जे में देरी होने पर बिल्डर खुलकर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। ऐसे में उपभोक्ता हित को ध्यान में रखते हुए जरूरी है कि सरकार बिल्डर्स के लिए जरूरी कानून बनाए। जिससे उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की जा सके।  - नीलकांत चौबे, भिलाई

प्रॉपर्टी कारोबार पूरी तरह से बिल्डर्स के शिकंजे में है, जहां उन्हें जमीन और फ्लैट के रेट तय करने की मनमानी छूट मिली हुई है। बिना किसी कारण के जमीन के भाव सालों में नही दिनों में बढ़ रहे हैं। वहीं जिस मकान या फ्लैट को खरीदने के लिए आम आदमी अपनी पूरी जमा पूंजी लगाता है, उसका निर्माण पूरा करके कब्जा देने के लिए बिल्डरों पर कोई कानूनी बाध्यता नहीं है। बहुत कुछ हाथ से निकल जाने के बाद अब सरकार ने रेगुलेटर बनाने की सुध ली है। कंज्यूमर के हित के लिए जरूरी है कि सरकार इस कानून को जल्द से जल्द लागू करे।
-नितिन पाठक, रायपुर

रियल एस्टेट रेग्यूलेटरी बिल के आने से ग्राहकों  के हित सुरक्षित होंगे। मध्यम व कमजोर वर्ग के ग्राहकों को उचित कीमत में मकान मिल सकेंगे। बुकिंग कराने वाल ग्राहक धोखाधड़ी से बचेंगे क्योंकि कई बिल्डर एग्रीमेंट में कुछ छुपे हुए प्रावधान कर देते हैं। इससे बाद में ग्राहकों को नुकसान उठाना पड़ता है।


उन्होंने जब बिल्डर से बुकिंग एग्रीमेंट किया था, तब उसमें यह प्रावधान था कि तीन साल में फ्लैट का कब्जा दिया जाएगा। अन्यथा बुकिंग राशि पर ब्याज मिलेगा। लेकिन एग्रीमेंट में बुकिंग की तारीख ही नहीं लिखी गई। तीन साल बाद जब उन्होंने ब्याज का दावा किया तो बिल्डर वादे से मुकर गया। इससे उनको दो साल के ब्याज का नुकसान उठाना पड़ा। ऐसे में रियल एस्टेट बिल से ऐसी गतिविधियों पर अंकुश लगेगा।
-एस. एस. सुखीजा, सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर, जयपुर

रियल एस्टेट रेग्यूलेटरी बिल अफोर्डेबल हाउसिंग पॉलिसी की ही तर्ज पर बनाया जा रहा है। इसके तहत हाउसिंग प्रोजेक्ट में मध्यम व कमजोर वर्ग के लिए करीब 35 फीसदी फ्लैट खरीदने का प्रावधान प्रस्तावित है। ऐसे में एक ग्राहक को सस्ता व एक को महंगा फ्लैट मिलेगा। जबकि सरकार वास्तव में कमजोर वर्ग को मकान के लिए अलग से प्रोजेक्ट का प्रावधान करना चाहिए। जब तक बिल में इस विसंगति को दूर नहीं किया जाता, ग्राहकों को फायदा नहीं मिलेगा। सरकार को इस बिल के प्रावधानों पर नए सिरे से विचार करना चाहिए। - नलीनाक्ष जोशी, निजी कंपनी में कर्मचारी, जयपुर

रियल्टी सेक्टर के लिए कुछ  प्रावधान खतरनाक

उपभोक्ताओं के हितों के साथ ही सरकार को डेवलपरों के भी हितों का ध्यान रखना चाहिए। उसी स्थिति में कोई भी नियामक बेहतर ढंग से काम कर सकता है। नियामक बिल में नए प्रोजेक्टों का हर बार पंजीयन, डेवलपरों पर क्रिमिनल केस दायर होने जैसे प्रावधानों को हटाया
जाना चाहिए।


-अजय मोहगांवकर, अध्यक्ष, क्रेडाई, मध्य प्रदेश, भोपाल
सरकार के इस कदम का रियल स्टेट उद्योग की ओर से भी स्वागत किया जा रहा है, किन्तु साथ ही उनकी कई आपत्तियां भी है। इससे ग्राहक को तो लाभ मिलेगा, साथ ही उद्योग का भी बेहतर विकास होगा। कोई भी कारोबार तभी तेजी से बढ़ेगा, जब ग्राहक संतुष्ट हो। ऐसे में नियामक बनाया बेहद आवश्यक है। लेकिन सरकार को डेवलपरों के अधिकारों का भी ध्यान रखना चाहिए।


-सुनील मूलचंदानी, निदेशक चिनार रियल्टी लि., भोपाल
केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तावित रियल एस्टेट नियामक बिल से बिल्डरों की लागत में इजाफा होगा। इस वजह से खरीदारों के लिए भी फ्लैट खरीदना महंगा हो जाएगा। हालांकि बिल के आने से रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता आएगी। ग्राहकों  के साथ धोखाधड़ी करने वाले बिल्डरों पर अंकुश लगेगा। लेकिन नियामक बनने से उन बिल्डरों को भी परेशानी होगी, जो पहले से पारदर्शिता के साथ काम कर रहे हैं। बिल के प्रावधानों के मुताबिक बुकिंग राशि का कुछ हिस्सा बैंकों में ब्याज खाते में जमा रखना जरूरी होगा, लेकिन बिल्डरों को कार्यशील पूंजी की ज्यादा व्यवस्था करनी होगी। इससे बिल्डरों की लागत बढ़ जाएगी। इसका भार आखिर में ग्राहकों को ही उठाना पड़ेगा।


-आत्माराम गुप्ता, चेयरमैन एआरजी ग्रुप, जयपुर
प्रस्तावित रेग्यूलेटरी बिल से बिल्डरों को नए प्रोजेक्ट के लिए ज्यादा पूंजी की जरूरत होगी। कमजोर व मध्यम वर्ग के लिए 35 फीसदी फ्लैट आरक्षित रखने होंगे। इन फ्लैट्स को भी निश्चित कीमत पर बेचना होगा। इससे बिल्डरों की लागत बढऩा तय है। ऐसे में बुकिंग राशि का कुछ हिस्सा बैंकों के पास रखना होगा। लेकिन यह प्रावधान तभी सफल होगा, बिल्डरों को कम ब्याज पर कर्ज की व्यवस्था होगी। तभी आम ग्राहक को रियल एस्टेट नियामक बिल का लाभ मिलेगा। अन्यथा मध्यम वर्ग को तो मकान खरीदने के लिए ज्यादा कीमत चुकानी होगी, बिल्डरों के मार्जिन पर भी असर होगा।


-ओम प्रकाश मोदी, चेयरमैन, ओकेप्लस इंटरनेशनल, जयपुर
तेजी से प्रगति कर रहे छत्तीसगढ़ का रियल एस्टेट सेक्टर अभी भी अपने शुरुआती दौर में है। ऐसे में अक्सर ग्राहकों को अपने हितों की सुरक्षा को लेकर शंका होती है। यदि सरकार सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ में रेग्यूलेटर संबंधी कानून बनाने जैसी सकारात्मक पहल करती है तो वह ग्राहकों से लेकर पूरी इंडस्ट्री के लिए लाभदायक होगी। फिलहाल छत्तीसगढ़ क्रेडाई द्वारा ग्राहकों को बेहतर सेवा देने के लिए उपभोक्ता शिकायत प्रकोष्ठ शुरू किया गया है।


-आनंद सिंघानिया, अध्यक्ष, क्रेडाई छत्तीसगढ़ (मैनेजिंग डायरेक्टर, अविनाश बिल्डर्स, रायपुर)
रियल एस्टेट के क्षेत्र में कस्टमर सर्विस सबसे अहम पहलू है। सीमित दायरा होने के चलते बिल्डर्स अपनी ओर से ग्राहकों से किए गए सभी वायदे पूरा करने की कोशिश करते हैं। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ में रियल एस्टेट से जुड़ी नियामक संस्था होना बहुत जरूरी है। सरकार द्वारा प्रस्तावित कानून रियल एस्टेट कारोबार को नई दिशा देने और कारोबार में पारदर्शिता लाने में बेहद मददगार साबित होगा।


-सुबोध सिंघानिया, मैनेजिंग डायरेक्टर, सिंघानिया बिल्डकॉन, प्रा.लि., रायपुर
पंजाब में पहले ही रियल एस्टेट डेवलपरों पर कई बंदिशें हैं। सीएलयू, ईडीसी, लाइसेंस जैसे तमाम शुल्क देने और कई जगह से एनओसी लेने के बाद ही किसी प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलती है। साथ ही ग्राहक भी डेवलपर्स के खिलाफ कोई भी शिकायत पंजाब अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी या किसी अन्य डेवलपमेंट अथॉरिटी से कर सकते हैं। ऐसे में एक और रेग्यूलेटर लाना मुझे नहीं लगता कि पंजाब के लिए उचित होगा। केंद्र सरकार को ऐसे राज्यों में, जहां कोई डवलपमेंट अथॉरिटी नहीं है, वहां रेग्यूलेटर बनाने पर जोर देना चाहिए। न कि वहां जहां पहले से ही एक अथॉरिटी है। एक अन्य अथॉरिटी के आने से डेवलपर्स की मुश्किलें ही बढ़ेंगी।


-गुलशन कुमार, मैनेजिंग डायरेक्टर, जीके एस्टेट, लुधियाना

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