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Jim Cramer
काश! पैसे पेड़ पर उगते लेकिन पैसा कमाने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है।

उद्योग जगत को उम्मीद है कि जनवरी-मार्च 2013 के दौरान नीतिगत ब्याज दरों में कटौती की जा सकती है। हालांकि, उनका यह भी मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक को अगले साल का इंतजार नहीं करना चाहिए और उद्योगों को प्रोत्साहन देने वाले कदम उठाने चाहिए। उद्योग संगठन सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि हमें उम्मीद है कि आरबीआई अगली तिमाही समीक्षा का इंतजार नहीं करेगा।


रिजर्व बैंक को उद्योग जगत की परेशानियों को पहले ही पहचानना होगा और इसके प्रति कदम उठाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उद्योग जगत को आरबीआई से कुछ राहत की आशा है और निचली ब्याज दर पर पूंजी की उपलब्धता इसमें मददगार साबित हो सकती है।


वहीं, एसोचैम के प्रेसिडेंट राजकुमार धूत ने आरबीआई के कदम को सख्त बताते हुए कहा कि हम आरबीआई से एक बार फिर कुछ राहत की आशा कर रहे थे, लेकिन यहां कारोबारी संभावनाओं के विपरीत कदम उठाए गए हैं। फिक्की ने कहा कि मुद्रास्फीति के आंकड़े नीचे आ रहे हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था अब भी दिक्कतों का सामना कर रही है।


ऐसे में उद्योग जगत निवेश और विकास के लिए तरस रहा है। कम ब्याज दरें उम्मीदों को राहत देंगी, जोकि सकारात्मक कदम की एक शुरुआत मानी जा सकती है।  इसके अलावा, अर्थशास्त्रियों ने कहा कि रिजर्व बैंक का कदम उम्मीदों के अनुरूप है। जनवरी में आरबीआई की ओर से रेपो रेट में 0.25 फीसदी और मार्च में 0.25 फीसदी की कटौती देखी जा सकती है।

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