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दूसरी हरित क्रांति में पीपीपी मॉडल अहम : मुखर्जी

राष्ट्रपति ने कहा- उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रमाणित बीजों का इस्तेमाल बढ़ाना जरूरी

दूसरी हरित क्रांति के लिए कृषि में सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) सक्रिय भूमिका निभा सकता है। पिछले दो दशक में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी आधी घटकर 15 फीसदी रह गई है। ऐसे में अब कृषि क्षेत्र के विकास के लिए विपणन से लेकर निवेश के स्तर पर सुधारों के साथ-साथ नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने की सख्त आवश्यकता है।


राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कृषि क्षेत्र में और समग्रता तथा व्यापक रूप से दूसरी हरित क्रांति का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल ढांचागत क्षेत्र के विकास, मानव विकास के लिए कृषि क्षेत्र को बढ़ाना जरूरी है। इस विशाल कार्य के लिए यह आवश्यक है कि सरकार उचित साझेदारी करके विशिष्ट ढांचा खड़ा करे, जिससे इस क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा मिले।


विज्ञान भवन में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा मंगलवार को आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में भारतीय कृषि में सार्वजनिक निजी भागीदारी से दूसरी हरित क्रांति में प्रवेश के अवसर पर कहा कि कृषि क्षेत्र के विकास के बिना दूसरे क्षेत्रों का विकास नहीं होगा।


इसलिए आवश्यकता है कि कृषि के विकास में पीपीपी मॉडल की भागीदारी को बढ़ाया जाए।
उन्होंने कहा कि 12वीं पंचवर्षीय योजना में कृषि की चार फीसदी विकास दर हासिल करने के लिए कृषि की उत्पादकता बढ़ाना जरूरी है। इसके लिए प्रमाणित बीजों का इस्तेमाल में बढ़ोतरी, बेहतर जलप्रबंधन, खाद और कीटनाशकों का संतुलित उपयोग तथा हाईब्रिड बीजों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही कृषि क्षेत्र में खाद्यान्न की बर्बादी में भी कमी लाने की सख्त आवश्यकता है।

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