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Peter Drucker
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उत्पादन घटने के कारण दो-तीन वर्षों में आयरन ओर की किल्लत होने का अनुमान

देश के कई राज्यों में आयरन ओर का उत्पादन न होने के कारण दो-तीन साल के भीतर घरेलू उद्योगों की आवश्यकता पूरी करने के लिए आयात करने की नौबत आ सकती है। यह आकलन स्टील मेकिंग कमोडिटीज रिसर्च हाउस ओर टीम ने लगाया है।


ओर टीम के डायरेक्टर सचिन सहगल ने कहा है कि वर्ष 20120-13 के दौरान देश में सिर्फ 14 करोड़ टन आयरन ओर का उत्पादन होने का अनुमान है। इससे सिर्फ घरेलू उद्योगों की मांग ही पूरी हो पाएगी। इस तरह भारत से निर्यात के लिए आयरन ओर उपलब्ध नहीं होगा। उन्होंने कहा कि दो साल पहले देश में करीब 24-25 करोड़ टन सालाना उत्पादन होता ता।


जबकि वर्ष 2011-12 के दौरान आयरन ओर का उत्पादन घटकर 17-18 करोड़ टन रह गया। अवैध खनन पर प्रतिबंध लगाने के क्रम में तमाम खदानों में उत्पादन रोकने के कारण सालाना उत्पादन करीब 10 करोड़ टन
घट गया।


सहगल का आकलन है कि देश में अस्थाई तौर पर आयरन ओर की कमी हो रही है और यह ट्रेंड कुछ समय और चल सकता है। हो सकता है कि दो-तीन साल भारत से आयरन ओर का ज्यादा निर्यात नहीं होगा। आयरन ओर के खनन पर समय-समय पर विवाद होते रहे हैं। माइनिंग उद्योग के सामने समस्या उस समय पैदा हुई जबकि वर्ष 2010 के मध्य में कर्नाटक सरकार ने निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया।


हाल में खनन संबंधी नियमों के उल्लंघन में ओडिशा सरकार ने भी माइनिंग कंपनियों पर 67 हजार करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। सरकार का कहना है कि कंपनियों ने पिछले दस वर्षों के दौरान आवश्यक मंजूरियां लिए बगैर खनन किया और निर्धारित मात्रा से ज्यादा आयरन ओर का भी खनन किया।

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