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Home » Market » Stocks »पीएफसी बांड को मिले महज 700 करोड़ रुपये
Jim Cramer
बाजार बेबाक है। अगर आपके आंकड़े अच्‍छे हैं तो पैसे की बारिश होगी,आंकड़े बदबबूदार हैं तो आप डूब गए!

खस्ता हाल
गुरुवार को बंद इस इश्यू को 70.9 फीसदी अभिदान मिला
ग्रीन-शू ऑप्शन के तहत लगभग 4,590 करोड़ जुटाने का था लक्ष्य
अब सीरीज-2 पर ब्याज दर 8.01 फीसदी कर दी गई है
अभी तक सभी बांड 8 फीसदी से कम ब्याज दी जा रही थी

सरकारी कंपनी पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) के टैक्स फ्री बांड द्वारा 1000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना पर आखिरकार पानी फिर गया। इस ऑफर की तिथि एक हफ्ते बढ़ाने के बाद भी इसे पूरा अभिदान नहीं मिला। 27 दिसंबर को बंद हुए इस इश्यू को महज 70.9 फीसदी अभिदान मिला, जिससे कंपनी सिर्फ 709 करोड़ रुपये जुटाने में कामयाब हुई।


इस महीने से सरकार द्वारा शुरू किये गए कंपनियों के टैक्स फ्री बांड अभियान को यह पहला झटका है, जिसे पूरा पैसा नहीं मिल पाया है। हालांकि 26 दिसंबर से खुले आईआईएफसीएल के बांड द्वारा लक्षित रकम जुटा लिए जाने की संभावना है। क्योंकि इसे महज तीन दिन में ही 37 फीसदी अभिदान यानी 300 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिली है जबकि 11 जनवरी तक यह खुला रहेगा।


पर पावर फाइनेंस को मिले खराब रिस्पांस ने बाजार के मर्चेंट बैंकरों को भी निराश कर दिया है। वैसे सरकार का तीसरा बांड 9 जनवरी 2013  को आ रहा है, जब हुडको का बांड खुलेगा। चौथे बांड के रूप में 21 जनवरी 2013 से आईआरएफसी का बांड खुलेगा।


विश्लेषकों के मुताबिक आगे आनेवाले बांड्स के लिए सरकार को ब्याज दर समय-सीमा, दोनों में बढ़ोतरी करनी होगी। महज एक हफ्ते के लिए खुले ऑफर को वैसे भी पूरा अभिदान मिलना कठिन होता है।


आईआईएफसीएल में बैंकों ने अच्छी पूंजी लगाई है, जिससे तीन दिन में इसे 300 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिल गई है। सरकार के पहले बांड आरईसी को सबसे अधिक सफलता मिली जो 1,000 करोड़ की जगह 2,500 करोड़ रुपये जुटाए।लेकिन पावर फाइनेंस को अच्छा अभिदान न मिलने से उसे तिथि बढ़ानी पड़ी है। इन दोनों से सबक लेते हुए तीसरे बांड में सीरीज-2 पर ब्याज दर बढ़ाकर 8.01 फीसदी कर दी गई है। अभी तक के सभी बांड्स पर 8 फीसदी से कम ब्याज दी जा रही थी।


चौथे बांड के रूप में इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (आईआरएफसी) 21 जनवरी से खुलकर 29 जनवरी को बंद होगा। बाजार के जानकार मानते हैं कि इन बांड्स को अभिदान मिलना मुश्किल होगा। इसके लिए सरकार इन बांड्स की बंद होने की तिथि बढ़ा भी सकती है। क्योंकि इस बार एक तो ब्याज दर कम है और दूसरे कम समय में बांड से 53,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना भी गलत है।

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